जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के बारे में ये रोचक तथ्य, जो आप शायद ही जानते होंगे!

भारत के प्रसिद्ध पौराणिक, धार्मिक, ऐतिहासिक, प्राकृतिक दर्शनीय स्थलों ने समस्त दुनिया के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित किया है। हर वर्ष लाखों पर्यटक भारत के सौन्दर्य को देखने के लिए यहां आते हैं। इसी श्रृंखला में उत्तराखंड राज्य में स्थित भारत का जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान अधिकतर पर्यटकों में काफी लोकप्रिय है। जंगली जानवरों के जीवन में रुचि रखने वाले लोगों को यह राष्ट्रीय उद्यान करीब से जानने का अवसर प्रदान करता है। तो आइए जानते हैं आज उत्तराखंड के 521 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैले जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के इतिहास के विषय में।

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास

इस राष्ट्रीय उद्यान के नामकरण का किस्सा बहुत ही रोचक है। कहा जाता है कि जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान की खोज अग्रेजों द्वारा की गई थी। जिन्होंने वर्ष 1936 में इस जगह पर शाल वृक्षों को लगाकर वन्यजीवों के लिए आरक्षित कर दिया था। उस समय इस जगह का नाम गवर्नर मैलकम हैली के नाम पर हैली राष्ट्रीय उद्यान रखा गया था। आजादी के पश्चात इस उद्यान का नाम रामगंगा राष्ट्रीय उद्यान रख दिया गया था। 

25 जुलाई 1875 में जन्मे एक प्रसिद्ध ब्रिटिश शिकारी जिनका पूरा नाम जेम्स एडवर्ड कॉर्बेट था, वह एक पशु प्रेमी थे। जो वन्य जीव मनुष्य के लिए घातक हो जाता था, वह उसका शिकार कर उसे मार देते थे। उन्होंने वन्यजीव के संरक्षण हेतु अनेकों महत्वपूर्ण योगदान दिए। उन्होंने अपने शिकार की कला से गड़वाल तथा कुमाऊं मंडल के कई आदमखोर बाघों को मारकर हजारों लोगों की जान भी बचाई थी। इसका अनुभव उनके द्वारा लिखी पुस्तक “मैन ईटर्स ऑफ कुमाऊं” में किया गया है। जिसके लिए लोग उन्हें गोरा साधू के नाम से भी पुकारने लगे थे। उनके वन्यजीव संरक्षण के अहम योगदान को देखते हुए उन्हें श्रद्धांजली अर्पित करने के लिए इस उद्यान का नाम वर्ष 1957 में जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान रख दिया गया। आज यह उद्यान भारत के पर्यटकों को वन्यजीव जंतुओं के जीवन को करीब से जानने का अवसर प्रदान करता है।

उद्यान की विशेषताएं

उत्तराखंड राज्य में नैनीताल के समीप स्थित जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान जंगली जानवरों के साथ-साथ इस क्षेत्र की पहाड़ियों, झीलों, छोटी नदियों तथा हरी भरी प्रकृति के लिए भी पसंद किया जाता है। यह मुख्य रूप से रामगंगा नदी के किनारे स्थित है। इसलिए यहां नदियों का आकर्षण भी देखने को मिल जाता है। हालांकि जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान बंगाल टाइगर्स के लिए सर्वाधिक प्रसिद्ध है। क्योंकि यह  बाघों का घर है। लेकिन साथ ही यहां कई प्रजातियों के जंगली जानवर तथा विलुप्तप्रायः जीव जंतु भी देखने को मिल जाते हैं। जिनमें शेर, हाथी, चीता, हिरण, नील गाय, तेंदुआ, मगरमच्छ, भालू आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त यहां पर 600 से अधिक पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों को भी देखने का अवसर मिलता है। जिसमें रंग बिरंगे मोर, कबूतर, चिड़िया, तीतर, संबर्ड, किंगफिशर, मिनिवेट, मैना, मैगपाई, कठफोड़वा, चैती, गिद्द, सारस, बाज़ आदि सम्मिलित हैं। 

यहां पर 400 से अधिक पेड़ों की प्रजातियां मौजूद हैं। याँ आप 51 प्रकार की झाड़ियां तथा 30 प्रकार के बांस देख सकते हैं। एक अनुभवी गाइड के साथ आप आसानी से जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान का आनंद लें सकते हैं। यदि आप एक एडवेंचर पसंद है साथ ही आपकी रुचि जंगली जानवरों में अधिक है तो आपको अपने जीवन में एक बार इस जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान जरूर आना चाहिए। 

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में आप तीन प्रकार की सफारी का भी आनंद ले सकते हैं। केंटर सफारी, जीप सफारी और एलीफेंट सफारी। सफारी के माध्यम से पर्यटक सुरक्षा के साथ-साथ थोड़ा नजदीकी से इस उद्यान का मजा ले सकते हैं। आप यहां पर पिकनिक या कैंप के लिए भी आ सकते हैं। जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटकों के लिये कोसी नदी में राफ्टिंग की विशेष सुविधा है। उद्यान के अंदर ही राफ्टिंग के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं मौजूद हैं। यहां के रिसोर्ट आपको फिशिंग के लिए भी आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध कराते हैं। जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान की सुरक्षा व्यवस्था भी उत्कृष्ट है। यहां पर आपको सावधानी पूर्वक पूरे उद्यान को घुमाने की व्यवस्था की जाती है।

पर्यटकों की सुविधा हेतु पांच निश्चित ज़ोन में विभाजित

बिजरानी ज़ोन– रामनगर से दो किलोमीटर दूर यह बिजरानी ज़ोन डे सफारी के लिए उचित है। यहां के हरे भरे पेड़ इस ज़ोन की विशेषता हैं।

ढिकाला ज़ोन– यह जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान का सबसे बड़ा ज़ोन है। रामनगर से 18 कि.मी. दूर स्थित इस ज़ोन में रात में रोकना रोमांचक अनुभव कराता है। यह ज़ोन अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है।

झिरना ज़ोन– जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान का यह ज़ोन बाघों तथा भालुओं की कई प्रजातियों को देखने के लिए प्रसिद्ध है। यही कारण है कि यहां वर्ष भर में सबसे ज्यादा पर्यटक आते हैं।

ढेला सफारी ज़ोन– जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान का यह भाग पूरे वर्ष पर्यटकों के लिए खुला रहता है। यहां आप जंगली जानवरों के साथ ही प्रकृति का भी खुलकर आंनद उठा सकते हैं।

दुर्गा देवी ज़ोन– यह ज़ोन आम तौर पर पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध है। इसके बावजूद आप यहां पर भालू, तेंदुए जैसे कई अनेक जानवर देख सकते हैं।

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान पंहुँचने के साधन

भारत के किसी भी राज्य से हवाई मार्ग, रेल मार्ग, और सड़क मार्ग द्वारा जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान तक पहुंचा जा सकता है। यदि आप हवाई मार्ग द्वारा जाना चाहते हैं, तो जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान का निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है। जहां से इस उद्यान की दूरी लगभग 80 किमी है। इसके अतिरिक्त यदि आप रेल मार्ग से आते हैं तो इसके लिए निकटतम रेलवे स्टेशन रामनगर है। जहां से जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान की दूरी लगभग 15 किलोमीटर रहती है। सड़क मार्ग से भी आप रामनगर जो कि दिल्ली, मुरादाबाद, देहरादून आदि शहरों से जुड़ा है, पहुँच सकते हैं।

कब जाएं जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान जाने का सबसे अच्छा समय नवंबर से जून के बीच का है क्योंकि इस दौरान उद्यान पर्यटकों  के लिए खुला रहता है लेकिन जैसे ही मॉनसून का सीजन आता है इसको बंद कर दिया जाता है। क्योंकि बारिश की वजह से उद्यान के अंदर मौजूद रास्ता पानी के साथ बह जाता है। मॉनसून खत्म होने के बाद फिर से मरम्मत का काम शुरू होता है, जो नवंबर महीने के आसपास पूरा हो पाता है।

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