संभल के चंदौसी क्षेत्र में हो रही खुदाई में राजा की बावड़ी की दूसरी मंजिल दिखाई देने लगी है। यह बावड़ी तीन मंजिल की बताई जा रही है। दूसरे तल का गेट भी स्पष्ट हो गया है। शंखनाद के बाद पुलिस और पीएसी की सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। दशकों से मिट्टी और कचरे में दबी लक्ष्मणगंज स्थित इस प्राचीन बावड़ी के दूसरे तल को मंगलवार को उजागर किया गया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की तीन सदस्यीय टीम और नगर पालिका के सहयोग से दर्जनों मजदूर बावड़ी की सफाई और खुदाई में जुटे हुए हैं। खुदाई के दौरान बावड़ी के भीतर पत्थरों से बनी संरचनाएं, सुरंग जैसे रास्ते और दर्जनों सीढ़ियां नजर आने लगी हैं। साथ ही, बावड़ी के कुएं और गलियारों की संरचना को पूरी तरह साफ करने का काम चल रहा है। पुलिस ने बाहरी लोगों के परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। नगर पालिका परिषद की सैनिटरी इंस्पेक्टर प्रियंका सिंह ने मजदूरों की टीम बनाकर खुदाई शुरू कराई। खुदाई में कुएं और गलियारों के आसपास की संरचनाएं, सीढ़ियां, और दूसरे तल का गेट दिखने लगा है। जहां कुआं होने की संभावना है, वहां की खुदाई में गेट पूरी तरह स्पष्ट हो गए हैं।
पुरातत्व विभाग को सौंपने की मांग
राजा चंद्र विजय सिंह के प्रतिनिधि कौशल किशोर वंदेमातरम् ने डीएम को एक पत्र सौंपा, जिसमें इस प्राचीन बावड़ी को पुरातत्व विभाग या पर्यटन विभाग को सौंपने की मांग की गई है ताकि इसे संरक्षित कर चंदौसी के लिए एक धरोहर के रूप में विकसित किया जा सके। उन्होंने बताया कि यह बावड़ी उत्तर प्रदेश की अनूठी धरोहर है और इसे भूमाफिया और असामाजिक तत्वों से बचाने की जरूरत है। सोमवार को लक्ष्मणगंज स्थित खंडहरनुमा बांकेबिहारी मंदिर में एक युवक ने शंखनाद किया। इससे दूसरे समुदाय ने आपत्ति जताई। मौके पर पहुंची पुलिस और पीएसी ने स्थिति को संभाला और युवक को वहां से हटा दिया। इससे पहले, रविवार को भी बावड़ी में शंखनाद करने पर विवाद हुआ था। संभल में 24 नवंबर को हुई हिंसा के बाद बंद पड़े मंदिरों को खोलने का सिलसिला शुरू हुआ। इसी दौरान चंदौसी, वाराणसी, बुलंदशहर और मुरादाबाद जैसे क्षेत्रों में कई प्राचीन धार्मिक स्थल मिले। सोमवार को हुई बैठक में मुरादाबाद के 44 साल से बंद मंदिर के जीर्णोद्धार का निर्णय भी लिया गया।





