उत्तर प्रदेश के संभल जिले में जामा मस्जिद और श्री हरिहर मंदिर के दावे को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। हिंदू पक्ष का कहना है कि जामा मस्जिद की जगह पहले श्री हरिहर मंदिर था। वहीं, मुस्लिम समुदाय का दावा है कि यह मस्जिद उनकी ऐतिहासिक धरोहर है और इस मुद्दे को उठाकर जानबूझकर माहौल खराब किया जा रहा है। विवाद के कारण इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, और प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बीएनएस की धारा 163 लागू कर दी है।
हिंदू और मुस्लिम पक्ष के तर्क
हिंदू पक्ष का कहना है कि मस्जिद के अंदर मंदिर के अवशेष, जैसे घंटा, फव्वारे और परिक्रमा द्वार, अब भी मौजूद हैं। उनका दावा है कि मंदिर से एक सुरंग दिल्ली तक जाती थी। वे इसे अयोध्या की तरह मंदिर के पुनर्निर्माण का मुद्दा मानते हैं।
दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह मस्जिद बाबर के शासनकाल में बनाई गई थी और इसे मंदिर तोड़कर नहीं बनाया गया। उनका दावा है कि यह मस्जिद मुगलिया सल्तनत से भी पुरानी है।
सर्वे और अदालत के निर्देश
मंगलवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत के आदेश पर एडवोकेट कमीशन की टीम ने मस्जिद का सर्वे किया। वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के माध्यम से प्रमाण जुटाए गए। हिंदू पक्ष ने याचिका में कहा है कि यह स्थान उनकी आस्था का केंद्र है और यहाँ कल्कि अवतार की मान्यता है।
प्रशासन का कदम
प्रशासन ने शुक्रवार को जुमे की नमाज़ को लेकर पुलिस को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। मस्जिद के आसपास बैरिकेडिंग कर दी गई है, और सार्वजनिक सभा पर प्रतिबंध लगाया गया है।
मुस्लिम समुदाय की प्रतिक्रिया
मस्जिद के सदर एडवोकेट जफर अहमद ने हिंदू पक्ष के दावों को खारिज करते हुए इसे पूरी तरह बेबुनियाद और माहौल खराब करने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि 1991 के पूजा स्थल अधिनियम का उल्लंघन कर यह मुद्दा उठाया जा रहा है। दोनों पक्ष अपने-अपने प्रमाण अदालत में पेश करने की तैयारी कर रहे हैं। प्रशासन ने सभी को शांति बनाए रखने की अपील की है।
संभल में जुमे की नमाज को लेकर अलर्ट जारी, चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात, धारा 165 लागू





