सैन्य मध्यस्थता के बहाने नेपाल में राजशाही बहाल करने की साजिश, नेपाल के एक संगठन का दावा

नेपाल ने वर्ष 2008 में राजशाही को समाप्त कर दिया था। लेकिन इस साल एक बार फिर राजशाही की बहाली की मांग को लेकर देश में जोरदार विरोध-प्रदर्शन देखने को मिले। इसी बीच पूर्व राजा ज्ञानेंद्र सिंह भी पहले से कहीं अधिक सक्रिय हो गए हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि नेपाल में कोई स्थायी सरकार नहीं है और सत्ता की बागडोर पूरी तरह से सेना के हाथों में है, जिससे यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि शायद नेपाल में दोबारा राजशाही स्थापित हो सकती है।
नेपाल के नागरिक समाज संगठन ‘बृहत नागरिक आंदोलन (बीएनए)’ ने सेना पर आरोप लगाते हुए कहा कि सैन्य हस्तक्षेप के बहाने राजशाही की वापसी की साजिश रची जा रही है। संगठन का कहना है कि धर्मनिरपेक्षता, संघवाद और समावेशी व्यवस्था को खत्म करने की कोशिशें अस्वीकार्य हैं। बयान में कहा गया कि जनता के आंदोलन का उद्देश्य न तो गणतंत्रवाद को पलटना था और न ही सेना को असंवैधानिक अधिकार देना।
इस बीच नेपाल में अंतरिम सरकार के गठन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। खबर है कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को कार्यवाहक सरकार का प्रमुख बनाया जा सकता है। उनकी जिम्मेदारी आंदोलनकारी समूहों की मांगों के अनुरूप नए चुनाव कराना होगी। गुरुवार देर रात तक राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल, सेना प्रमुख और जेनरेशन-ज़ेड समूह के नेताओं के बीच बैठक चली लेकिन नतीजा नहीं निकला। हालांकि सूत्रों के अनुसार, जेनरेशन-ज़ेड समूह ने कार्की को प्रधानमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। यदि सबकुछ तय रहा तो राष्ट्रपति पौडेल शुक्रवार सुबह उन्हें नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकते हैं।
पिछले दिनों नेपाल सरकार ने सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया था। यह कदम सरकार के खिलाफ भारी पड़ गया। सोमवार को हजारों युवाओं ने सड़कों पर उतरकर संसद भवन में घुसपैठ की। पुलिस की फायरिंग में 19 लोगों की मौत हो गई। हालात बिगड़ने पर सरकार ने आपात बैठक बुलाई और सोशल मीडिया से प्रतिबंध हटाना पड़ा। इसके बावजूद लोगों का आक्रोश शांत नहीं हुआ और मंगलवार को फिर हिंसा भड़क गई। इस दौरान आगजनी और हमलों की घटनाएं सामने आईं। हालात काबू से बाहर होते देख प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया। लेकिन उनके इस्तीफे के बाद भी गुस्सा थमा नहीं और कई नेताओं पर हमले हुए। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, दो दिनों के प्रदर्शनों में अब तक 34 लोगों की जान जा चुकी है।

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