जम्मू-कश्मीर में बीते तीन वर्षों के दौरान कुष्ठ रोग, मलेरिया और टीबी के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय सामने आई है, जब इन तीनों बीमारियों के उन्मूलन के लिए सरकार की ओर से विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।
शुक्रवार को लोकसभा में पेश किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश में कुष्ठ रोग की दर 2023-24 में प्रति एक लाख आबादी पर 0.42 थी, जो 2024-25 में बढ़कर 0.8 हो गई। इसी तरह मलेरिया के मामले पिछले वर्ष 44 से बढ़कर 2024 में 108 दर्ज किए गए। टीबी के मामलों में भी बढ़ोतरी हुई है और यह संख्या 2023 में 11,754 से बढ़कर 2024 में 12,200 तक पहुंच गई है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देशभर में कुष्ठ रोग, मलेरिया और टीबी के रुझान अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर कुष्ठ रोग की पहचान दर 2023-24 में 7.55 से घटकर 2024-25 में 7.00 हो गई है, हालांकि छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे राज्यों में यह स्तर अब भी अधिक बना हुआ है। देश में मलेरिया के मामले 2023 में 2.27 लाख से बढ़कर 2024 में 2.55 लाख हो गए हैं, जिनमें ओडिशा, त्रिपुरा, मिजोरम और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मामले सामने आए। वहीं टीबी के मामलों में भी वृद्धि हुई है और यह संख्या 2023 में 25.52 लाख से बढ़कर 2024 में 26.17 लाख तक पहुंच गई, जिसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और महाराष्ट्र का प्रमुख योगदान रहा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य अवसंरचना और मानव संसाधनों को सुदृढ़ करना राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार वार्षिक कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना के तहत तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान कर राज्यों की मदद करती है, ताकि बीमारियों पर नियंत्रण और स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत किया जा सके।






