
मई 2022 में हुई थी सिद्धू मूसेवाला की हत्या
सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2022 में पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या से जुड़े मामले में दो आरोपियों पवन बिश्नोई और जगतार सिंह को जमानत प्रदान कर दी है। अदालत के निर्देशानुसार दोनों आरोपियों को मुकदमे की सुनवाई जारी रहने के दौरान रिहा किया जाएगा। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि मामले की सुनवाई जारी रहते हुए आरोपियों को जमानत दी जा सकती है। गौरतलब है कि पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला (28) की मई 2022 में पंजाब के मानसा जिले में उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वह अपनी एसयूवी से यात्रा कर रहे थे। इस हत्याकांड की जिम्मेदारी कनाडा में बैठे गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने ली थी, जिसे लॉरेंस बिश्नोई का करीबी माना जाता है।
पवन बिश्नोई पर लगे आरोप
पवन बिश्नोई पर आरोप है कि वह गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़ा हुआ था और उसने हत्या की साजिश में इस्तेमाल किए गए वाहन की व्यवस्था कर वारदात को अंजाम देने में लॉजिस्टिक सहायता दी थी। अदालत में उसकी ओर से कहा गया कि उस पर केवल बोलेरो वाहन उपलब्ध कराने का आरोप है, जिसका कथित रूप से अपराध में इस्तेमाल हुआ था।
सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि सुरक्षा के लिहाज से आरोपी का जेल में रहना बेहतर हो सकता है। इस पर बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल का गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से कोई संबंध नहीं है और केवल उपनाम समान होने के कारण ऐसा माना जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि उनका मुवक्किल करीब तीन साल दस महीने से जेल में बंद है और उसके पास से कोई बरामदगी नहीं हुई है।
राज्य सरकार ने जताया विरोध
राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि हत्या में इस्तेमाल वाहन की व्यवस्था को लेकर सह-आरोपियों द्वारा पवन बिश्नोई को 41 बार कॉल किए गए थे। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पूछा कि जेल के भीतर से मोबाइल फोन का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा था और फिलहाल मामले की सुनवाई किस चरण में है। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामला अभी साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया में है और कुछ संरक्षित गवाह पहले ही आरोपियों के खिलाफ बयान दे चुके हैं। वहीं सह-आरोपी जगतार सिंह के वकील ने दलील दी कि मूसेवाला के घर के पास लगे कैमरे उनके मुवक्किल के घर की सुरक्षा के लिए थे, न कि गायक के घर की रेकी के उद्देश्य से।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पवन बिश्नोई और जगतार सिंह को जमानत देने का आदेश दिया।






