सुकून से छुट्टियां बिताना चाहते है, तो आएं देवभूमि के कुमाऊँ मंडल में, यहां का नजारा है बेहद ही खूबसूरत
उतराखंड को देवभूमि भी कहा जाता है। उत्तराखंड मुख्य रूप से दो भागों में विभक्त है एक गढ़वाल मंडल और दूसरा कुमाऊँ मंडल। गढ़वाल मंडल के अंतर्गत राज्य के 7 जिले तथा कुमाऊँ मंडल में 6 जिले आते हैं। कुमाऊँ मंडल में अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत, नैनीताल, पिथौरागढ़ और उधमसिंह नगर शामिल है। ये सभी जिले इतने खुबसूरत है कि एक बार देखने के बाबजूद भी आपका मन फिर से आने को करेगा।
कुमाऊँ का नाम “कूर्मांचल” से लिया गया है, जिसका मतलब है कूर्मावतार भूमि हिंदू धर्म के अनुसार भगवान विष्णु का कछुआ अवतार। प्राकृतिक दृष्टि से भी कुमाऊँ का क्षेत्र काफी ज्यादा मायने रखता है। हिमालय की खूबसूरत पहाड़ियों से लेकर आप यहां के पहाड़ी और वन्य जीवन को करीब से देख सकते हैं। ऐतिहासिक तौर में भी कुमाऊँ काफी प्रसिद्ध माना जाता है। यहां कत्यूरी राजवंश का काफी लंबे समय तक शासन रहा है।
- अल्मोड़ा
उत्तराखंड के कुमाऊँ मंडल के अंतर्गत आने वाला अल्मोड़ा अपनी संस्कृति, वन्य जीवन और पारंपरिक व्यजनों के लिए भी जाना जाता है। पहाड़ी के ऊपर बसा, तथा चंद राजाओं के अधीन रहा अल्मोड़ा, कभी राजापुर के नाम से भी जाना जाता था। चीड़ और देवदार के जंगलों से घिरे इस खूबसूरत पहाड़ी स्थल का दौरा महात्मा गांधी और स्वामी विवेकानंद भी कर चुके हैं। नैनीताल और रानीखेत जैसे पर्वतीय स्टेशनों के विपरीत अल्मोड़ा कुमाऊँनी लोगों द्वारा बसाया गया था, जबकि नैनीताल और रानीखेत अंग्रेजों द्वारा विकसित किए गए थे। अल्मोड़ा अपने कई पर्यटन गंतव्यों के साथ धार्मिक स्थलों के लिए भी जाना जाता है। अल्मोड़ा के पर्यटक स्थल चितई मंदिर, कटारमल सूर्य मंदिर, रानीखेत आदि है।
- रानीखेत
रानीखेत हिमालय के सबसे खूबसूरत भू-भाग में गिना जाता है। कहा जाता है कि कुमाऊँ की रानी पद्मिनी को ये पहाड़ी स्थल काफी पसंद था। इसलिए राजा सुधार्देव ने रानी पद्मिनी के लिए यहां एक महल का निर्माण करवाया, और उसका नाम रानीखेत रखा था। वक्त बीतता गया और रानी के लिए बनवाया गया महल धीर-धीरे अपना अस्तित्व खो बैठा, लेकिन ये पहाड़ी स्थल ज्यों का त्यों ही रहा। लंबे समय तक अज्ञात रहे इस स्थल की खोज अंग्रेजों ने की थी। अंग्रेजों ने यहां जमीनें खरीदकर इसे एक खूबसूरत हिल स्टेशन में तब्दील कर दिया। 21.76 वर्ग कि.मी. के क्षेत्रफल के साथ 1,829 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रानीखेत आज सैलानियों के बीच काफी लोकप्रिय है। रानीखेत प्राकृतिक दृष्टि से भी एक खूबसूरत गंतव्य है। वैसे तो आप यहां पर घूमने के लिये साल भर में कभी भी आ सकते हैं। लेकिन गर्मियों का मौसम आने के लिये सबसे उपर्युक्त होता है।
- नैनीताल
नैनीताल कुमाऊँ मंडल का एक जिला होने के साथ-साथ बहुत ही सुन्दर पर्यटन स्थल है। नैनीताल को सरोवर नगरी तथा झीलों की नगरी के नाम से भी जाना जाता है। नैनीताल तीन ओर से टिफिन टॉप, चाइनापीक, स्नोव्यू, शेर का डांडा आदि ऊंची–ऊंची पहाड़ियों से घिरा हुआ है। नगर के बीच “नैनीझील” भी है, जो बेहद खूबसूरत है। पर्यटक इस झील में नाव की सैर भी करते हैं। 1500 मीटर लम्बी और 510 मीटर चौड़ाई वाली यह झील 3 ओर से 7 पहाड़ियों से घिरी हुई है। ताल के दोनों तरफ सड़क बनी हुई है। ताल का ऊपरी हिस्से को “मल्लीताल” और निचले हिस्से को “तल्लीताल” के नाम से जाना जाता है। पहले नैनीताल को त्रि-ऋषि सरोवर भी कहा जाता था। नैनीताल में नैना देवी मंदिर, नैनी पीक, स्नोव्यू, नैनी झील, भवाली, भीमताल, मुक्तेश्वर, रामनगर घूम सकते है।
- पिथौरागढ़
पिथौरागढ़ जिले का प्राचीन नाम शोरघाटी था। पिथौरागढ़ को राय पिथौरा की राजधानी कहा जाता है। पिथौरागढ़ जिले में मुनस्यारी, ओम पर्वत, मिलम ग्लेशियर, हाटकालिका मंदिर, पाताल भुवनेश्वर और अस्कोट नाम के पर्यटन स्थल हैं। आप यहां आकर अपनी छुट्टियां बिता सकते है। कैलाश मानसरोवर यात्रा भी पिथौरागढ़ से होकर ही जाती है।
- बेरीनाग
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में ही नैनीताल से 160 किमी दूर बेरीनाग नाम का एक खूबसूरत हिल स्टेशन है। बेरीनाग पिथौरागढ़ के छह प्रशासनिक उपखंडों में एक है। बेरीनाग का नाम यहां पर स्थित बेरीनाग मंदिर के नाम पर पड़ा है। यह नाग देवता को समर्पित एक प्रसिद्ध मंदिर है, जो बेरीनाग की पहाड़ियों पर बसा है। बेरीनाग बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियों के अद्भुत दृश्यों को देखने के लिये एक आकर्षक जगह है, खासकर आप यहां से नंदा देवी और पंचचुली चोटियों को आसानी से देख सकते हैं। ब्रिटिश काल के दौरान यह स्थल कभी चाय के बागानों के लिए जाना जाता था। आज भी यहां उगाई जाने वाली बेरीनाग चाय की लंदन में काफी ज्यादा मांग है। प्राकृतिक खूबसूरती के लिहाज से यह एक घूमने लायक जगह है, जहां आप अपने परिवार या दोस्तों के साथ एक यादगार समय बिता सकते हैं।
- उधमसिंह नगर
कुमाऊँ के सबसे दक्षिणी भाग में एक पतली पट्टी के रूप में उधमसिंह नगर स्थित है। यह जिला 3 उपखण्डों रुद्रपुर, खटीमा और काशीपुर से मिलकर बना है। नानकमत्ता साहिब यहां का प्रमुख दर्शनीय स्थल है। यह खटीमा-पानीपत राष्ट्रीय राजमार्ग पर विशाल नानक सागर बांध के किनारे स्थित सिक्खों का पवित्र तीर्थस्थल है।
- बागेश्वर
बागेश्वर जिला सरयू और गोमती नदी के तट पर बसा हुआ है। यहां के पर्यटक स्थल बागनाथ मंदिर, कौसानी, पिण्डारी ग्लेशियर है।
- कौसानी
कौसानी को ‘भारत का स्विट्जरलैंड’ भी कहा जाता है। उत्तराखंड राज्य के कुमाऊँ मंडल का ये हिल स्टेशन बेहद खूबसूरत है। यहां की प्राकृतिक खूबसूरती से प्रभावित होकर महात्मा गांधी ने इस स्थान को ‘भारत का स्विट्जरलैंड’ कहा था। कौसानी बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियों और मनोरम दृश्यों के कारण पूरे विश्व में जाना जाता है। यहां की पहाड़ी तथा घाटियां सैलानियों को काफी ज्यादा आकर्षित करती हैं।
- चंपावत
सौंदर्य की दृष्टि से चम्पावत, उत्तराखंड के सुन्दर भू-भागों में से एक है। इस जिले का प्राचीन नाम “कुमुंकाली” है। ये चम्पावती नदी के तट पर स्थित है। ये पर्यटन स्थल बालेश्वर महादेव, क्रांतेश्वर महादेव, नागनाथ, एक हतिया नौला, वाणासुर का किला, श्यामताल, लोहाघाट, देवीधुरा, मायावती आश्रम, मीठा-रीठा साहिब और पूर्णागिरी मंदिर चम्पावत जिले के लिये प्रसिद्ध है।
- लोहाघाट
लोहाघाट उत्तराखंड का एक छोटा सा खूबसूरत हिल स्टेशन है। पहाड़ी घाटियों और देवदार के जंगलों से घिरा यह स्थान शांतिपूर्वक छुट्टियाँ बिताने के लिए एक आदर्श विकल्प है। लोहाघाट अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए भी विख्यात है। यहां से सात किमी की दूरी पर स्थित वनसुर का किला अपने अंदर कई ऐतिहासिक रहस्य छुपाए बैठा है। लोहाघाट के आसपास पर्यटकों के घूमने लायक ढेर सारी जगहें मौजूद हैं। प्रकृति प्रेमियों के साथ इतिहास में महत्व रखने वाले इस स्थान की सैर कर सकते हैं।





