11 जिला अदालतों की 22 बेंचों में 4.3 करोड़ से अधिक लंबित ट्रैफिक चालानों के बैकलॉग को साफ करने की तैयारियाँ तेज

- 5 जुलाई से दिल्ली में विशेष वीकेंड कोर्ट की शुरुआत
- 4.3 करोड़ से अधिक लंबित ट्रैफिक चालानों का निपटारा लक्ष्य
- 11 जिला अदालतों में 22 बेंच वीकेंड पर सक्रिय रहेंगी
- प्रत्येक बेंच प्रतिदिन लगभग 700 मामलों की सुनवाई करेगी
- कामकाजी लोगों की सुविधा के लिए वीकेंड पर सुनवाई की व्यवस्था
दिल्ली में बढ़ते ट्रैफिक चालानों के बोझ को कम करने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और न्यायपालिका ने अहम पहल की है। 5 जुलाई से राजधानी में विशेष वीकेंड कोर्ट की शुरुआत की जा रही है, जिनका मुख्य उद्देश्य 4.3 करोड़ से अधिक लंबित ट्रैफिक चालानों का निपटारा करना है। अधिकारियों के अनुसार, ये विशेष कोर्ट केवल कंपाउंडेबल ट्रैफिक मामलों (जिनका निपटारा जुर्माने के माध्यम से किया जा सकता है) की सुनवाई करेंगे। दिल्ली के 11 जिला न्यायालयों में कुल 22 बेंच वीकेंड पर कार्य करेंगी।

लंबित चालानों का बढ़ता दबाव
15 जून तक के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में कुल 4.3 करोड़ से अधिक ट्रैफिक चालान और कैमरा नोटिस लंबित हैं। इनमें 1 करोड़ से ज्यादा स्पॉट चालान और 3.3 करोड़ ऑटोमेटेड कैमरा चालान शामिल हैं। वर्ष 2026 में अब तक 42.2 लाख चालान जारी किए गए, जिनमें से 96.5 प्रतिशत यानी 40.7 लाख से अधिक मामले अभी भी लंबित हैं।
2026 में प्रमुख ट्रैफिक उल्लंघन:
- गलत या बाधक पार्किंग: 12.2 लाख मामले
- बिना हेलमेट वाहन चलाना: 6.7 लाख से अधिक मामले
- बिना पीयूसी प्रमाणपत्र: 2.3 लाख मामले
मौजूदा निपटान प्रणाली:
- वर्चुअल कोर्ट: 24 घंटे ऑनलाइन सुविधा, भौतिक उपस्थिति आवश्यक नहीं
- ईवनिंग कोर्ट: कार्यदिवसों में शाम 5 बजे से 7 बजे तक
- लोक अदालत: समय-समय पर आयोजित
वीकेंड कोर्ट की आवश्यकता क्यों?
निर्धारित समय के बाद अनसुलझे चालान वर्चुअल कोर्ट में ट्रांसफर हो जाते हैं, जिससे मामलों का बैकलॉग बढ़ता है। हालांकि ईवनिंग कोर्ट और लोक अदालत पहले से संचालित हैं, लेकिन कामकाजी लोगों के लिए कार्यदिवसों में उपस्थित होना चुनौतीपूर्ण होता है। इसी समस्या के समाधान के रूप में वीकेंड कोर्ट की शुरुआत की जा रही है। इस व्यवस्था के तहत वाहन मालिक मौके पर ही यूपीआई और भारत बिल पेमेंट सिस्टम के माध्यम से जुर्माना जमा कर सकेंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया तेज और सुविधाजनक बनेगी।




