राजस्थान सरकार ने आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 15 वर्ष पहले ‘मुख्यमंत्री निःशुल्क निरोगी राजस्थान योजना’ की शुरुआत की थी, ताकि जरूरतमंद लोगों तक आवश्यक दवाइयाँ पहुँच सकें। इसके अंतर्गत ‘मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना’ 2 अक्टूबर 2011 से लागू की गई, जबकि 4 मई 2011 को राजस्थान चिकित्सा सेवा निगम का गठन हुआ।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, वर्ष 2019-20 की बजट घोषणा में मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना के तहत मरीजों को अतिरिक्त दवाइयाँ उपलब्ध कराने के लिए कैंसर, हृदय, गुर्दे और अन्य गंभीर रोगों के उपचार हेतु 105 दवाइयाँ और 34 सर्जिकल वस्तुएँ आवश्यक दवा सूची में जोड़ी गईं।
2022-23 की बजट घोषणा में सभी सरकारी अस्पतालों में दवाओं को निःशुल्क उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। इसके अंतर्गत आवश्यक दवा सूची का विस्तार करते हुए 635 दवाइयाँ, 255 सर्जिकल आइटम (आकारवार) और 78 सूचर्स जोड़े गए। वर्तमान में मुख्यमंत्री निःशुल्क निरोगी राजस्थान योजना एवं मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना को मिलाकर आवश्यक दवा सूची में कुल 1829 औषधियाँ और सर्जिकल्स शामिल हैं।
पिछले 15 वर्षों में 163 करोड़ मरीज इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। कैंसर, हृदय और लिवर रोगों की दवाएँ भी अब निःशुल्क उपलब्ध हैं। वर्ष 2011 में इसका बजट 195 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर अब 2788 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है।
इसके अतिरिक्त, 7 अप्रैल 2013 को राज्य सरकार ने लोगों को संपूर्ण इलाज उपलब्ध कराने हेतु ‘मुख्यमंत्री निःशुल्क जांच योजना’ शुरू की। इस योजना के तहत 7 अप्रैल 2013 से 31 दिसम्बर 2023 तक कुल 66 करोड़ 16 लाख 75 हजार 401 जांचें निःशुल्क की गईं, जिनसे 25 करोड़ 87 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हुए हैं।
राजस्थान: 15 साल में 163 करोड़ लोगों ने उठाया ‘मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना’ का लाभ






