इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर में नगर निगम द्वारा हर घर को एक यूनिक आईडी नंबर देने की योजना बनाई जा रही है। इस यूनिक आईडी से जुड़ा क्यूआर कोड घर के बाहर लगाया जाएगा। जब इसे स्कैन किया जाएगा, तो उस घर से जुड़ी सारी जानकारी मोबाइल पर दिखेगी। इस योजना की शुरुआत सुदामा नगर से होगी और करीब 7 हजार मकानों पर यह काम सीएसआर फंड की मदद से किया जाएगा।
आपको बता दें रायपुर (छत्तीसगढ़) में पहले ही चार लाख घरों को क्यूआर कोड दिए जा चुके हैं, जिससे जनता को सुविधायें मिली और नगर निगम की आय में भी वृद्धि हुई। इसी मॉडल को अपनाते हुए इंदौर नगर निगम भी यह प्रक्रिया शुरू कर रहा है। इस योजना की शुरुआत महापौर पुष्यमित्र भार्गव के वार्ड से होगी। इसके पहले, अधिकारियों की एक बैठक होगी और काम को 45 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
यूनिक आईडी से पहले सर्वेक्षण:
पहले वार्ड में लगभग 7 हजार घरों का सर्वे होगा, जिसमें संपत्ति कर के रिकॉर्ड की तुलना मकान के निर्माण से की जाएगी। अगर कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो टीम रिपोर्ट तैयार करेगी। यह भी जांचा जाएगा कि मकान आवासीय है या व्यावसायिक, जिससे कर संग्रहण में पारदर्शिता आएगी।
बेतरतीब नंबरिंग से मुक्ति:
कई कॉलोनियों में मकान नंबरों में अव्यवस्था है। नई प्रणाली के तहत हर घर को क्रमवार डिजिटल यूनिक आईडी और उसका क्यूआर कोड दिया जाएगा। हर फ्लैट की अलग-अलग क्यूआर प्लेट होगी।
जानकारी सुरक्षित रहेगी:
क्यूआर कोड स्कैन करने पर सीधा जानकारी नहीं मिलेगी। पहले मकान मालिक का मोबाइल नंबर डालना होगा, जिस पर ओटीपी आएगा। ओटीपी दर्ज करने पर एप में एंट्री मिलेगी, जिससे टैक्स भरने और शिकायत दर्ज कराने जैसी सुविधाएं मिलेंगी। एप में पुलिस थाना और निगम की जानकारी भी शामिल होगी। प्रयास किया जा रहा है कि मकान मालिक का नाम भी क्यूआर कोड से जुड़ा हो। हालांकि, निगम के वरिष्ठ अधिकारी सीधे जानकारी देख सकेंगे।
सीएसआर फंड से काम:
यह पूरा प्रोजेक्ट कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी फंड से किया जा रहा है। आगे चलकर इसमें अन्य सरकारी विभागों को भी जोड़ा जा सकता है। क्यूआर प्लेट मौसम-प्रतिरोधी सामग्री से बनाई जा रही है ताकि बारिश, गर्मी या ठंड का उस पर असर न पड़े।






