कोर्ट में राहुल गांधी का नागरिकता विवाद, कांग्रेस का सियासी हंगामा

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी की नागरिकता पर सुनवाई की खबर फैलते ही कांग्रेस ने देश में राजनीतिक हंगामा मचाना शुरू कर दिया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कांग्रेस गांधी परिवार के बिना हमेशा अधूरी रही है। पूरी पार्टी गांधी परिवार के इर्द-गिर्द सिमटी रहती है। यही वजह है कि बिना देरी किए हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ट्वीट कर कहा कि भाजपा सरकार अदालत का दुरुपयोग कर रही है। राहुल गांधी को निशाना बनाकर लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है। प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने आएगी। केंद्र का गोपनीयता कार्ड राजनीतिक हथियार है। जिस पर भाजपा ने पलटवार किया। प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है। यदि राहुल गांधी के दस्तावेज साफ हैं तो डर क्यों। गोपनीयता राष्ट्रीय हित में जरूरी है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुप्पी साधी, लेकिन उनके करीबी नेताओं ने इसे विपक्ष की हार बताया। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि न्याय अंततः राहुल के पक्ष में होगा। गौरतलब है कि यह विवाद 2017 में शुरू हुआ। एक आरटीआई आवेदन से ब्रिटिश कंपनी में राहुल के नाम का जिक्र सामने आया। केंद्र ने कहा कि वे ब्रिटिश नागरिकता के लिए आवेदन कर चुके। राहुल ने इसे खारिज किया। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर टिप्पणी की थी। अब हाईकोर्ट में यह लंबा खिंच रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि फैसला चुनावी समीकरण बदल सकता है।

उधर, कानूनी जानकारों ने चैंबर सुनवाई को उचित ठहराया। पूर्व न्यायाधीशों ने कहा कि गोपनीय दस्तावेजों में ऐसा ही होता है। लेकिन कुछ वकीलों ने सवाल उठाए। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक देश में पारदर्शिता जरूरी है। यदि दस्तावेज गोपनीय हैं तो मामला क्यों चल रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने टिप्पणी की कि यह केंद्र की चाल है। छह अप्रैल को अगली सुनवाई होगी। तब शायद दस्तावेज खुले। यदि केंद्र का दावा सही पाया गया तो राहुल को बड़ा झटका लगेगा, अन्यथा विपक्ष मजबूत होगा। यह मामला लोकसभा चुनावों से ठीक पहले है, इसलिए राजनीतिक महत्व बढ़ गया है। राहुल गांधी ने कहा कि वे अदालत के फैसले का स्वागत करेंगे। केंद्र भी यही दोहरा रहा है, लेकिन तनाव बरकरार है। सुनवाई के दौरान किसी प्रकार का व्यवधान न खड़ा हो, इसके लिए लखनऊ कोर्ट परिसर में बृहस्पतिवार को सुरक्षा कड़ी थी। कांग्रेस कार्यकर्ता इकट्ठा हुए। पुलिस ने बैरिकेडिंग की। मीडिया कवरेज पूरे दिन चला। सोशल मीडिया पर हैशटैग ट्रेंड करने लगे। यह घटना उत्तर प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दे सकती है। इस दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में एक बड़ा कानूनी ड्रामा देखने को मिला। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के नागरिकता विवाद मामले की सुनवाई हुई। यह मामला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने गोपनीयता का हवाला देकर सुनवाई बंद कमरे में कराने की मांग की। न्यायालय ने इसे मान लिया। अगली सुनवाई छह अप्रैल को तय हुई। इस घटना ने विपक्ष और सत्ताधारी दल के बीच नई बहस छेड़ दी है।

राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर विवाद पुराना है। कुछ वर्ष पहले यह सवाल उठा था कि क्या वे भारतीय नागरिक हैं या ब्रिटिश। केंद्र सरकार ने दावा किया था कि राहुल गांधी के दस्तावेजों में कुछ अस्पष्टता है। विपक्ष ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। राहुल गांधी ने कई बार स्पष्ट किया कि वे जन्म से भारतीय हैं। उनके पिता राजीव गांधी और दादी इंदिरा गांधी दोनों भारत के पूर्व प्रधानमंत्री रहे। फिर भी, यह मुद्दा अदालत तक पहुंच गया।लखनऊ पीठ में सुनवाई के लिए काफी संख्या में वकील और पत्रकार इकट्ठा हुए। कोर्ट रूम में तनाव का माहौल था। राहुल गांधी की ओर से पेश वकीलों ने भी अपनी दलीलें तैयार की थीं, लेकिन सुनवाई शुरू होते ही केंद्र सरकार के वकील ने बड़ा कदम उठाया। सुनवाई की शुरुआत होते ही केंद्र सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एसबी पाण्डेय ने न्यायालय से विशेष अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय से लाए गए दस्तावेज अत्यंत गोपनीय हैं। इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारियां हो सकती हैं। यदि इन्हें खुले कोर्ट में पेश किया गया तो देशहित प्रभावित हो सकता है। पाण्डेय ने तर्क दिया कि इस तरह के मामलों में चैंबर सुनवाई सामान्य प्रक्रिया है।

न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ इस अनुरोध पर विचार करने लगी। उन्होंने दोनों पक्षों से संक्षिप्त बहस सुनी। राहुल गांधी के वकीलों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि यह मामला सार्वजनिक महत्व का है। गोपनीयता का दावा झूठा है। लेकिन न्यायालय ने केंद्र के अनुरोध को स्वीकार कर लिया। कोर्ट रूम से सभी को बाहर जाने को कहा गया। सुनवाई चैंबर में चली गई। बाहर इंतजार कर रहे पत्रकारों और समर्थकों में निराशा छा गई। चैंबर सुनवाई के दौरान क्या चर्चा हुई, यह गोपनीय है। लेकिन सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश किए। इनमें राहुल गांधी के जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट रिकॉर्ड और ब्रिटिश नागरिकता संबंधी पुराने फॉर्म शामिल बताए जाते हैं। राहुल पक्ष ने इनकी प्रामाणिकता पर सवाल उठाए। न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने दस्तावेजों का अवलोकन किया। उन्होंने दोनों पक्षों को अगली तारीख तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। यह सुनवाई मात्र आधे घंटे चली। उसके बाद कोर्ट ने छह अप्रैल की नई तारीख मुकर्रर की। न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि तब तक कोई टिप्पणी सार्वजनिक न की जाए। इस फैसले से मामला और रहस्यमय हो गया। विपक्षी नेता इसे न्यायिक साजिश बता रहे हैं। कुल मिलाकर राहुल गांधी का नागरिकता मामला अब चरम पर है। चैंबर सुनवाई ने रहस्य बढ़ा दिया। छह अप्रैल का इंतजार सबको है। यह केवल कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि राजनीतिक युद्ध है। देश देख रहा है कि सच्चाई क्या निकलती है। न्याय की जीत होनी चाहिए।

अजय कुमार,  वरिष्ठ पत्रकार, लखनऊ  

(ये लेखक के अपने स्वयं के निजी विचार हैं)

विशिखा मीडिया

विशिखा ने जनवरी 2019 से राजस्थान की राजधानी जयपुर से हिंदी मासिक पत्रिका के रूप में अपनी नींव रखी। राजस्थान में सफलता का परचम फहराने के बाद विशिखा प्रबंधन ने अप्रैल 2021 से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मासिक पत्रिका के रूप में अपना प्रकाशन आरम्भ करने का निर्णय लिया। इसी बीच लोगों की प्रतिक्रियाएं आईं कि विशिखा का प्रकाशन दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी होना चाहिये। पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए विशिखा प्रबंधन ने 1 जनवरी 2022 से जयपुर से दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी अपना प्रकाशन आरम्भ किया। विशिखा में प्रमुख रूप से राजनैतिक गतिविधियों सहित, कला, समाज, पर्यटन, एवं अन्य विषयों से संबंधित विस्तृत आलेख प्रकाशित होते हैं। विशिखा पत्रिका ने अपने विस्तृत आलेखों और दैनिक न्यूज़ विश्लेषण के माध्यम से अपने पाठकों को जानकारी और ज्ञान की दुनिया में ले जाने का महत्वपूर्ण काम किया है। अपनी सटीक खबरों, विस्तृत रिपोर्टों और विशेष विषयों पर आधारित लेखों के साथ, विशिखा ने लगातार अपनी विश्वसनीयता बनायी हुई है। विशिखा मासिक पत्रिका की खबरों की गुणवत्ता, नवीनता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए इस पत्रिका ने अपने पाठकों का दिल जीता है। यह पत्रिका न केवल जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि लोगों के बीच अपने विचारों के आदान प्रदान के लिए एक मंच भी उपलब्ध करती है। इसके लेखक, संपादक और टीम का प्रयास निरंतर यह होता है कि पाठकों को एक अच्छा अनुभव देने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ-साथ समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करें। विशिखा का लक्ष्य आपको विभिन्न विषयों पर अद्भुत लेखों से परिचित कराना है। पत्रिका के माध्यम से हम लेखकों, संगठनों, एवं समाज के प्रतिष्ठित और सामान्य लोगों को उनकी रचनात्मक योग्यताओं के आधार पर साझा करने का प्रयास करना है। पत्रिका टीम का मूल मंत्र है- रचनात्मकता, नैतिकता और उच्चतम गुणवत्ता। विशिखा हिंदी मासिक पत्रिका है जो 2019 में शुरू हुई थी। वर्तमान में यह राजस्थान और उत्तराखंड से प्रकाशित की जाती है। इसमें विभिन्न विषयों पर लेख शामिल होते हैं जैसे कि करंट अफेयर्स, साहित्य, महिलाएं, यात्रा और अधिक। हमारी पत्रिका उन लोगों के लिए है जो ज्ञान और सूचना की तलाश में होते हैं और उन्हें उन विषयों से रुबरु कराने का एक मंच प्रदान करती हैं।

Leave a Reply

Discover more from

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading