विश्व पर्यटन दिवस संयुक्त राष्ट्र संगठन द्वारा वर्ष 1980 में शुरु किया गया, जो प्रत्येक वर्ष 27 सितम्बर को मनाया जाता है। यह विशेष दिन इसलिये चुना गया क्योंकि इसी दिन 1970 में यह यू.एन.डब्ल्यू.टी.ओ.( संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन) के प्रभाव में आया था। इसे विश्व पर्यटन के क्षेत्र में बहुत बडा मील का पत्थर माना जाता है, इसका लक्ष्य विश्व पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में अन्तर्राष्ट्रीय समुदायों के साथ साथ सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक मूल्यों को वैश्विक स्तर पर कैसे प्रभावित करता है, इसके बारे में लोगों को जागरुक करना है। पर्यटन दुनिया भर में विकासशील देशों के लिए आय का मुख्य स्रोत बन गया है।
पूरी दुनिया में टेक्नोलॉजी के बदलते स्वरुप और उसकी वजह से सूचनाओं के प्रसार के बदलते तरीके ने हमारे जीवन को काफी प्रभावित किया है, इसे देखते हुए विश्व पर्यटन संगठन ने इस साल के टूरिज्म डे की थीम ”टूरिज्म एंड ग्लोबल ट्रांसफॉर्मेशन” रखा हैं। इसबार यह मुद्दा रहेगा की आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी तकनीकी प्रगति पर्यटन के विकास के लिए क्या अवसर प्रदान करते हैं। इनका जवाब हमें इस बार के विश्व पर्यटन दिवस पर मिलेगा। पूरी दुनिया को अपने अध्यात्म,सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए आकर्षित करने वाले देश ‘भारत’ में भी विश्व पर्यटन दिवस काफी धूम-धाम से मनाया जाता है। इस दौरान राजधानी दिल्ली समेत देश के अलग-अलग भागों में अनेक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को पर्यटन दिवस के मौके पर जानकारियां उपलब्ध कराई जाती हैं।
लाम्बासिंगी
विश्व पर्यटन दिवस पर आज हम बात करते हैं दक्षिण भारत की एक ऐसी जगह जिसका हमने शायद ही नाम सुना हो।
दक्षिण भारत हमेशा से ही अपने समृद्ध इतिहास, लुभावने समुद्रीय तट और लज़ीज़ व्यंजन के लिए जाना जाता है। यहाँ की कई जगहें पर्यटकों की पहली पसंद हैं। लेकिन जब हम घूमने-फिरने के लिए किसी बर्फ़ीली जगह के बारे में सोचते हैं, तो दक्षिण भारत हमारी लिस्ट में नहीं होता है, बल्कि शिमला, गुलमर्ग, मनाली और नैनीताल हमारे फ़ेवरेट होते हैं पर दक्षिण भारत मे स्थित आंध्रप्रदेश के लाम्बासिंगी ने हमारा ये भ्रम तोड दिया है।
लाम्बासिंगी आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम जिले के चिंतापल्ली मंडल के पूर्वी घाट का एक छोटा सा गाँव है। जो समुद्र तल से 1000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह क्षेत्र आसपास के मैदानी क्षेत्रों की तुलना में ठंडा है। इस जगह को आंध्रप्रदेश का कश्मीर भी कहा जाता है जो कि पूर्णतः सही है। लाम्बासिंगी ही पूरे दक्षिण भारत में एक ऐसी जगह है जहां सर्दियों में हिमपात होता है। प्राकृतिक सौंदर्य होने के बाद भी इस जगह को कभी भी इतना महत्व नहीं दिया गया। ऊँचे-ऊँचे पहाड़ और गहरे-गहरे जंगलों से घिरे इस गांव मे घूमने का सबसे बेहतर मौसम सर्दियों मे होता है।
लाम्बासिंगी जाने के लिए नवम्बर से लेकर जनवरी तक का समय सबसे बेहतर रहता है। इस दौरान यहाँ का तापमान क़रीबन शून्य डिग्री तक चला जाता है। इस दौरान यहाँ पर आपको बर्फ़बारी भी देखने को मिल सकती है। लाम्बासिंगी साल भर सफ़ेद धुंध से ढका रहता है, ख़ासकर नवम्बर से जनवरी तक यहाँ का तापमान शून्य डिग्री से नीचे रहता है। इस दौरान यहाँ बर्फ़बारी का आनंद भी ले सकते हैं। इस गांव में अधिकतर आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं, जो काली मिर्च और कॉफी के बागानों में काम करते हैं।
लाम्बासिंगी को कोररा बेआलु के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है कि यदि कोई व्यक्ति खुले में रहता है, तो वह एक छड़ी की तरह स्थिर हो जाएगा। पहाड़ियों के साथ ही घने जंगलों से घिरा हुआ, यह गाँव पर्यटकों का बाहें खोलकर स्वागत करने को तैयार रहता है।
अगर आप भी इस गांव की सैर करना चाहते हैं, तो आइए बता दें कि यहाँ आप कहाँ-कहाँ घूम सकते हैं
कोठापल्ली झरना
लाम्बासिंगी से करीबन 27 किमी दूर स्थित कोठापल्ली झरना जो पहाड़ो से झरता है। यह झरना बेहद ही खूबसूरत है, और मनोरम नजारे प्रदान करता है, यह पर्यटकों के बीच एक लोकप्रिय पिकनिक स्थल के रूप में जाना जाता है।
कैम्पिंग
जो मजा खुले आसमान के नीचे आग के गोले के समीप दोस्तों के साथ बैठने का वो मजा दुनिया की किसी चीज में नहीं है। यकीनन आप भी इस बात से इत्तफाक रखते होंगे। लाम्बासिंगी कैम्पिंग करने के लिए भी एक उपयुक्त जगह है।
थजंगी जलाशय
लाम्बासिंगी से 6 किमी की दूर एक छोटा जलाशय है। यह एक बेहद ही मनोरम जगह है। यहाँ का खूबसूरती आपको फोटोग्राफर बनने पर मजबूर कर देगी।
इसके अलावा भी लाम्बासिंगी में ऐसी कई और ख़ूबसूरत जगह हैं, जहाँ पर आप प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकते हैं।
कहाँ रुके
यह जगह पर्यटन के रूप में अभी विशेष उभरी नहीं है, जिस कारण यहाँ रहने या खाने की अच्छी व्यवस्था नहीं है। आप यह जगह घूमने के बाद वापस विशाखापट्नम जा सकते हैं।
क्या खाएं
विशाखापट्नम अपने समुद्री खान पान के लिए बेहद प्रसिद्ध है। यहाँ आप चिकेन स्टेव के साथ स्टीम्ड राईस, ड्राई फ़िश करी, टोपा, सेरुवा टीप, टीपे सेमिया और क्रैब स्टेव जैसी लोकल डिसेज़ का भी मज़ा ले सकते हैं।
कैसे जाएँ
लाम्बासिंगी का निकतम हवाई अड्डा विशाखापत्तनम में है, जो लाम्बासिंगी से करीबन 107 किमी की दूरी पर स्थित है। पर्यटक हवाई अड्डे से टैक्सी या बस द्वारा लाम्बासिंगी पहुँच सकते हैं। विशाखापत्तनम से, सरकारी और निजी बसें हैं, जिससे भी आप लाम्बासिंगी पहुँच सकते हैं।
तो दोस्तों सोच क्या रहे हो, बैग पैक करो, और निकल जाओ लाम्बासिंगी की ट्रिप पर…




