
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान के परमाणु स्थलों को निशाना बनाया गया तो गंभीर रेडियोलॉजिकल रिसाव हो सकता है, जिससे बड़े शहरी इलाकों को खाली कराना पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी परमाणु प्रतिष्ठान को नुकसान या रेडिएशन स्तर बढ़ने का कोई संकेत नहीं मिला है। वियना में एजेंसी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की आपात बैठक में ग्रॉसी ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की। ईरान का आरोप है कि अमेरिका और इज़राइल ने उसके परमाणु केंद्रों को निशाना बनाया, जबकि एजेंसी को अभी तक किसी हमले की पुष्टि नहीं मिली है। ईरानी प्रतिनिधि ने दावा किया कि इस्फहान परमाणु सुविधा पर सैन्य कार्रवाई हुई।
निगरानी जारी, पड़ोसी देशों में स्तर सामान्य
आईएईए के अनुसार उसका क्षेत्रीय सुरक्षा नेटवर्क लगातार निगरानी कर रहा है और आसपास के देशों में रेडिएशन सामान्य पृष्ठभूमि स्तर से ऊपर नहीं पाया गया। विशेष रूप से बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट, तेहरान रिसर्च रिएक्टर और अन्य ईंधन-चक्र सुविधाओं में किसी क्षति की सूचना नहीं है। एजेंसी ईरानी परमाणु नियामकों से संपर्क की कोशिश कर रही है, लेकिन संघर्ष के कारण संचार बाधित है।
सैन्य ठिकानों पर हमलों की रिपोर्ट
क्षेत्र में जारी तनाव के बीच हाल के दिनों में मिसाइल ठिकानों और नौसैनिक अड्डों पर हमलों की खबरें सामने आई हैं। कुछ अपुष्ट रिपोर्टों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के बारे में भी दावे किए गए, जिनकी पुष्टि नहीं हुई है। एजेंसी ने सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है।
पहले भी हुए हमले, लेकिन बाहरी असर सीमित
पिछले वर्ष 2025 में 12-दिवसीय संघर्ष के दौरान नतांज परमाणु स्थल, फोर्डो परमाणु स्थल और इस्फहान परमाणु सुविधा पर हमले हुए थे। तब भी एजेंसी ने बताया था कि साइट के बाहर रेडिएशन स्तर नहीं बढ़ा, हालांकि स्थानीय प्रभाव दर्ज किए गए थे। रिपोर्टों के अनुसार ईरान के पास 60% तक संवर्धित यूरेनियम का बड़ा भंडार है, जिसे और शुद्ध किया जाए तो कई परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं। निरीक्षकों को प्रभावित स्थलों तक पूर्ण पहुंच न मिलने से वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही।
वैश्विक चिंता और कूटनीति पर जोर
इस आपात बैठक की मांग रूस ने की थी और इसमें विभिन्न देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष बढ़ा तो परमाणु सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है। ग्रॉसी ने दोहराया कि सैन्य कार्रवाई समाधान नहीं है और केवल संवाद व कूटनीति से ही संभावित रेडियोलॉजिकल आपदा टाली जा सकती है। फिलहाल कोई वास्तविक रिसाव नहीं हुआ है, लेकिन जोखिम को देखते हुए दुनिया सतर्क बनी हुई है।






