विशेषज्ञों की एक टीम ने चेतावनी दी है कि हमारी रोज़मर्रा की दिनचर्या की एक सामान्य-सी आदत, जिस पर अक्सर लोग ध्यान भी नहीं देते, खून के थक्के बनने के खतरे को काफी बढ़ा सकती है।

शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि रक्त का प्रवाह सभी अंगों तक सुचारू रूप से पहुँचे। जब इस प्रक्रिया में रुकावट आती है तो पूरा स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। रक्त का थक्का (ब्लड क्लॉटिंग) वही स्थिति है जिसमें रक्त का सामान्य प्रवाह बाधित हो जाता है। डॉक्टर बताते हैं कि आज की तेज़-रफ्तार जीवनशैली ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। हार्ट अटैक का बड़ा कारण भी यही है। विशेषज्ञ कहते हैं कि अनजाने में हम रोज़मर्रा में कुछ ऐसी गलतियाँ कर बैठते हैं, जिनसे रक्त के थक्के बनने की आशंका बढ़ जाती है। कोरोना महामारी के बाद तो इस समस्या के मामले और भी बढ़े हैं। अब यह केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवा भी इसके शिकार हो रहे हैं।
ब्लड क्लॉटिंग क्या है और क्यों है खतरनाक
जब शरीर पर चोट लगती है तो खून बहाव रोकने और घाव भरने के लिए थक्का बनता है। यह शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली का हिस्सा है। लेकिन बिना चोट लगे यदि अंदर ही अंदर खून के थक्के बनने लगें तो यह गंभीर समस्या बन जाती है। ऐसे थक्के रक्त वाहिकाओं को अवरुद्ध कर हार्ट अटैक, स्ट्रोक या फेफड़ों से जुड़ी जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकते हैं। लंबे समय तक बैठे रहने से भी यह जोखिम बढ़ सकता है। जैसे, लंबी दूरी की फ्लाइट्स में बैठकर यात्रा करने से खून का थक्का बनने की संभावना रहती है। इसी तरह, यदि आप दफ़्तर में घंटों डेस्क पर बैठे रहते हैं तो आपके साथ भी यह खतरा जुड़ा है।
युवाओं में बढ़ता ‘ई-थ्रोम्बोसिस’ का खतरा
विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक बैठे रहने और खासकर पैरों को क्रॉस करके बैठने से खून का प्रवाह बाधित होता है। इस स्थिति में ‘ई-थ्रोम्बोसिस’ नामक समस्या हो सकती है, जो कंप्यूटर या गेमिंग से जुड़ी लंबी अवधि तक बैठने वाली जीवनशैली से पैदा होती है।
जब पैरों को क्रॉस करके बैठा जाता है तो रक्त वाहिकाओं पर दबाव बनता है, जिससे प्रवाह धीमा पड़ जाता है और थक्के बनने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि कई लोग आठ या उससे ज्यादा घंटे तक एक ही स्थिति में बैठे रहते हैं और अनजाने में ही खुद को जोखिम में डालते हैं।
थ्रोम्बोसिस से बचने के उपाय
डॉक्टरों का कहना है कि मानव शरीर लंबे समय तक एक ही अवस्था में रहने के लिए बना ही नहीं है। जिनका काम डेस्क पर बैठकर करने का है, उन्हें बीच-बीच में टहलना या खड़े होकर काम करना जरूरी है।
कुछ उपयोगी सुझाव:
• हर 30 मिनट में उठकर थोड़ी देर टहलें।
• बैठते समय पैरों को जमीन पर सीधा रखें।
• ऑफिस के दौरान समय-समय पर खड़े होकर काम करें।
• यदि लंबे समय तक बैठना पड़े तो पैरों को फैलाएँ और टखनों को घुमाएँ।
👉 यह साधारण-सी लगने वाली आदतें आपकी सेहत को गंभीर जोखिम से बचा सकती हैं।
नोट: संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।






