
जापान व दक्षिण कोरिया हाई अलर्ट पर
एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। उत्तर कोरिया ने पूर्वी समुद्र की दिशा में कई बैलिस्टिक मिसाइलों का प्रक्षेपण किया, जिसके बाद क्षेत्रीय सुरक्षा हालात को लेकर चिंता गहरा गई है। दक्षिण कोरिया के मुताबिक ये मिसाइलें सिनपो इलाके से दागी गईं। घटना के बाद जापान ने तुरंत सतर्कता बढ़ा दी। हालांकि सभी मिसाइलें उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के बाहर गिरीं, फिर भी तीनों देश हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं। रविवार को दक्षिण कोरिया ने जानकारी दी कि उत्तर कोरिया ने अपनी पूर्वी समुद्री सीमा की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब क्षेत्र पहले से ही सुरक्षा चुनौतियों और सामरिक संतुलन के दबाव से गुजर रहा है। लगातार हो रहे मिसाइल परीक्षण न केवल पड़ोसी देशों की चिंता बढ़ा रहे हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अस्थिरता की आशंका को तेज कर रहे हैं। दक्षिण कोरियाई सेना के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अनुसार ये प्रक्षेपण उत्तर कोरिया के पूर्वी तटीय क्षेत्र सिनपो से किए गए, जो पहले भी ऐसे परीक्षणों के लिए जाना जाता रहा है। दक्षिण कोरिया ने स्थिति पर नजर रखते हुए अपनी निगरानी प्रणाली को और मजबूत कर दिया है। इस घटनाक्रम के बाद जापान में भी अलर्ट की स्थिति बन गई। रविवार सुबह मिसाइल प्रक्षेपण की खबर मिलते ही सरकार ने पूरे देश में सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने बताया कि सुबह करीब छह बजे उत्तर कोरिया की ओर से कई मिसाइलें छोड़ी गईं।
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार ये मिसाइलें जापान के EEZ से बाहर समुद्र में गिरीं, जिससे किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन एहतियात के तौर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। घटना के बाद जापान, अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच लगातार संवाद जारी है। तीनों देश मिलकर स्थिति का आकलन कर रहे हैं और यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इन परीक्षणों के पीछे उत्तर कोरिया का उद्देश्य क्या है और इससे आगे किस तरह का खतरा उत्पन्न हो सकता है। जापान सरकार ने तुरंत प्रधानमंत्री कार्यालय के संकट प्रबंधन केंद्र में आपात बैठक बुलाई, जिसमें संबंधित मंत्रालयों और एजेंसियों को निर्देश दिए गए कि वे तेजी से जानकारी एकत्र करें और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहें। उधर, दक्षिण कोरिया ने भी अपनी निगरानी और सुरक्षा तैयारियों को और सुदृढ़ कर दिया है तथा वह लगातार अमेरिका और जापान के संपर्क में बना हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह इस वर्ष उत्तर कोरिया का सातवां बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण है, जबकि अप्रैल महीने में ही यह चौथा परीक्षण बताया जा रहा है। इन गतिविधियों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के नियमों का उल्लंघन माना जाता है, क्योंकि उत्तर कोरिया को ऐसे परीक्षणों की अनुमति नहीं है। हालांकि उत्तर कोरिया इन प्रतिबंधों को खारिज करता रहा है और इसे अपने आत्मरक्षा के अधिकार से जोड़ता है।
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि उनका देश अपनी सुरक्षा के लिए परमाणु और मिसाइल क्षमता को लगातार मजबूत करता रहेगा। इसी बीच अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने भी चेतावनी दी है कि उत्तर कोरिया तेजी से अपनी परमाणु क्षमता का विस्तार कर रहा है और संभवतः उसने यूरेनियम संवर्धन के लिए नई सुविधा भी विकसित कर ली है।





