‘ताइवान मुद्दे पर सावधानी बरतें’: जिनपिंग की ट्रंप को दो-टूक

बीजिंग: दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और महाशक्तियों—अमेरिका और चीन—के बीच रिश्तों का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर बीजिंग पहुंचे हैं, जहाँ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनका भव्य स्वागत किया। इस मुलाकात के केंद्र में न केवल व्यापार और वैश्विक सुरक्षा है, बल्कि ताइवान का संवेदनशील मुद्दा भी प्रमुखता से उभरा है। जिनपिंग ने स्पष्ट शब्दों में ट्रंप से कहा है कि वे “ताइवान के मुद्दे को गलत तरीके से न संभालें।”

2017 के बाद पहली चीन यात्रा
राष्ट्रपति ट्रंप की यह यात्रा साल 2017 के बाद उनका पहला चीन दौरा है। इससे पहले दोनों दिग्गज नेताओं की मुलाकात पिछले साल अक्टूबर में बुसान (दक्षिण कोरिया) में हुई थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप और जिनपिंग की यह सीधी बातचीत आने वाले दशकों के लिए अमेरिका-चीन संबंधों की दिशा और दशा तय करने में निर्णायक साबित होगी।

शानदार स्वागत और सांस्कृतिक कूटनीति
बीजिंग पहुंचने पर चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग और अमेरिकी राजदूत डेविड पर्ड्यू ने ट्रंप की अगवानी की। द्विपक्षीय बैठकों के अलावा, ट्रंप के सम्मान में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है:

  • टेंपल ऑफ हैवेन: ट्रंप ऐतिहासिक ‘टेंपल ऑफ हैवेन’ का दौरा करेंगे, जिसे चीन में स्वर्ग और पृथ्वी के बीच संतुलन का प्रतीक माना जाता है।
  • राजकीय भोज: गुरुवार शाम ट्रंप के सम्मान में एक भव्य राजकीय भोज आयोजित किया गया।
  • वर्किंग सेशन: शुक्रवार को दोनों नेता ‘वर्किंग टी’ और लंच पर गहन चर्चा जारी रखेंगे।

“चीन के प्रति मेरे मन में गहरा सम्मान है”
द्विपक्षीय वार्ता के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप का रुख काफी सकारात्मक और गर्मजोशी भरा रहा। उन्होंने शी जिनपिंग की प्रशंसा करते हुए कहा:

“चीन और अमेरिका के बीच संबंध अब पहले से कहीं अधिक मजबूत होने वाले हैं। हमारा साझा भविष्य उज्ज्वल है। राष्ट्रपति शी, आप एक महान नेता हैं और आपके द्वारा किए गए कार्यों के लिए मेरे मन में बहुत सम्मान है। मैं यह बात डंके की चोट पर कहता हूँ।”

ट्रंप ने अपने साथ आए उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल का जिक्र करते हुए कहा कि वे दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित व्यवसायियों को लेकर आए हैं क्योंकि वे चीन के साथ पारस्परिक व्यापार और संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहते हैं। उन्होंने इस बैठक को “इतिहास का सबसे बड़ा शिखर सम्मेलन” करार दिया।

“साझेदार बनें, प्रतिद्वंद्वी नहीं”
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भविष्य की चुनौतियों पर जोर देते हुए वैश्विक स्थिरता की बात की। उन्होंने उम्मीद जताई कि 2026 का यह वर्ष चीन-अमेरिका संबंधों में एक नया ऐतिहासिक अध्याय जोड़ेगा।

जिनपिंग के संबोधन के मुख्य बिंदु:

  1. साझा हित: “हमारे बीच मतभेदों से कहीं अधिक साझा हित हैं। एक देश की सफलता दूसरे के लिए अवसर लेकर आती है।”
  2. सहयोग बनाम टकराव: “चीन और अमेरिका के सहयोग से पूरी दुनिया का भला होगा, जबकि टकराव से दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।”
  3. स्थिरता: “हमें एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी बनने के बजाय साझेदार बनना चाहिए और नए युग में दो प्रमुख देशों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित करने का मार्ग खोजना चाहिए।”

हालांकि दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत केमिस्ट्री अच्छी दिखाई दे रही है, लेकिन ताइवान मुद्दा, दक्षिण चीन सागर और व्यापार असंतुलन जैसे पेचीदा सवाल अब भी मेज पर हैं। जिनपिंग की ‘ताइवान’ पर दी गई चेतावनी यह साफ करती है कि चीन अपनी क्षेत्रीय अखंडता के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगा। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह “शिखर सम्मेलन” केवल औपचारिकताओं तक सीमित रहेगा या वास्तव में वैश्विक शांति और व्यापार के लिए कोई ठोस रास्ता निकालेगा।

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