एनसीएस पोर्टल में खुलासा, देश में 3752 ट्रांसजेंडर मांग रहे हैं नौकरी

भिन्न प्रकार के भेदभाव के बावजूद देश के ट्रांसजेंडर समुदाय में मुख्य धारा में शामिल होने की इच्छा मजबूत हो रही है। इसी कारण वे पारंपरिक व्यवसायों को छोड़कर सरकारी या निजी क्षेत्र में नौकरी पाने की उम्मीद कर रहे हैं। नेशनल करियर सर्विस (एनसीएस) पोर्टल के पिछले छह महीनों के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में 3,752 ट्रांसजेंडर सरकारी नौकरियों की तलाश में हैं और इसके लिए उन्होंने एनसीएस पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराया है। इनमें राजस्थान के 76 ट्रांसजेंडर भी शामिल हैं। भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा संचालित एनसीएस की फरवरी से जुलाई 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में 1 करोड़ 27 लाख 83 हजार 951 पुरुषों और 1 करोड़ 11 लाख 37 हजार 541 महिलाओं ने इस पोर्टल पर नौकरी के लिए पंजीकरण कराया है। राजस्थान के 5 लाख 48 हजार 981 पुरुषों और 8 लाख 93 हजार 918 महिलाओं ने पंजीकरण कराया है, जिसमें महिलाएं पुरुषों से अधिक हैं, 3 लाख 44 हजार 937 अधिक पंजीकरण के साथ।
ट्रांसजेंडर समुदाय को समान शिक्षा के अवसर नहीं मिलते हैं। अनुमान के अनुसार, राजस्थान में ट्रांसजेंडर की आबादी लगभग 75 हजार से 1 लाख के बीच है। इनके लिए काम करने वाले संगठनों का मानना है कि इन्हें समान अवसर देने के लिए सरकार के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में कुल 485 ट्रांसजेंडर बच्चे पढ़ रहे हैं, जिनमें से 451 प्राथमिक कक्षाओं में हैं। केवल 13 जिलों में ही उच्च प्राथमिक यानी कक्षा 6 से 8 में ट्रांसजेंडर बच्चे पढ़ रहे हैं, जिनकी संख्या केवल 32 है।
ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए काम करने वाले एनजीओ के प्रतिनिधि मानते हैं कि लैंगिक भेदभाव के कारण इस समुदाय के बच्चे शिक्षा के मामले में पिछड़ जाते हैं। ऐसे में उच्च शिक्षा प्राप्त करके सम्मानजनक नौकरी पाना एक बड़ा संघर्ष है। जो बच्चे गुप्त रूप से अपनी पढ़ाई जारी रख पाते हैं, वही रोजगार पोर्टल पर पंजीकरण या अन्य प्रकार के प्रयास करने की हिम्मत जुटा पाते हैं। ट्रांसजेंडर समुदाय के पास अभी भी सरकार से कई सवाल हैं। क्या सरकार इस समुदाय को समाज की मुख्य धारा में शामिल करने के लिए गंभीर है? सुप्रीम कोर्ट के 2014 के फैसले ने हमें हिम्मत दी और एक उम्मीद की किरण दिखाई। लेकिन अभी भी समाजिक स्तर पर बहुत भेदभाव झेलना पड़ता है। शिक्षा में समानता के अवसर और स्कॉलरशिप जैसी सुविधाएं बच्चों के लिए उपलब्ध नहीं हैं। एनसीएस जैसे पोर्टल तक पहुंचने वालों की संख्या बहुत कम है। आज भी एक बड़ा हिस्सा ऐसा है जिसे सरकार और समाज की ओर से समर्थन की जरूरत है।

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