
जानिये हेडलाइट से जुड़े नियम और कानून
वाहनों की रोशनी से जुड़े मानक ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (AIS) द्वारा तय किए गए हैं, जिनमें न्यूनतम और अधिकतम चमक की सीमा निर्धारित है।
रात के समय हाई बीम का उपयोग वाहन चालकों के लिए बेहद खतरनाक साबित होता है। इससे आंखों पर तेज रोशनी पड़ने के कारण चौंध पैदा होती है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। यह स्थिति खासकर तब गंभीर हो जाती है, जब सामने से आने वाले वाहन की तीखी रोशनी अचानक नजर पर पड़ती है। सुरक्षित ड्राइविंग के लिए ट्रैफिक नियमों का पालन करते हुए लो बीम का उपयोग करना आवश्यक है।
हाई बीम से बढ़ता खतरा
रात में गाड़ी चलाते समय कई बार ऐसा होता है कि अचानक सामने से आती तेज रोशनी आंखों में चुभ जाती है। ऐसे में चालक को ब्रेक लगाकर वाहन रोकना पड़ता है या फिर गति कम करके साइड लेना पड़ता है। यह परिस्थिति गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। आजकल लोग अपनी गाड़ियों को मॉडिफाई करवाकर तेज रोशनी वाली लाइटें लगवा रहे हैं, जो सड़क पर दूसरों के लिए खतरनाक बन गई हैं।
वाहनों में हाई बीम और तीव्र रोशनी के उपयोग के मामले बढ़ते जा रहे हैं। सोनीपत में हाल ही में हुई एक घटना में कार की एलईडी हाई बीम के कारण ट्रैक्टर चालक की आंखें चौंधिया गईं और ट्रैक्टर पलट गया, जिसमें दो लोगों की मृत्यु हो गई। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए वाहनों की हेडलाइट से जुड़े मानक तय किए हैं, लेकिन एनसीआर के कई शहरों में इन नियमों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हो रही।
एनसीआर के शहरों में अनधिकृत या अत्यधिक रोशनी वाली लाइट लगाने पर यातायात पुलिस लगभग कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। गाजियाबाद और गुरुग्राम में पिछले तीन महीनों में एक भी चालान नहीं काटा गया। फरीदाबाद में हाई बीम पर केवल एक चालान और अवैध लाइटों पर 100 चालान हुए हैं, जबकि हेलमेट, सीट बेल्ट और प्रदूषण से जुड़े चालान हजारों की संख्या में दर्ज किए गए।
मानक से कई गुना तेज रोशनी
नियमों के अनुसार, वाहनों में केवल सफेद या पीली हेडलाइट लगाई जा सकती है और बिना प्रोजेक्टर के एचआईडी लाइट अवैध है। कंपनी द्वारा लगाए जाने वाले बल्ब 40 से 75 वाट के होते हैं, जबकि लोग मॉडिफिकेशन दुकानों से 200 से 300 वाट तक की एलईडी लगवा रहे हैं। बाजार में मिलने वाली अधिकांश लाइटें 6000 लुमेन की हैं, जबकि नियम केवल 3000 लुमेन तक की अनुमति देते हैं। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और आसपास के कई बाजारों में ऐसी लाइटों का बड़े पैमाने पर कारोबार हो रहा है। कई वाहन चालक बताते हैं कि रात में हाई बीम या अत्यधिक रोशनी वाली लाइटों के चलते उन्हें अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है और पीछे से आ रहे वाहन भी टकराते-टकराते बचते हैं। उनका मानना है कि पुलिस और परिवहन विभाग को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
गौरतलब है कि सोनीपत के चिटाना गांव में 23 अक्टूबर को हुई दुर्घटना में कार की हाई बीम की रोशनी दो किसानों के लिए मौत का कारण बन गई। तेज रोशनी ट्रैक्टर चालक की आंखों में पड़ते ही उसकी नजर चौंधिया गई और ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर पलट गया। हाईवे ट्रैफिक इंचार्ज के अनुसार, हाई बीम वाले तेज रफ्तार वाहनों को रोकना मुश्किल होता है, इसलिए अब तक किसी भी वाहन का चालान नहीं हुआ है।
पुराना चलन और नियम
90 के दशक में हेडलाइट पर काली पट्टी या बीच में काला बिंदु लगाने का चलन था, जिससे चकाचौंध कम होती थी। वर्ष 2015 से एलईडी लाइटों का उपयोग तेजी से बढ़ा और आज तक जारी है।
मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार—
8 मीटर की दूरी से आंखों में चकाचौंध पैदा करने वाली लाइट अवैध है।
किसी भी वाहन में चार से अधिक हेडलाइट नहीं हो सकतीं।
वाहन की छत पर लाइट लगाना प्रतिबंधित है।
पीछे की लाइट: 4–12 कैंडेला
आगे की लाइट: 4–100 कैंडेला
स्टॉप लाइट: 40–185 कैंडेला
कानूनी स्थिति
हाई बीम या मानक से अधिक रोशनी वाली हेडलाइट लगाने पर कोई अलग से निर्धारित धारा नहीं है। ऐसे मामलों में वाहनों पर “अल्टरेशन” के तहत कार्रवाई की जाती है और मामला न्यायालय को भेजा जाता है। परिवहन विभाग अवैध लाइट वाहन में लगाए जाने की तारीख से प्रतिदिन हजार रुपये के हिसाब से जुर्माना लगाता है। यदि अवैध लाइट 10 दिन पहले लगाई गई है, तो 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।






