पुणे पोर्श दुर्घटना मामले में महाराष्ट्र सरकार ने किशोर न्याय बोर्ड के 2 सदस्यों को बर्खास्त किया

महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को पुणे पोर्श दुर्घटना मामले में नाबालिग आरोपी को जमानत देने के संबंध में किशोर न्याय बोर्ड के दो सदस्यों को सेवा से बर्खास्त कर दिया। अधिकारियों ने इस जानकारी की पुष्टि की है। राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग ने एल.एन. दानवड़े और कविता थोराट के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने प्रक्रियात्मक चूक, कदाचार और मानदंडों का पालन नहीं किया।
महिला एवं बाल विकास विभाग के कमिश्नर प्रशांत नरनावरे ने पीटीआई को बताया कि उन्होंने जांच पैनल की रिपोर्ट राज्य सरकार को दी थी और सुझाव दिया था कि दोनों सदस्यों की सेवा समाप्त की जाए। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार को जुलाई में ही बर्खास्तगी की अनुशंसा भेजी गई थी। मंगलवार को राज्य सरकार ने कार्रवाई करते हुए दोनों सदस्यों को पद से हटा दिया, क्योंकि वे किशोर न्याय अधिनियम के तहत दी गई शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे थे। 8 अक्टूबर को जारी एक नोटिफिकेशन में राज्य सरकार ने कहा कि जांच के दौरान एल.एन. दानवड़े और कविता थोराट को दोषी पाया गया और उनके पद का दुरुपयोग करने के कारण सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
गौरतलब है कि 19 मई को एक पोर्श कार ने दो आईटी प्रोफेशनल्स की मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी। उस समय, कार एक 17 वर्षीय नाबालिग चला रहा था, जो नशे में था। यह मामला तब चर्चा में आया जब जेजेबी के तत्कालीन सदस्य दानवड़े ने आरोपी (जो एक बिल्डर का बेटा था) को 300 शब्दों का निबंध लिखवाकर जमानत दे दी। इसके बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की, जिसने पाया कि जेजेबी ने नियमों का पालन नहीं किया और नाबालिग को जमानत दी। इस जांच के आधार पर विभाग ने एल.एन. दानवड़े और कविता थोराट के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी।

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