इंडियन कोस्ट गार्ड में अब रैंक के आधार पर नहीं होगी रिटायरमेंट उम्र- हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने इंडियन कोस्ट गार्ड में विभिन्न रैंकों के अधिकारियों के लिए अलग रिटायरमेंट आयु तय करने को असंवैधानिक करार देते हुए पुराने नियमों को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने सोमवार को रिटायरमेंट उम्र संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसका असर कोस्ट गार्ड की पूरी सेवा प्रणाली पर पड़ेगा। न्यायालय ने कहा कि एक ही विभाग में कार्यरत अधिकारियों को अलग-अलग रिटायरमेंट उम्र देना संविधान के अनुरूप नहीं है। लंबे समय से लागू इन पुराने नियमों को कोर्ट ने अमान्य घोषित कर दिया, जिससे अब कोस्ट गार्ड की रिटायरमेंट पॉलिसी में बड़ा बदलाव आएगा।
कोस्ट गार्ड में पहले कमांडेंट और उससे निचले रैंक के अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 57 वर्ष थी, जबकि कमांडेंट से ऊपर के रैंक वालों की उम्र सीमा 60 वर्ष तय थी। इसी भेदभाव के खिलाफ कई अधिकारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनका तर्क था कि एक ही सेवा में काम करने वालों के लिए अलग आयु सीमा तय करना अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है क्योंकि इसका कोई तार्किक आधार नहीं है। जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने भी माना कि रैंक के आधार पर रिटायरमेंट उम्र में फर्क का कोई ठोस कारण नहीं है। जब सभी अधिकारी समान कार्य और चुनौतियों से गुजरते हैं, तो अलग-अलग उम्र में रिटायरमेंट देना उचित नहीं है। कोर्ट ने पाया कि कोस्ट गार्ड (जनरल) रूल्स, 1986 के रूल 20(1) और 20(2) समानता के संवैधानिक सिद्धांतों पर खरे नहीं उतरते। केंद्र ने तर्क दिया कि कोस्ट गार्ड एक समुद्री बल है जहां जहाजों, जल क्षेत्र और एविएशन प्लेटफॉर्म पर ड्यूटी देनी होती है, जिसके लिए अधिक फिट और अपेक्षाकृत कम उम्र के अधिकारियों की जरूरत पड़ती है। इसलिए निचले रैंकों में रिटायरमेंट उम्र 57 वर्ष रखी गई थी। लेकिन कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि अब सभी रैंकों के लिए रिटायरमेंट आयु 60 वर्ष ही लागू होगी और असमानता पैदा करने वाले पुराने नियम को समाप्त करने का आदेश दिया।

CAPFs के मामलों का भी जिक्र
कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले BSF, CRPF, ITBP और SSB से जुड़े मामलों में भी अलग-अलग रिटायरमेंट उम्र को असंवैधानिक घोषित किया जा चुका है और सभी बलों में समान आयु लागू करने का निर्देश दिया गया था। भले ही कोस्ट गार्ड CAPF का हिस्सा नहीं है, लेकिन कोर्ट ने समानता के सिद्धांत के आधार पर वही तर्क यहां भी लागू किया।
अनुच्छेद 14 कानून के सामने सबको बराबरी प्रदान करता है और भेदभाव पर रोक लगाता है। वहीं अनुच्छेद 16 सरकारी नौकरियों में समान अवसर और निष्पक्षता की गारंटी देता है। कोर्ट के अनुसार, कोस्ट गार्ड (जनरल) रूल्स, 1986 के रूल 20(1) और 20(2) इन दोनों अनुच्छेदों का उल्लंघन कर रहे थे। इसी आधार पर दिल्ली हाईकोर्ट ने इन नियमों को रद्द कर दिया।

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