
इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को
नासिक में टीसीएस के कथित धर्मांतरण मामले में एचआर मैनेजर निदा खान को बड़ा झटका लगा है। नासिक जिला एवं सत्र न्यायालय ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है और गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने से भी इनकार कर दिया है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि निदा खान आठ सप्ताह की गर्भवती हैं और उन पर लगे आरोपों में अधिकतम सजा तीन वर्ष है, इसलिए उन्हें गिरफ्तारी से संरक्षण दिया जाना चाहिए। हालांकि, अदालत ने मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
यह पूरा विवाद नासिक स्थित टीसीएस के बीपीओ सेंटर से सामने आया था, जहां एक 23 वर्षीय महिला कर्मचारी ने आरोप लगाया कि कंपनी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और सहकर्मियों ने उस पर इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव बनाया। पीड़िता का दावा है कि उसे हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए मजबूर किया गया और शादी का झांसा देकर उसका यौन उत्पीड़न भी किया गया। पुलिस जांच के मुताबिक, निदा खान को इस पूरे प्रकरण की कथित ‘मास्टरमाइंड’ माना जा रहा है। आरोप है कि उन्होंने अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर युवतियों को निशाना बनाने और उन्हें धार्मिक रूप से प्रभावित करने के लिए एक नेटवर्क संचालित किया। इस मामले में अब तक कई आरोपियों को नामजद किया गया है, जिनमें से सात को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि निदा खान अभी तक फरार बताई जा रही हैं। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में उनकी तलाश में छापेमारी कर रही है। आरोप सामने आने के बाद टीसीएस ने भी निदा खान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनका सिस्टम एक्सेस ब्लॉक कर दिया है। एसआईटी की प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह गिरोह 18 से 25 वर्ष की युवतियों को निशाना बनाता था। पुलिस का मानना है कि निदा खान की गिरफ्तारी से इस कथित धर्मांतरण सिंडिकेट से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।





