शुक्रवार को नेपाल की राजधानी काठमांडू में राजशाही समर्थकों ने जमकर हंगामा किया। तिनकुने इलाके में एक घर को आग के हवाले कर दिया और राजशाही बहाल करने के नारे लगाए। इस दौरान पुलिस और समर्थकों के बीच भिड़ंत हुई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और 15 लोग घायल हो गए। हालात बेकाबू होते देख पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और पानी की बौछारें कर भीड़ को तितर-बितर किया।
हिंसा के दौरान समर्थकों ने पत्थरबाजी करते हुए एक राजनीतिक दल के कार्यालय पर हमला बोला और वाहनों में आगजनी की। इसके अलावा, दुकानों में लूटपाट और सुरक्षा बैरिकेड को तोड़ने की कोशिश भी की गई। इस झड़प में एक व्यक्ति की मौत और 30 लोग घायल हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछारों का सहारा लिया। हालात को देखते हुए काठमांडू के कुछ इलाकों में रात 10 बजे तक कर्फ्यू लगा दिया गया और पूर्वी काठमांडू में सेना तैनात कर दी गई।
इस बीच, सीपीएन-माओवादी केंद्र के नेता पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ ने राजशाही समर्थकों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि नेपाली जनता और राजनीतिक दलों के उदारवादी रवैये को उनकी कमजोरी न समझा जाए। साथ ही, पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह को भी अपनी पिछली गलतियों से सीखने की नसीहत दी।
प्रदर्शन के दौरान तिनकुने इलाके में प्रदर्शनकारियों ने एक घर में आग लगा दी और सुरक्षा बैरिकेड को तोड़ने की कोशिश की। प्रदर्शनकारी नेपाल के राष्ट्रीय ध्वज और पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की तस्वीरें हाथ में लिए हुए थे। उन्होंने भ्रष्ट सरकार मुर्दाबाद और राजशाही वापस लाने की मांग करते हुए नारेबाजी की। पुलिस से हुई भिड़ंत में एक व्यक्ति घायल हो गया। पुलिस ने कई युवकों को हिरासत में लिया और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवाई फायरिंग की।
काठमांडू में राजशाही समर्थकों और विरोधियों के अलग-अलग प्रदर्शन हुए। टकराव की आशंका को देखते हुए सैकड़ों दंगा पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्र न्यू बानेश्वर की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने कई युवकों को हिरासत में ले लिया।
गौरतलब है कि नेपाल में 2008 में 240 साल पुरानी राजशाही को खत्म कर दिया गया था और देश को एक धर्मनिरपेक्ष, संघीय, लोकतांत्रिक गणराज्य में बदल दिया गया। तब से राजशाही समर्थक इसकी बहाली की मांग कर रहे हैं। हाल ही में पूर्व राजा ज्ञानेंद्र ने लोकतंत्र दिवस (19 फरवरी) पर एक वीडियो संदेश के जरिए समर्थन की अपील की थी।
नेता प्रचंड ने एक रैली में कहा कि राजशाही समर्थक आतंक फैलाकर लोगों में डर पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता और राजनीतिक दलों द्वारा दिखाए गए उदारवादी रवैये को कमजोरी न समझा जाए। उन्होंने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र को याद दिलाया कि अब वे एक साधारण नागरिक हैं और कोई गलती न करें, वरना सब कुछ खो देंगे।
विरोध प्रदर्शन के बाद काठमांडू के बनेश्वर, तिनकुने और आसपास के इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। जिला प्रशासन ने आदेश जारी कर शाम 4:25 बजे से रात 10 बजे तक कर्फ्यू लागू किया है। इस दौरान कर्फ्यू वाले इलाकों में किसी भी प्रकार की सभा, रैली या विरोध प्रदर्शन प्रतिबंधित रहेगा।
काठमांडू में राजशाही समर्थकों एवं पुलिस के बीच झड़प में एक व्यक्ति की मौत, 15 घायल, सेना बुलाई गई





