राजस्थान के बागीदौरा से विधायक जयकृष्ण पटेल को एंटी करप्शन ब्यूरो ने 20 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने टोडाभीम के एक खनन कारोबारी से विधानसभा में खनन से जुड़े सवाल वापस लेने के बदले दो करोड़ रुपये की मांग की थी। यह राशि किस्तों में ली जानी थी। इस प्रकरण के सामने आने के बाद अब उनकी विधानसभा सदस्यता पर खतरा मंडरा रहा है।
विधानसभा अध्यक्ष का बयान
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा है कि जयकृष्ण पटेल की सदस्यता पर फैसला अदालत के निर्णय के बाद ही लिया जाएगा। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के तहत, यदि किसी सांसद या विधायक को दो साल या उससे अधिक की सजा हो जाती है, तो उनकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है और वे अगले छह वर्षों तक चुनाव नहीं लड़ सकते। उन्होंने कहा कि बिना कोर्ट के फैसले के कोई भी कार्रवाई नहीं की जा सकती। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में जनता की अदालत भी अहम होती है, और कई बार लोग जेल में रहकर भी चुनाव जीत जाते हैं। राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि सवाल पूछकर अनुपस्थित रहना, सवाल वापस लेना और सवाल के बदले पैसे लेना विशेषाधिकार का हनन है। ऐसी स्थिति में विधानसभा की विशेषाधिकार समिति (प्रिविलेज कमेटी) की रिपोर्ट के आधार पर अध्यक्ष सदस्यता रद्द करने का निर्णय ले सकते हैं। ऐसे कई उदाहरण संसद में पहले भी देखे जा चुके हैं।
आपको बता दें जयकृष्ण पटेल भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के विधायक हैं। उन्होंने 4 जून 2024 को हुए उपचुनाव में भाजपा के सुभाष तंबोलिया को 51,434 वोटों से हराया था। यह सीट पूर्व कांग्रेस विधायक महेन्द्रजीत सिंह मालवीय के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी, जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होकर सांसद बने थे।






