महाराष्ट्र: मुंबई में मराठी भाषा में साइनबोर्ड लगाने का मुद्दा फिर गरमाया

मुंबई: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर मराठी भाषा में साइनबोर्ड लगाने का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। मुंबई के डिप्टी मेयर संजय घाडी ने शहर के सभी दुकानदारों, होटल मालिकों और व्यापारियों को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए एक महीने के भीतर मराठी (देवनागरी लिपि) में साइनबोर्ड लगाने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय में नियमों का पालन नहीं हुआ, तो उल्लंघन करने वालों को ‘शिवसेना स्टाइल’ में जवाब दिया जाएगा। घाडी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे निरीक्षण कार्य में तेजी लाएं। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि जो अधिकारी कार्रवाई में ढिलाई बरतेंगे, उनके खिलाफ भी विभागीय एक्शन लिया जाएगा।

नियम सबके लिए बराबर: बुधवार को बीएमसी के दुकान एवं प्रतिष्ठान विभाग के अधिकारियों के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में घाडी ने यह फैसला सुनाया। उन्होंने कहा व्यापारियों के पास अब अपना साइनबोर्ड बदलने के लिए केवल 30 दिनों का समय शेष है, अन्यथा उन्हें भारी जुर्माने के साथ-साथ राजनीतिक विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है।

  • अनिवार्यता: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, सभी प्रतिष्ठानों के लिए मराठी साइनबोर्ड लगाना अनिवार्य है।
  • कोई भेदभाव नहीं: चाहे वह कोई फाइव स्टार होटल हो, आलीशान मॉल हो या किसी बड़ी हस्ती का रेस्टोरेंट, मराठी भाषा का सम्मान सबको करना होगा।
  • पहचान का मुद्दा: यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह महाराष्ट्र की अस्मिता और मराठी भाषा के गौरव से जुड़ा विषय है।

आंकड़ों की नजर में: अब तक की कार्रवाई: बीएमसी की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में नियमों की अनदेखी करने वालों पर शिकंजा कसा जा रहा है।

  • मुंबई में कुल पंजीकृत प्रतिष्ठान लगभग – 9 लाख
  • नियम का उल्लंघन करने वाले वर्तमान प्रतिष्ठान – 5,020
  • अब तक कितनों पर हुई कार्रवाई – 3,114
  • अब तक वसूला गया कुल जुर्माना – ₹1.91 करोड़

क्यों अहम है यह मुद्दा
महाराष्ट्र की राजनीति में ‘मराठी मानुष’ और स्थानीय भाषा का मुद्दा हमेशा से केंद्र में रहा है। शिवसेना का मानना है कि मुंबई एक वैश्विक शहर जरूर है, लेकिन इसकी जड़ें मराठी संस्कृति में हैं।

  1. सांस्कृतिक संरक्षण: शिवसेना और अन्य मराठी संगठनों का तर्क है कि अंग्रेजी और अन्य भाषाओं के कारण मराठी भाषा सार्वजनिक स्थलों से गायब हो रही है।
  2. कानूनी आधार: महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही दुकानों के नाम मराठी में लिखना अनिवार्य कर दिया था, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया।

बीएमसी का अगला कदम: 15 दिनों में मांगी रिपोर्ट
बीएमसी की विधि समिति की अध्यक्ष दीक्षा करकर ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि जिन प्रतिष्ठानों को अभी तक नोटिस नहीं मिला है, उन्हें तुरंत सूचित किया जाए।

  • 15 दिनों की डेडलाइन: अधिकारियों से कहा गया है कि वे अगले 15 दिनों के भीतर उन दुकानों की सूची तैयार करें जिन्होंने अब तक बोर्ड नहीं बदले हैं।
  • सख्त मॉनिटरिंग: 15 दिन बाद रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी और एक महीने की मोहलत खत्म होते ही मुंबई की सड़कों पर कड़े तेवर देखने को मिल सकते हैं।

“एक महीने के भीतर नियम नहीं माने गए, तो एकनाथ शिंदे के मार्गदर्शन में शिवसेना कार्यकर्ता अपने तरीके से कार्रवाई करेंगे।”- संजय घाडी, डिप्टी मेयर

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