केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज़
कांग्रेस ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं परीक्षा से जुड़े कथित डेटा लीक और ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में सामने आई गंभीर गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने इस पूरे मामले को शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सीधा आघात बताते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को जोर-शोर से उठाया है। कांग्रेस का आरोप है कि इस बड़े पैमाने पर हुए डेटा ब्रीच से करीब 20 लाख छात्रों की गोपनीयता खतरे में पड़ गई है। साथ ही, पार्टी ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के संचालन में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर भी सरकार की जवाबदेही तय करने की बात कही है। दरअसल, 2026 की सीबीएसई 12वीं परीक्षा में लागू की गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लेकर पहले ही विवाद चल रहा था। अब कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं से जुड़ा संवेदनशील डेटा भी लीक हो गया है। पार्टी के अनुसार, यह केवल तकनीकी विफलता नहीं बल्कि सिस्टम की गंभीर लापरवाही और अक्षमता का परिणाम है। कांग्रेस ने इस काम का ठेका लेने वाली कंपनी ‘कोएमप्ट’ पर भी सवाल उठाते हुए उसकी योग्यता और कार्यप्रणाली पर संदेह जताया है।

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने भी इस पूरे मामले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने उन छात्रों से मुलाकात की, जिन्होंने ओएसएम प्रणाली की खामियों और अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाई थी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इन छात्रों को अपनी बात रखने के लिए “आतंकवादी”, “पाकिस्तानी”, “डीप स्टेट” और “सोरोस एजेंट” जैसे अपमानजनक शब्दों से नवाजा गया, जो बेहद गंभीर और चिंताजनक है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर छात्रों के साथ हुई अपनी बातचीत का एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि “वेदांत और उसके साथी प्रतिभाशाली और साहसी युवा हैं, जिन्होंने सीबीएसई और सरकार से केवल सरल सवाल पूछे थे, लेकिन उन्हें जवाब देने के बजाय अपमानित किया गया।” उन्होंने कहा कि छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की पारदर्शिता चाहते हैं, लेकिन उनकी मांग को देश-विरोधी करार देना गलत है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह ओएसएम प्रणाली की खामियों को स्वीकार करने के बजाय छात्रों को ही दोषी ठहराने का प्रयास कर रही है। राहुल गांधी ने इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र न्यायिक जांच और विशेष जांच दल से जांच कराने की मांग भी की है। साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जिस कंपनी का पिछला रिकॉर्ड संदिग्ध रहा है, उसे यह महत्वपूर्ण ठेका आखिर क्यों दिया गया।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे पर शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई दोनों को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक छात्रों को न्याय मिलना मुश्किल है। उन्होंने इसे देश की शिक्षा प्रणाली के साथ खिलवाड़ करार दिया। मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “सरकार युवाओं को ‘एग्जाम वॉरियर’ बनाने की बात करती है, लेकिन जब छात्र सवाल पूछते हैं तो उन्हें ‘डीप स्टेट एजेंट’ और ‘पाकिस्तानी’ कहकर बदनाम किया जाता है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की नीतियों के कारण देश की शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हो रही है। खरगे ने आगे कहा कि कभी आईआईटी, आईआईएम, केंद्रीय विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय संस्थान देश की प्रतिभा निर्माण के केंद्र हुआ करते थे, लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि एक बोर्ड परीक्षा भी सुचारू रूप से आयोजित नहीं हो पा रही है। उन्होंने शिक्षा बजट में कटौती, सरकारी स्कूलों के बंद होने, विश्वविद्यालयों में कथित वैचारिक हस्तक्षेप और छात्रों की आवाज दबाने जैसे मुद्दों को भी उठाया।
कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर डेटा लीक होना बेहद चिंताजनक है और इससे लाखों छात्रों की निजता प्रभावित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि निविदा प्रक्रिया में बदलाव कर संबंधित कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार युवाओं को रोजगार देने में विफल रही है और भर्ती परीक्षाओं में भी अनियमितताएं सामने आई हैं, जिससे देश की शिक्षा और रोजगार व्यवस्था दोनों प्रभावित हो रही हैं।
इस पूरे विवाद ने न केवल सीबीएसई की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि देश की शिक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर भी गंभीर बहस छेड़ दी है।




