
सरकार ने डीजीपी की अध्यक्षता में किया समिति का गठन
महाराष्ट्र सरकार ने सोशल मीडिया पर बिना प्रमाण के बदनामी फैलाने और फर्जी पोस्ट के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए सख्त कदम उठाने की दिशा में पहल की है। हाल के समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए व्यक्तियों और संस्थाओं की छवि खराब करने, झूठे आरोप लगाने और भ्रामक सामग्री प्रसारित करने की घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी गई है, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों को नुकसान और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। इसी परिप्रेक्ष्य में राज्य सरकार ने इस पूरे मुद्दे की गहन कानूनी समीक्षा कराने का निर्णय लिया है। इस उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार ने पुलिस महानिदेशक (DGP) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाए जा रहे फर्जी कंटेंट, आधारहीन आरोपों और मानहानि से जुड़े मामलों का विस्तृत अध्ययन करेगी। साथ ही, यह मौजूदा कानूनी प्रावधानों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करते हुए यह भी जांच करेगी कि क्या वर्तमान कानून इस तरह की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए पर्याप्त हैं या उनमें संशोधन की आवश्यकता है।
सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, समिति को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह सोशल मीडिया के दुरुपयोग से संबंधित मामलों में कानूनी और तकनीकी पहलुओं का व्यापक विश्लेषण करे। समिति यह भी सुझाव देगी कि राज्य स्तर पर नए कानून बनाने की जरूरत है या फिर मौजूदा कानूनों में संशोधन कर उन्हें और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है। राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना और नागरिकों की प्रतिष्ठा की बेहतर कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके तहत समिति अपनी सिफारिशों के माध्यम से ऐसे ठोस उपाय सुझाएगी, जिनसे फर्जी खबरों और बिना प्रमाण के बदनामी फैलाने जैसी गतिविधियों पर लगाम लगाई जा सके और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।






