नोएडा में हुई श्रमिक हिंसा में पुलिस को मिली विदेशी फंडिंग की जानकारी

मुख्य आरोपियों पर एनएसए, जांच तेज

नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर शुरू हुआ श्रमिक आंदोलन अब गंभीर कानूनी और सुरक्षा जांच के दायरे में आ गया है। प्रारंभिक तौर पर यह विरोध प्रदर्शन मजदूरों की मांगों तक सीमित था, लेकिन इसके हिंसक रूप लेने और अब विदेशी फंडिंग के संकेत मिलने के बाद मामला कहीं अधिक संवेदनशील हो गया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी सत्यम वर्मा के बैंक खाते में विभिन्न देशों से करीब एक करोड़ रुपये की रकम जमा हुई थी। इस खुलासे के आधार पर पुलिस ने सत्यम वर्मा और उसकी सहयोगी आकृति के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत सख्त कार्रवाई करते हुए दोनों को जेल भेज दिया है।

13 अप्रैल: शांतिपूर्ण प्रदर्शन से हिंसक घटनाओं तक
नोएडा में 13 अप्रैल को शुरू हुआ श्रमिक आंदोलन शुरुआत में शांतिपूर्ण था, लेकिन अचानक स्थिति बेकाबू हो गई। प्रदर्शन के दौरान शहर की 300 से अधिक कंपनियों में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं, वहीं दो दर्जन से अधिक वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, कुछ संगठित समूहों ने सुनियोजित तरीके से इस आंदोलन को हिंसक दिशा दी। इस संदर्भ में ‘मजदूर बिगुल दस्ता’ नामक संगठन की भूमिका विशेष रूप से संदिग्ध पाई गई है।

मुख्य आरोपियों की भूमिका पर सवाल
पुलिस जांच में सत्यम वर्मा और आकृति की भूमिका को अहम माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, दोनों ने न केवल प्रदर्शनकारियों को उकसाया बल्कि हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने में भी सक्रिय भूमिका निभाई। सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने और अराजकता फैलाने के गंभीर आरोपों के चलते दोनों के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई की गई है। वर्तमान में दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।

विदेशी फंडिंग और हवाला कनेक्शन की जांच तेज
नोएडा कमिश्नरेट की मीडिया सेल के मुताबिक, सत्यम वर्मा के व्यक्तिगत बैंक खाते में डॉलर, पाउंड और यूरो के रूप में एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि विभिन्न देशों से प्राप्त हुई। जांच में यह भी सामने आया है कि यह रकम तुरंत अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी गई, जिससे वित्तीय लेन-देन पर संदेह और गहरा गया है। पुलिस को आशंका है कि इस धन का उपयोग आंदोलन को भड़काने और उसे हिंसक बनाने के लिए किया गया। इसके अलावा, हवाला नेटवर्क के माध्यम से फंडिंग की संभावना को भी गंभीरता से जांचा जा रहा है। सत्यम वर्मा के संभावित संगठनों और संपर्कों की विस्तृत पड़ताल की जा रही है। इस मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपियों रूपेश और आदित्य आनंद की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

पुलिस के हाथ लगे अहम साक्ष्य
गौतम बुद्ध नगर पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र में हुई हिंसा के संबंध में विभिन्न थानों में कई प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान सत्यम वर्मा और आकृति के खिलाफ पर्याप्त डिजिटल और वित्तीय साक्ष्य मिले हैं, जो उन्हें हिंसा भड़काने और उसे अंजाम देने से जोड़ते हैं। बैंक खातों के लेन-देन का गहन विश्लेषण और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच जारी है।

जमानत याचिकाओं पर सुनवाई टली
जिला एवं सत्र न्यायालय में गुरुवार को दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई हुई। आकृति की जमानत पर अगली सुनवाई 18 मई को निर्धारित की गई है, जबकि सत्यम वर्मा की जमानत याचिका पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। जानकारी के अनुसार, पुलिस द्वारा केस डायरी समय पर प्रस्तुत न किए जाने के कारण सुनवाई में देरी हुई। आकृति के वकील रजनीश वर्मा ने बताया कि पुलिस ने अतिरिक्त समय की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। वहीं, सत्यम वर्मा के अधिवक्ता अली जिया कबीर के अनुसार, जमानत पर फैसला एक-दो दिन में आ सकता है।

अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई जारी
पुलिस ने इस मामले में सोनू, विशाल सहित 25 अन्य आरोपियों की कस्टडी रिमांड के लिए भी अदालत में अर्जी दी है। पूरे घटनाक्रम की जांच बहु-स्तरीय तरीके से जारी है और आने वाले समय में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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