सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस जॉयमाल्या बागची को सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश की है। खास बात यह है कि अगर जस्टिस बागची जज बनते हैं, तो वे 25 मई 2031 को देश के सीजेआई बनेंगे। सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता में हुई कॉलेजियम की बैठक में उनके नाम की सिफारिश की गई। केंद्र सरकार द्वारा इस सिफारिश को मंजूरी मिलने पर राष्ट्रपति नियुक्ति की अधिसूचना जारी करेंगे। कॉलेजियम ने इस तथ्य पर भी विचार किया कि जुलाई 2013 में तत्कालीन सीजेआई जस्टिस अल्तमस कबीर की सेवानिवृत्ति के बाद से कलकत्ता हाईकोर्ट से कोई भी न्यायाधीश देश का सीजेआई नहीं बना है।
जस्टिस बागची की सेवानिवृत्ति
जस्टिस बागची 25 मई 2031 को जस्टिस केवी विश्वनाथन के सेवानिवृत्त होने के बाद 2 अक्टूबर 2031 तक सीजेआई के पद पर रहेंगे। वे हाईकोर्ट जजों की अखिल भारतीय वरिष्ठता सूची में 11वें स्थान पर हैं। कॉलेजियम ने कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस हरीश टंडन को उड़ीसा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की भी सिफारिश की है। जस्टिस जॉयमाल्या बागची एक प्रतिष्ठित भारतीय न्यायाधीश हैं। उन्हें विशेष रूप से कलकत्ता उच्च न्यायालय (अब कोलकाता उच्च न्यायालय) के न्यायाधीश के रूप में जाना जाता है। न्यायपालिका में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कई संवैधानिक और कानूनी मामलों पर अहम निर्णय दिए हैं और निष्पक्ष न्याय प्रक्रिया सुनिश्चित करने का प्रयास किया है।
क्यों की गई सिफारिश?
कॉलेजियम ने स्पष्ट किया कि यह सिफारिश योग्यता, ईमानदारी और काबिलियत को ध्यान में रखते हुए की गई है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट में क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को भी ध्यान में रखा गया है।





