राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही थीं। मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और पार्टी संगठन नए नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे माहौल में शिवराज सिंह चौहान का नाम बार-बार सामने आना केवल संयोग नहीं माना जा रहा।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। बताया जा रहा है कि गृह मंत्रालय से मिले इनपुट के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने यह अहम निर्णय लिया। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या शिवराज सिंह चौहान भारतीय जनता पार्टी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष हो सकते हैं। हालांकि सुरक्षा बढ़ाने को लेकर न तो किसी राजनीतिक कारण की आधिकारिक पुष्टि की गई है और न ही किसी संभावित खतरे की बात सामने आई है। बावजूद इसके, इस कदम ने उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की अटकलों को और हवा दी है। शिवराज सिंह चौहान को पहले से ही जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है। इसके अलावा अब उनकी सुरक्षा में और इजाफा किया गया है। दिल्ली से लेकर भोपाल स्थित उनके 74 बंगला आवास तक सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। जेड प्लस सुरक्षा के बाद अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था किए जाने से सियासी हलकों में हलचल और तेज हो गई है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच शिवराज सिंह चौहान का नाम लगातार उभरना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अनुभव, संगठनात्मक पकड़ और व्यापक स्वीकार्यता, ये तीनों ही मानदंड ऐसे हैं, जिन पर वे खरे उतरते हैं। हालांकि शिवराज सिंह चौहान सार्वजनिक रूप से अध्यक्ष पद की दौड़ में होने से इनकार करते रहे हैं। उनका कहना है कि इस समय उनका पूरा ध्यान कृषि मंत्रालय और किसानों से जुड़े कार्यों पर केंद्रित है। लेकिन राजनीति में अक्सर देखा गया है कि किसी पद की दावेदारी से इनकार करना और लगातार चर्चा में बने रहना, संभावित दावेदारी का संकेत माना जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संभावित दावेदारों में शिवराज सिंह चौहान का नाम सबसे मजबूत नजर आता है। हालांकि अंतिम निर्णय पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सहमति के बाद ही लिया जाएगा। यदि शिवराज सिंह चौहान को भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाता है, तो वे मध्य प्रदेश से इस पद पर पहुंचने वाले तीसरे नेता होंगे। इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, जो ग्वालियर से थे, वर्ष 1980 में पार्टी के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे। इसके बाद धार के कुशाभाऊ ठाकरे ने 1998 से 2000 तक यह जिम्मेदारी निभाई। शिवराज सिंह चौहान के चयन की स्थिति में वे देश के बारहवें और मध्य प्रदेश से तीसरे बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। इसके साथ ही मध्य प्रदेश वह राज्य बन जाएगा, जहां से सबसे अधिक राष्ट्रीय अध्यक्ष भाजपा को मिले हैं।
अब सवाल यह उठता है कि क्या —
- सुरक्षा बढ़ाया जाना महज एक प्रशासनिक निर्णय है या इसके पीछे कोई राजनीतिक संकेत छिपा है?
- मध्य प्रदेश की राजनीति से निकलकर शिवराज सिंह चौहान अब दिल्ली में किसी बड़ी जिम्मेदारी की ओर बढ़ रहे हैं?
- भाजपा को जल्द ही नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने वाला है?
इन सवालों के जवाब फिलहाल भविष्य के गर्भ में हैं, लेकिन इतना तय है कि शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में उनकी भूमिका और मजबूत हो सकती है। कई राजनीतिक जानकार इसे आने वाले समय में किसी बड़ी जिम्मेदारी का संकेत मान रहे हैं, हालांकि भाजपा की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
अब तक के बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्षों की सूची
- अटल बिहारी वाजपेयी मध्य प्रदेश 1980-1986
- लालकृष्ण अडवानी- गुजरात 1986-1990, 1993-1998, 2004-2005
- मुरली मनोहर जोशी- उत्तराखंड 1991-1993
- कुशाभाऊ ठाकरे मध्य प्रदेश 1998-2000
- बंगारु लक्ष्मण- आंध्रप्रदेश अब (तेलंगाना) 2000-2001
- के. जाना कृष्णमूर्ति- मदुरई (तमिलनाडु) 2001-2002
- एम. वैंकया नायडू- आंध्र प्रदेश 2002-2004
- राजनाथ सिंह- उत्तरप्रदेश 2005-2009, 2013-2014
- नितिन गडकरी- महाराष्ट्र 2010-2013
- अमित शाह- गुजरात 2014-2017, 2017-2020
- जेपी नड्डा- हिमाचल प्रदेश 2020 से अब तक





