एनडीए के सहयोगी दल तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ विवाद पर अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया देते हुए इसे केवल एक राजनीतिक घटना मानने से इनकार किया है। पार्टी के आंध्र प्रदेश अध्यक्ष पल्ला श्रीनिवास राव ने कहा कि इस मंच को महज राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह देश के युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी, निराशा और व्यवस्था के प्रति असंतोष का प्रतीक है। उनके अनुसार, यह एक व्यापक सामाजिक मनोभाव की अभिव्यक्ति है, जिसे समझना और गंभीरता से लेना जरूरी है।

सोमवार को दिए गए बयान में उन्होंने कहा कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) से जुड़ा विवाद केवल एक डिजिटल ट्रेंड नहीं, बल्कि युवाओं के भीतर पनप रही बेचैनी का संकेत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि युवाओं की आकांक्षाएं, रोजगार के अवसरों की कमी, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताएं और बढ़ते आर्थिक दबाव जैसे मुद्दे आज एक बड़े वर्ग को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में लोकतांत्रिक सरकारों की जिम्मेदारी बनती है कि वे इन भावनाओं को गंभीरता से सुनें और उनके अनुरूप नीतिगत कदम उठाएं। पल्ला श्रीनिवास राव ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर उभर रहे इस तरह के रुझान सरकार के लिए एक संकेत हैं, जिनके आधार पर सुधार और बदलाव की दिशा तय की जानी चाहिए। उनका मानना है कि शासन का उद्देश्य ऐसा होना चाहिए जिससे युवाओं में विश्वास कायम रहे और उन्हें यह महसूस हो कि उनकी उम्मीदों को पूरा करने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं, न कि उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि नरेंद्र मोदी और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू लगातार युवाओं के रोजगार, कौशल विकास और आर्थिक प्रगति पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
सरकार की प्राथमिकताओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार रोजगार सृजन, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इकोसिस्टम, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, औद्योगिक विकास और विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों पर काम कर रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सोशल मीडिया अब एक ऐसा मंच बनता जा रहा है, जिस पर नियंत्रण सीमित होता जा रहा है और इसमें विदेशी प्रभाव की आशंकाओं को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद, उन्होंने स्पष्ट किया कि हर आलोचना को राष्ट्रविरोधी करार देना उचित नहीं है। टीडीपी नेता ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल युवाओं की वास्तविक चिंताओं का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हित साधने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक सशक्त लोकतंत्र में आलोचना को सुनना और उस पर विचार करना कमजोरी नहीं, बल्कि परिपक्व और जिम्मेदार नेतृत्व की पहचान है।

गौरतलब है कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम का एक व्यंग्यात्मक डिजिटल प्लेटफॉर्म हाल ही में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। इसका एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट 21 मई को भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया था। इसके बाद ‘कॉकरोच इज बैक’ नाम से एक नया हैंडल सामने आया, जिसकी टैगलाइन ‘कॉकरोच मरते नहीं’ रखी गई।
यह विवाद उस समय और गहरा गया जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की कथित टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। अदालत की कार्यवाही के दौरान ‘कॉकरोच’ और ‘पैरासाइट’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी। बाद में मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी उन लोगों के संदर्भ में थी जो फर्जी डिग्री के आधार पर कानूनी पेशे में प्रवेश कर रहे हैं, लेकिन इसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह व्यंग्यात्मक मंच बेरोजगारी, पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था की खामियों और युवाओं की नाराजगी जैसे मुद्दों को लेकर मीम्स और तीखी टिप्पणियों के जरिए चर्चा के केंद्र में आ गया है।






