बांग्लादेश में मीडिया क्षेत्र से जुड़ी महिला पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक हालिया अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में यह सामने आया है कि कार्यस्थल पर महिला पत्रकारों को अपने पुरुष सहकर्मियों की तुलना में कई गुना अधिक यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के निष्कर्ष न केवल कार्यस्थल की असुरक्षित स्थितियों को उजागर करते हैं, बल्कि यह भी संकेत देते हैं कि करियर पर प्रतिकूल प्रभाव के डर से अधिकांश पीड़िताएं शिकायत दर्ज कराने से बचती हैं।

अध्ययन के अनुसार, बांग्लादेश में बड़ी संख्या में महिला पत्रकारों ने कार्यस्थल पर किसी न किसी रूप में यौन उत्पीड़न झेला है। सर्वे में शामिल 339 मीडिया पेशेवरों में से करीब 60 प्रतिशत महिला प्रतिभागियों ने मौखिक यौन उत्पीड़न का अनुभव होने की बात कही, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा महज 9 प्रतिशत रहा। इससे स्पष्ट होता है कि लैंगिक आधार पर उत्पीड़न की समस्या बेहद गहरी और असंतुलित है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के साथ ऑनलाइन यौन उत्पीड़न के मामलों में भी वृद्धि हुई है। जहां 48 प्रतिशत महिला पत्रकारों ने कार्य से जुड़े ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करने की बात कही, वहीं पुरुषों में यह आंकड़ा केवल 15 प्रतिशत रहा। इसके अलावा, 24 प्रतिशत महिलाओं ने शारीरिक यौन उत्पीड़न झेलने की बात स्वीकार की, जबकि पुरुषों में यह दर 4 प्रतिशत दर्ज की गई। अध्ययन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि अधिकांश पीड़िताएं इन घटनाओं की रिपोर्ट नहीं करतीं। रिपोर्ट के मुताबिक, करियर को नुकसान पहुंचने की आशंका, संस्थागत समर्थन की कमी और कार्यस्थल के माहौल को लेकर असुरक्षा की भावना इसके प्रमुख कारण हैं। आंकड़ों के अनुसार, मौखिक उत्पीड़न का सामना करने वाली 52 प्रतिशत महिलाओं ने इसकी शिकायत नहीं की। वहीं, जिन मामलों की रिपोर्ट की गई, उनमें से 43 प्रतिशत मामलों में नियोक्ताओं द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यह अध्ययन डब्ल्यूएएन-आईएफआरए, सिटी, सेंट जॉर्ज, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन और बीबीसी मीडिया एक्शन द्वारा 21 देशों के 2,800 से अधिक मीडिया पेशेवरों पर किए गए व्यापक सर्वे का हिस्सा है। इसके निष्कर्ष बताते हैं कि वैश्विक स्तर पर भी मीडिया उद्योग में यौन उत्पीड़न एक गंभीर और व्यापक समस्या बनी हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, 17 प्रतिशत महिला मीडिया पेशेवरों ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का अनुभव किया, जिनमें से आधे से अधिक ने इसकी शिकायत नहीं की। यह स्थिति कार्यस्थल की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यौन उत्पीड़न केवल व्यक्तिगत पीड़ा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे न्यूज़रूम के माहौल और कार्य संस्कृति को प्रभावित करता है। सिटी, सेंट जॉर्ज, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन की शोधकर्ता लिंडसे ब्लूमेल के अनुसार, “यौन उत्पीड़न का प्रभाव पीड़ितों के मानसिक स्वास्थ्य और कार्य संतुष्टि पर नकारात्मक पड़ता है, जिससे उनके पेशा छोड़ने की संभावना भी बढ़ जाती है।” वैश्विक आंकड़ों की बात करें तो अफ्रीका में यौन उत्पीड़न की दर सबसे अधिक 33 प्रतिशत दर्ज की गई, इसके बाद अरब क्षेत्र में 31 प्रतिशत और दक्षिण-पूर्व एशिया में 19 प्रतिशत मामले सामने आए। यूक्रेन में यह आंकड़ा 12 प्रतिशत रहा।
डब्ल्यूएएन-आईएफआरए विमेन इन न्यूज की प्रबंध निदेशक सुसान माकोरे ने कहा कि जब अधिकांश मामले रिपोर्ट ही नहीं होते, तो यह कार्यस्थल की संस्कृति, विश्वास और जवाबदेही की गहरी कमी को दर्शाता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मीडिया में यौन उत्पीड़न केवल एक कार्यस्थल की समस्या नहीं है, बल्कि यह एक संरचनात्मक बाधा है, जो यह तय करती है कि पत्रकारिता में कौन सुरक्षित महसूस करता है, कौन इसमें बना रहता है और कौन नेतृत्व की भूमिका निभा सकता है।
यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि बांग्लादेश सहित वैश्विक मीडिया उद्योग में महिला पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस नीतियों, संवेदनशील माहौल और सख्त कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता है।
– इनपुट: आईएएनएस






