मध्यप्रदेश में 8 दिन से चल रहा मुख्यमंत्री पर सस्पेंस खत्म हो गया. बीजेपी ने नवनिर्वाचित विधायक दल की बैठक बुलाई थी, मीटिंग में केंद्रीय पर्यवेक्षक की मौजूदगी में उज्जैन से नवनिर्वाचित मोहन यादव विधायक दल का नेता चुना गया. बैठक से पहले केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की. बीजेपी ने 230 सीटों वाले एमपी में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में 163 सीटों पर जीत हासिल की है. वहीं कांग्रेस इस बार 66 सीटों पर सिमट गई. मध्यप्रदेश में बीजेपी इस बार बिना मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किए चुनावों में उतरी थी. बीजेपी ने पीएम मोदी और सामूहिक नेतृत्व पर यह चुनाव लड़ा था. ऐसे में सभी की निगाहें इसी सवाल पर टिकी थीं, कि सूबे की कमान किसे मिलेगी?
विधायक दल की बैठक 4 बजे शुरू हुई. पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, ओबीसी मोर्चा के प्रमुख के लक्ष्मण और सचिव आशा लाकड़ा के सुबह भोपाल पहुंचे. 2004 के बाद से यह तीसरा मौका है, जब बीजेपी ने केंद्रीय पर्यवेक्षक भेजे हैं. अगस्त 2004 में, जब उमा भारती ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, तो पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रमोद महाजन और अरुण जेटली को राज्य में केंद्रीय पर्यवेक्षकों के रूप में भेजा गया था. इसके बाद नवंबर 2005 में जब बाबूलाल गौर ने सीएम पद से इस्तीफा दिया, तो नया विधायक चुनने के लिए राजनाथ सिंह को केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में भेजा गया था. उस वक्त शिवराज सिंह चौहान को विधायक दल का नेता चुना गया था. इस बार बीजेपी ने मोदी के चेहरे पर विधानसभा चुनाव लड़ा. शिवराज 2005, 2008, 2013 और 2020 में सीएम पद की शपथ ले चुके हैं. ऐसे में उन्हें सीएम की रेस में सबसे आगे माना जा रहा था. पूर्व केंद्रीय मंत्री और ओबीसी चेहरा प्रह्लाद पटेल का नाम भी रेस में था. उन्होंने इस बार विधानसभा चुनाव भी लड़ा है. इसके अलावा दिमनी से विधायक नरेंद्र तोमर, इंदौर के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम इस पद के लिए सबसे आगे चल रहे थे.





