के. अन्नामलाई द्वारा शुरू किए गए नए राजनीतिक आंदोलन में 10 घंटे में 10 लाख से अधिक लोग जुड़े
तमिलनाडु की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई द्वारा शुरू किए गए नए राजनीतिक आंदोलन ‘इधु नम्मा इयक्कम’ (अर्थात ‘यह हमारा आंदोलन है’) को जनता से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। अन्नामलाई ने दावा किया है कि इस अभियान की शुरुआत के महज 10 घंटे के भीतर ही 10 लाख से अधिक लोग इससे जुड़ चुके हैं, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। अन्नामलाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह समर्थन उनके साझा विजन और मिशन के प्रति लोगों के बढ़ते विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने अपने समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता की भागीदारी से यह आंदोलन लगातार मजबूत होता जा रहा है।

नई राजनीतिक राह की शुरुआत
भाजपा से इस्तीफा देने के बाद अन्नामलाई ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने एक नए और समावेशी राजनीतिक मंच की घोषणा की है, जो भविष्य में एक पूर्ण राजनीतिक दल का रूप ले सकता है। अन्नामलाई ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने दिसंबर 2025 में ही पार्टी नेतृत्व को अपने इस्तीफे के बारे में अवगत करा दिया था। अपने इस्तीफे के पीछे की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि तमिलनाडु को लेकर उनके और भाजपा नेतृत्व के दृष्टिकोण में स्पष्ट मतभेद थे। हालांकि, उन्होंने पार्टी नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें वर्षों तक मिला सहयोग उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।
दिल्ली दौरे के बाद तेज हुई थीं अटकलें
अन्नामलाई के इस्तीफे से पहले उनके दिल्ली दौरे ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को हवा दी थी। इस दौरान उन्होंने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, संगठन महासचिव बी.एल. संतोष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कयास तेज हो गए थे। गौरतलब है कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी और पार्टी को केवल लगभग 3 प्रतिशत वोट शेयर हासिल हुआ था। इसके बाद राज्य इकाई में बदलाव और नए नेतृत्व की चर्चा जोर पकड़ने लगी थी।

इस्तीफे के पीछे बदलते राजनीतिक समीकरण
अन्नामलाई का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा और एआईएडीएमके के बीच गठबंधन फिर से सक्रिय हुआ है। इस राजनीतिक समीकरण के चलते उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया गया। एआईएडीएमके के कुछ नेताओं के साथ उनके संबंध पहले से ही तनावपूर्ण रहे हैं, जिससे कई बार विवाद की स्थिति भी बनी। हाल ही में कुछ नेताओं के इस्तीफों के बाद यह भी चर्चा है कि आने वाले समय में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता अन्नामलाई के इस नए राजनीतिक अभियान से जुड़ सकते हैं।
तमिलनाडु में नई राजनीति का केंद्र
राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या ‘इधु नम्मा इयक्कम’ तमिलनाडु में एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में उभर सकता है। शुरुआती दौर में मिले व्यापक समर्थन और अन्नामलाई की सक्रियता को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले समय में इस नए राजनीतिक प्रयोग का राज्य की राजनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि यह आंदोलन किस तरह संगठनात्मक रूप लेता है और क्या यह वास्तव में तमिलनाडु की राजनीतिक दिशा को बदलने में सफल हो पाता है।





