रणथम्भौर

भारत के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित, भौगोलिक दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य राजस्थान अपनी प्राचीनतम तथा ऐतिहासिक स्थलों, संस्कृतियों एवं कला के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इस राज्य की खूबसूरती तथा ऐतिहासिक स्थलों को देखने के लिए तमाम पर्यटक यहां वर्ष भर आते हैं। वैसे तो राजस्थान के अधिकांश जिले पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण हैं। पर राजस्थान का सवाई माधोपुर जिला ‘टाइगर सिटी’ के नाम से राज्य में प्रसिद्ध है, जहां देश के सबसे अच्छे बाघ अभ्यारण्यों में से एक रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान स्थित है। इस उद्यान में मौजूद बाघों को फ्रेंडली बाघों के लिए जाना जाता है। जीव तथा वनस्पतियों में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए राजस्थान का रणथम्भौर नेशनल पार्क अत्यंत खास माना जाता है। विंध्य पर्वत तथा अरावली पहाड़ियों की तलहटी में मौजूद रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान यहां स्थित रणथम्भौर फोर्ट और आसपास की पहाड़ियों और घाटियों के साथ मिलकर इस जगह को अत्यधिक खूबसूरत तथा पर्यटन के लिए विशेष बनाता है।

तो आइए आज राजस्थान में स्थित रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान के इतिहास, विशेषता तथा यात्रा के विषय में संपूर्ण जानकारी प्राप्त करते हैं।

• रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान और रणथम्भौर फोर्ट का इतिहास

उत्तर में बनास नदी तथा दक्षिण में चंबल नदी से घिरा हुआ रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान का नाम रणथंभौर स्थित किले के नाम रखा गया था। वर्ष 1955 में भारत सरकार द्वारा रणथम्भौर को खेल अभ्यारण के रूप में स्थापित किया गया था। इसके पश्चात् इस उद्यान को 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्व के रूप में रखा गया। फिर 1980 में रणथम्भौर उद्यान को एक राष्ट्रीय उद्यान के रूप में घोषित कर दिया गया। 

• रणथम्भौर उद्यान की विशेषताएं

यह राष्ट्रीय उद्यान वन्य जीवों तथा वनस्पतियों के लिए अधिक प्रसिद्ध है। वन्यजीव प्रेमियों द्वारा रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान में यात्रा करना, उनका एक सपना होता है। यहां पर जानवरों, पक्षियों, सरीसृपों तथा उभयचर जैसे जीवों की विभिन्न प्रजातियां मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त इस उद्यान में दिव्य बाघों की प्रजातियां भी पाई जाती हैं। जो कि पर्यटकों को अधिक आकर्षित करती है। 

एक रिपोर्ट के अनुसार, रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान में सरीसृपों की कुल 35, स्तनधारियों की 40 तथा पक्षियों की कुल प्रजातियां मौजूद होने का दावा है।

जंगल सफारी का आनंद

रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा को और भी रोमांचक बनाने के लिए जंगल सफारी का विकल्प अत्यंत लुभावना है। यहां आपको जंगल सफारी का आनंद लेने के लिए दो विकल्प हैं। जिप्सी या कैंटर यह दोनों ही विकल्प जंगल सफारी का आनंद लेने के लिए अच्छे हैं लेकिन जिप्सी को बेहतर माना जाता है क्योंकि इसमें आपको कम लोग मिलते है तथा आप आसानी से यात्रा का लुत्फ उठा सकते हैं। यहां आपको जंगल सफारी करने के दौरान प्रत्येक वाहन में एक ड्राइवर तथा एक गाइड मौजूद मिलेगा। जंगल सफारी के दौरान आप गर्मियों के मौसम में बाघों की अधिक संख्या देख सकते हैं।

सफारी का समय

यदि रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान जंगल सफारी के समय की बात करें तो यहां पर्यटकों के लिए सर्दियों तथा गर्मियों के मौसम में अलग अलग समय है। सर्दी के मौसम में, सफारी का समय सुबह 6.30 से 10.30 बजे तथा शाम को 2.00 से 6.00 बजे तक का समय निश्चित होता है। गर्मी के मौसम में सफारी का समय सुबह 6.00 से 10.00 बजे तक तथा शाम को 2.30 से 6.30 तक का किया गया है।

रणथम्भौर स्थित अन्य प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल

रणथम्भौर फोर्ट

रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा के लिए गए है तो वहां स्थित रणथम्भौर किले को घूमना भी ना भूलें। यह एक दुर्जय किला है जो कि जयपुर के महाराजाओं का पूर्व शिकारगाह भी रह चुका है। 

गणेश त्रिनेत्र मंदिर

रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान के पास स्थित प्रसिद्ध गणेश जी का त्रिनेत्र मंदिर भी बना हुआ है। जहां  श्रद्धालु की भीड़ रहती है। आप भगवान गणेश के इस प्रसिद्ध मंदिर के दर्शन हेतु भी जा सकते हैं।

जोगी महल

रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान के आस पास स्थित यह स्थान अत्यंत सुंदर स्थान है। यहां पर देश के दूसरे नंबर का सबसे बड़ा बरगद का पेड़ मौजूद है। यह सुंदर पदम तालाओं के किनारे है। 

पदम झील

रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान के पास स्थित एक झील भी यहां घूमने आए पर्यटकों को लुभाती है। इस झील के आसपास कई वन्यजीव जंतुओं को शिकार करते तथा झील के पास आते जाते देखा जाता है।

सुरवर झील

रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान के अंदर मौजूद यह झील आपकी थकी हुई आंखों को सुकून से भर देगी। यहां पहुंच कर आपको अनायास ही एक अलग अनुभव प्राप्त होगा। आप रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा के दौरान इस झील की सुंदरता का भी आनंद ले सकते हैं।

रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान कैसे पहुंचे

हवाई मार्गः रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान हवाई यात्रा से पहुंचने के लिए सबसे निकटतम हवाई अड्डा जयपुर में है। जहां से इसकी दूरी 180 किमी है। यहां से आपको कोई भी टैक्सी, कैब मिल जाएगी, जो आपको रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान तक आसानी से पहुंचा देगी।

रेल मार्गः यदि आप रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान रेल मार्ग द्वारा पहुंचना चाहते हैं तो इसके लिए निकटतम सवाई माधोपुर है, जो अधिकतर सभी बड़े स्टेशनों से जुड़ा है।

सड़क मार्ग: सड़क मार्ग द्वारा भी आप रणथम्भौर आसानी से पहुंच सकते हैं

रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान जाने का सबसे अच्छा समय

यदि आप रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान का भरपूर मजा लेना चाहते हैं तो आपको यह जानना जरूरी है कि इस पार्क में घूमने का सबसे अच्छा समय कौन सा है। वैसे रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान अक्टूबर से लेकर जून के महीने तक खुलता है। लेकिन यहां जाने का सबसे अच्छा समय सर्दियों के अक्टूबर तथा दिसंबर महीनों का माना जाता है। मानसून के दिनों में यह पार्क बंद रहता है। तथा गर्मियों में इस पार्क में बाघों को देखने की संभावना अधिक बढ़ जाती है।

रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान में शुल्क

आपको यह जानकर खुशी होगी कि राजस्थान के इस राष्ट्रीय उद्यान में प्रवेश हेतु कोई शुल्क नहीं किया जाता है। लेकिन आप यदि कोई वीडियो कैमरा अपने साथ लेकर जाते हैं तो उसका शुल्क देना पड़ता है। रणथम्भौर राष्ट्रीय पार्क के अंदर जंगल सफारी का आनंद लेने के लिए आपको गाड़ी का शुल्क देना पड़ता है। जो भारतीयों तथा विदेशियों के लिए अलग अलग है। आप सफारी गाड़ी की बुकिंग ऑनलाइन भी कर सकते हैं।

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