आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी ने एक बार फिर 2010 के चर्चित कोच्चि आईपीएल विवाद को लेकर बड़ा और सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने कांग्रेस सांसद शशि थरूर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनसे सुनंदा पुष्कर की हिस्सेदारी को लेकर सवाल न उठाने के लिए दबाव बनाया गया था। यहां तक कि उन्हें छापेमारी करवाने की धमकी भी दी गई थी। एक इंटरव्यू में ललित मोदी ने कहा कि जब उन्होंने कोच्चि आईपीएल फ्रेंचाइजी में सुनंदा पुष्कर की हिस्सेदारी को लेकर सवाल उठाए, तब शशि थरूर का उन्हें फोन आया। मोदी के अनुसार, थरूर ने उनसे कहा कि वे इस मुद्दे को न उठाएं क्योंकि सुनंदा उनकी करीबी हैं। मोदी का दावा है कि जब उन्होंने इस पर कारण पूछा, तो उन्हें सीधे तौर पर चेतावनी दी गई कि अगर उन्होंने यह मामला आगे बढ़ाया तो उनके यहां अगले ही दिन छापा पड़ सकता है। इस पर मोदी ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि वे किसी भी तरह के दबाव में आने वाले नहीं हैं।

फ्रेंचाइजी समझौते पर हस्ताक्षर से इनकार
ललित मोदी ने बताया कि बेंगलुरु में हुई एक अहम बैठक के दौरान उन्होंने कोच्चि फ्रेंचाइजी के समझौते पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि जब तक सभी शेयरधारकों की पूरी जानकारी और हिस्सेदारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी, तब तक वह आगे नहीं बढ़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय उन्हें सुनंदा पुष्कर के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और जब उन्होंने उनके बारे में पूछा तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला। मोदी के अनुसार, सबसे बड़ा संदेह उन्हें तब हुआ जब यह सामने आया कि सुनंदा पुष्कर को बिना किसी स्पष्ट वित्तीय योगदान के लगभग 25 प्रतिशत हिस्सेदारी दी जा रही थी। उन्होंने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब बाकी निवेशक पूरी लागत वहन कर रहे थे, तब एक व्यक्ति को इतनी बड़ी हिस्सेदारी मुफ्त में देना समझ से परे था। उनका मानना था कि यह मॉडल टिकाऊ नहीं है और आगे चलकर इसमें समस्या आएगी जो बाद में सही भी साबित हुआ।

कोच्चि टीम को शामिल कराने का आरोप
ललित मोदी ने यह भी दावा किया कि उस समय केरल में आईपीएल स्तर का उपयुक्त स्टेडियम तक उपलब्ध नहीं था, फिर भी शशि थरूर लगातार कोच्चि टीम को लीग में शामिल कराने के लिए प्रयासरत थे। उन्होंने कहा कि थरूर उनके संपर्क में रहते थे और कई बार व्यक्तिगत रूप से भी इस मुद्दे पर बातचीत करते थे। कोच्चि टस्कर्स केरल टीम ने इंडियन प्रीमियर लीग में सिर्फ 2011 का एक सीजन खेला। प्रदर्शन भी औसत रहा और टीम अंक तालिका में नीचे रही। बाद में बीसीसीआई ने अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन का हवाला देते हुए इस फ्रेंचाइजी को समाप्त कर दिया। गौरतलब है कि 2010 में सुनंदा पुष्कर की हिस्सेदारी को लेकर उठे विवाद के बाद शशि थरूर को केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। हालांकि, ललित मोदी द्वारा लगाए गए इन नए आरोपों पर फिलहाल शशि थरूर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यह मामला एक बार फिर पुराने विवादों को सुर्खियों में ले आया है और राजनीतिक व खेल जगत में नई बहस को जन्म दे सकता है। अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि इन आरोपों पर आगे क्या प्रतिक्रिया और कार्रवाई होती है।






