‘सॉफ्ट प्लाक’ का खतरा; रिपोर्ट नॉर्मल आने के बाद भी आ सकता है हार्टअटैक

क्या आपकी हार्ट रिपोर्ट सामान्य आई है, तब भी हार्ट अटैक का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता। आइए समझते हैं ‘सॉफ्ट प्लाक’ का छिपा हुआ जोखिम..

आजकल अक्सर सुनने को मिलता है, “कल ही उनका चेकअप हुआ था, सब कुछ नॉर्मल था, फिर अचानक हार्ट अटैक कैसे आ गया?” यह सवाल न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि मेडिकल साइंस के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। आमतौर पर लोग ईसीजी या टीएमटी रिपोर्ट सामान्य आने के बाद खुद को पूरी तरह सुरक्षित मान लेते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह धारणा भ्रामक हो सकती है।

क्या है ‘सॉफ्ट प्लाक’ का खतरा?
हार्ट अटैक का कारण हमेशा वह बड़ा ब्लॉकेज नहीं होता, जो जांच में साफ दिखाई दे। कई मामलों में असली खतरा ‘सॉफ्ट प्लाक’ होता है, जो धमनियों को केवल 30% से 50% तक ही संकुचित करता है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी की एक रिसर्च के अनुसार, करीब 50% हार्ट अटैक ऐसे मामलों में होते हैं, जहां ब्लॉकेज 50% से भी कम होता है। इसे ‘वल्नरेबल प्लाक’ भी कहा जाता है। कम ब्लॉकेज होने की वजह से खून का प्रवाह सामान्य बना रहता है, जिससे ईसीजी या स्ट्रेस टेस्ट में कोई असामान्यता नहीं दिखती। लेकिन जब यह ‘सॉफ्ट प्लाक’ अचानक फटता है, तो उस स्थान पर तुरंत खून का थक्का बन जाता है, जो धमनी को पूरी तरह ब्लॉक कर देता है। यही कारण है कि सामान्य रिपोर्ट वाले व्यक्ति को भी अचानक हार्ट अटैक आ सकता है। कार्डियोलॉजिस्ट्स का मानना है कि मेडिकल रिपोर्ट्स केवल उस समय की स्थिति दर्शाती हैं, भविष्य की गारंटी नहीं देतीं। विशेषज्ञों के मुताबिक, ईसीजी और टीएमटी टेस्ट आमतौर पर तब ही समस्या दिखाते हैं जब ब्लॉकेज 70% से अधिक हो। ‘सॉफ्ट प्लाक’ एक ‘टाइम बम’ की तरह होता है, जो तनाव, प्रदूषण या खराब जीवनशैली के कारण कभी भी फट सकता है। यदि आपको सीने में हल्का भारीपन, सांस फूलना या जबड़े में दर्द महसूस हो, तो भले ही आपकी रिपोर्ट सामान्य हो, इन संकेतों को नजरअंदाज न करें।

एक अन्य अध्ययन में ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के शोधकर्ताओं ने पाया कि दिखने में स्वस्थ लोगों में भी ‘साइलेंट इन्फ्लेमेशन’ के कारण हार्ट अटैक हो सकता है, जो नियमित जांच में सामने नहीं आता।

बचाव के लिए क्या करें?

अगर आपकी रिपोर्ट सामान्य है, लेकिन जीवनशैली तनावपूर्ण है, तो कुछ उन्नत जांच करवाने पर विचार किया जा सकता है—

  • सीटी कैल्शियम स्कोरिंग: धमनियों में कैल्शियम जमा होने और भविष्य के जोखिम का आकलन करता है।
  • सीआरपी (C-Reactive Protein) टेस्ट: शरीर में छिपी सूजन का स्तर बताता है।
  • संतुलित जीवनशैली: सिर्फ रिपोर्ट पर निर्भर न रहें, बल्कि ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें, स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें।

डिस्क्लेमर: इस लेख का उद्देश्य स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाना है। किसी भी दवा या उपचार से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

विशिखा मीडिया

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