
दिल्ली हाईकोर्ट ने संबंधित याचिका को खारिज किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) वर्ग के अभ्यर्थी एससी, एसटी और ओबीसी श्रेणियों की तरह आयु सीमा में छूट या परीक्षा में अतिरिक्त प्रयासों की मांग नहीं कर सकते। अदालत ने संबंधित याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सरकार की यह नीति न तो मनमानी है और न ही असंवैधानिक….
शुक्रवार को दिए गए अपने निर्णय में हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार की सीधी भर्तियों में ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को एससी, एसटी या ओबीसी के समान आयु छूट औरअतिरिक्त अवसर देने का दावा उचित नहीं है। न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि ईडब्ल्यूएस वर्ग की आर्थिक वंचना को जाति-आधारित भेदभाव के बराबर नहीं माना जा सकता। अपने फैसले में हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि विभिन्न आरक्षित श्रेणियों को अलग-अलग प्रकार की छूट देना विधायिका और कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है। चूंकि ईडब्ल्यूएस वर्ग की परिस्थितियां जातिगत ऐतिहासिक भेदभाव से अलग हैं, इसलिए दोनों को समान लाभ देना अनिवार्य नहीं है। इस निर्णय के साथ ही केंद्र सरकार की मौजूदा नीति को बरकरार रखा गया है, जिसके तहत ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों पर सामान्य वर्ग की तरह ही आयु सीमा और प्रयासों के नियम लागू होते हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ईडब्ल्यूएस को आयु सीमा और प्रयासों में छूट न देना सरकार का नीतिगत निर्णय है, जिसे दुष्प्रेरित, मनमाना या असंवैधानिक नहीं कहा जा सकता। इसी आधार पर खंडपीठ ने ईडब्ल्यूएस वर्ग के कुछ अभ्यर्थियों द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि उन्हें केंद्र सरकार की भर्तियों में एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों की तरह ऊपरी आयु सीमा में छूट और परीक्षा में अतिरिक्त अवसर प्रदान किए जाएं। हालांकि, अदालत ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।





