नारी शक्ति वंदन विधेयक पारित न हो पाने के लिए विपक्ष जिम्मेदार- प्रधानमंत्री

राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में मोदी ने कहा, कल संख्या बल नहीं था

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में नारी शक्ति वंदन विधेयक, 2026 के पारित न हो पाने के लिए विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उस समय सरकार के पास आवश्यक संख्याबल नहीं था, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर सरकार का संकल्प पूरी तरह अडिग है और आगे भी प्रयास जारी रहेंगे। प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण का विरोध करने वाली ताकतें देश की नारी शक्ति की भागीदारी को लंबे समय तक रोक नहीं पाएंगी। उन्होंने संकेतों में 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों का जिक्र करते हुए कहा कि भले ही इस बार संख्या बल पर्याप्त नहीं था, लेकिन महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए भाजपा और एनडीए की प्रतिबद्धता मजबूत बनी रहेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सिर्फ समय की बात है और यह संकल्प हर हाल में पूरा किया जाएगा। इससे पहले, प्रधानमंत्री ने लोकसभा में विधेयक पेश होने के दौरान विपक्ष से सहयोग की अपील भी की थी। उन्होंने कहा था कि पिछले 25-30 वर्षों में जमीनी स्तर पर महिलाओं की नेतृत्व क्षमता काफी मजबूत हुई है और अब वे केवल 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नीतिगत निर्णयों को भी प्रभावित करने की क्षमता रखती हैं। उन्होंने विपक्ष को आगाह करते हुए कहा कि ऐसे विधेयकों का विरोध करना राजनीतिक दृष्टि से नुकसानदायक साबित हो सकता है।

यदि लोकसभा के मौजूदा गणित पर नजर डालें तो एनडीए के पास कुल 293 सांसद हैं, जिनमें भाजपा के 240 सदस्य शामिल हैं। सहयोगी दलों में तेलुगु देशम पार्टी (16 सीट), जनता दल (यूनाइटेड) (12 सीट), शिवसेना (7 सीट) और लोक जनशक्ति पार्टी (5 सीट) शामिल हैं। दूसरी ओर, विपक्षी इंडिया गठबंधन के पास कुल 235 सीटें हैं, जिसमें कांग्रेस (98 सीट), समाजवादी पार्टी (37 सीट), तृणमूल कांग्रेस (28 सीट) और डीएमके (22 सीट) प्रमुख दल हैं। विधेयक पर मतदान के दौरान कुल 528 सांसदों ने भाग लिया, जिनमें से 298 ने समर्थन और 230 ने विरोध में वोट दिया। हालांकि, संविधान संशोधन विधेयक होने के कारण इसे पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत, यानी 352 मतों की आवश्यकता थी, जो प्राप्त नहीं हो सकी। इसी वजह से यह विधेयक पारित नहीं हो पाया।

विधेयक के प्रस्तावों के अनुसार, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद 2029 के आम चुनावों से पहले महिला आरक्षण लागू करने की योजना थी। इसके तहत लोकसभा की सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक करने का प्रावधान था, ताकि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। इसके साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव शामिल था।

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