कारगिल युद्ध में पाकिस्तान के छक्के छुड़ाने वाले भारतीय सैनिकों की बहादुरी की कहानियां

‘कारगिल युद्ध’ 1999 में होने वाला भारत और पाकिस्तान के बीच एक ऐसा युद्ध था, जो भारत के सुनहरे इतिहास में हमेशा अंकित रहेगा। कश्मीर के कारगिल और उसके पास के इलाकों में एल ओ सी के निकट हुए कारगिल युद्ध को भारत में ‘ऑपरेशन विजय’ के नाम से भी जाना जाता है।

कारगिल युद्ध पाकिस्तानी सेना और कश्मीरी उग्रवादियों द्वारा भारत की नियंत्रण रेखा पार कर भारतीय ज़मीन पर कब्जा जमाने का अंजाम था। वहीं पाकिस्तान का कहना था कि युद्ध में लड़ने वाले कश्मीरी उग्रवादी थे। जबकि दस्तावेजों और अन्य सुत्रों का कहना था, कि युद्ध मे लड़ने वालों मे पाकिस्तानी सेना भी पुरी तरह शामिल थी। सुत्रों के अनुसार इस युद्ध में करीब 30000 पाकिस्तानी सेना के जवान व 5000 घुसपैठिये शामिल थे। यह अंतराष्ट्रीय सहयोग, भारतीय सेना और वायुसेना की कड़ी मेहनत का ही नतीजा था कि पाकिस्तानी  सेना अंत मे सीमा पार कर वापस जाने को मजबूर हो गयी। यह युद्ध दोनों देशों के लिए कठिन था क्योंकि यह युद्ध ऊँचाई वाले इलाके मे हुआ था, जहां हवा का दबाव भी बेहद कम रहता है। इस युद्ध मे भारत के करीब 527 सैनिक मारे गए थे। और 1363 घायल हुए थे। इस युद्ध मे भारत का 1 लड़ाकू विमान और 1 हैलिकॉप्टर मार गिराया गया था। वहीं 1 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त भी हो गया था।

इस युद्ध का पाकिस्तान को अंजाम झेलना पड़ा, पाकिस्तान की राजनैतिक और आर्थिक व्यवस्था डगमगा गयी। नवाज शरीफ़ की सरकार को बदलकर परवेज़ मुशर्रफ़ को राष्ट्रपति बना दिया गया और मुशर्ऱफ की सरकार आ गयी। वहीं इस युद्ध का सकारात्मक असर देखने को मिला भारत में। भारत में देशभक्ति बढ़ गयी और अर्थव्यवस्था में भी सुधार आ गया। देश रक्षा के क्षेत्र में सरकार ने कई अहम सुधार किए।

26 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध में भारत ने विजय हासिल की थी। इस उपलक्ष्य मे भारत मे इस दिन को विजय दिवस के रुप में मनाया जाता है। यह युद्ध करीब 2 माह तक चला। भारतीय सेना के साहस की वजह से इस युद्ध ने देशवासियों के दिल में जगह भी बना ली। यह युद्ध 18 हजार फीट की ऊँचाई पर लड़ा गया था। पाकिस्तान ने मई 1999 में 5000 घुसपैठियों के कब्जा जमाने के साथ ही यह युद्ध शुरु कर दिया था। भारत ने इस युद्ध में मिग-27 और मिग-29 का प्रयोग किया था। भारत ने इस युद्ध में बमो और मिसाइल आर-77 का भी इस्तमाल किया था। युद्ध में करीब 2.5 लाख गोले दागे गए, और 5000 बम फेंकें गए थे।

सुत्रों के अनुसार इस युद्ध की शुरुआत 3 मई 1999 को तब शुरु हुई जब एक चरवाहे ने पाकिस्तानी सेना द्वारा घुसपैठ की जानकारी भारतीय सेना को दी थी। फिर 5 मई को भारतीय सेना की पैट्रोलिंग के वक्त पाकिस्तानी सेना ने उन्हें पकड़ कर 5 सैनिकों की हत्या कर दी। 9 मई को पाकिस्तानी सेना द्वारा भारतीय सेना के गोला बारुद स्टोर को नष्ट कर दिया गया था। 10 मई को घुसपैठियों को द्रास, काकसर, और मुश्कोह मे पहली बार देखा गया था। 26 मई को भारतीय सेना को कार्यवाही के आदेश दिये गए। 27 मई को भारतीय सेना ने फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता को बंदी बना लिया था, और 28 मई को मिग-27 को पाकिस्तानी सेना ने मार गिराया, तथा 4 भारतीय जवान मारे दिए थे।1 जून को पाकिस्तान ने एन.एच. ए-1 पर बमबारी की थी। 5 जून को भारतीय सेना ने दस्तावेज पेश किये जिसमें पाकिस्तान की युद्ध में भुमिका के बारें मे जानकारी दी गयी थी। 9 जून को भारतीय सेना ने बटालिक सेक्टर में अहम जगहों पर कब्जा जमा लिया। 29 जून को भारतीय सेना ने दो जगहों पर कब्जा जमाया। 4 जुलाई को टाइगर हिल में 11 घंटे की लड़ाई के बाद कब्जा कर लिया गया था। 5 जुलाई को भारतीय सेना ने द्रास को अपने काबू में कर लिया था, और पाकिस्तानी सेना ने अपनी सैन्य कार्यवाही रोक ली थी। 7 जुलाई  को भारतीय सेना ने बटालिक जुबर हाईट्स पर कब्जा कर लिया था। 14 जुलाई को अटल बिहारी वाजपायी ने ऑपरेशन विजय को सफल घोषित कर दिया था। 26 जुलाई को कारगिल युद्ध को औपचारिक तौर पर खत्म कर दिया गया था।

इस युद्ध के वीरों के सम्मान में गैलैंट्री पुरस्कार दिए गए थे। ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव को परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। गोरखा राइफल्स के लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय को परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। जम्मू-कश्मीर राइफल्स के कैप्टेन विक्रम बत्रा और राइफल मैन संजय कुमार,को भी परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। कैप्टेन अनुज नायर, मेजर राजेश सिंह अधिकारी को महावीरचक्र से सम्मानित किया गया था। राजपुताना राइफल्स के कैप्टन हनीफुद्दीन, मेजर मरियप्पन सरावन, एयरफोर्स के स्क्वाड्रन लीडर अजय अहुजा, हवलदार चुन्नीलाल, और राजपुताना राइफल्स के कर्नल मगोद बसप्पा को वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। तथा ऐसे कितने ही सम्मान कारगिल युद्ध में शामिल जवानों को दिये गए थे।

कारगिल युद्ध  में भारत ने अपने कितने ही शूर वीर खोए हैं। कारगिल युद्ध भारत के इतिहास का एक ऐसा पन्ना है, जिसमें भारत ने अपने वीरों का बलिदान देकर के विजय हासिल की थी, और अपने विरोधियों को मुँह तोड़ जवाब दिया था। कारगिल युद्ध भारतीय सेना की सबसे बड़ी उपलब्धियों को दिखाता हैं। कारगिल युद्ध केवल एक युद्ध ही नहीं बल्कि एक कहानी है। एक ऐसी कहानी जिसके हीरो हैं, हमारे भारतीय जवान जिन्होनें अपनी जान की बाज़ी लगाकर हमारे देश की रक्षा की और इस देश का मान बढ़ाया। हमारी भारतीय सेना की ताकत को दर्शाने के लिए एक कारगिल युद्ध ही काफी रहा। कारगिल युद्ध ने भारत की ताकत को बढ़ाने में एक बेहद अहम योगदान दिया। कारगिल युद्ध के बाद ही रक्षा के क्षेत्र में बदलाव किए गए और भारतीय सेना की क्षमता को बढ़ाया गया। कारगिल युद्ध के बाद भारत की आर्थिक स्थिति मे सुधार देखा गया। कारगिल युद्ध हमारी सेना की क्षमता का एक सूचक है जो अन्य देशों के लिए एक चेतावनी भी है, कि भारत पर किसी भी तरह की घुसपैठ बर्दाश्त नहीं की जा सकती। कारगिल युद्ध भारतीय जाबाज़ जवानों का जज्बा है, जो खुद को मिटाकर देश को बचाते हैं। कारगिल युद्ध भारतीय सेना की कड़ी मेहनत का नतीजा है, जिसमें सेना ने इतनी कठिन परिस्थितियों में भी पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार भगाया। कारगिल युद्ध उन शूरवीरों की कथा है, जो देश के लिए कुर्बान हो गए और अपने पीछे भारत को सीख दे गए, कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हो, जीत उन्हीं की होती है जिनके अंदर विजयी होने की चाह होती हैं। कारगिल युद्ध हमारे देश को मजबूत बनाने वाली एक ऐसी घटना थी जिसने देश को जगा दिया। कारगिल युद्ध भारतीय सेना की बहादुरी को बयां करता है। यह दिखाता है कि हमारे देश के जवान विश्व की किसी भी सैन्य शक्ति के सामने सीना तान कर खड़े होने की ताकत रखतें हैं। ऐसी बलशाली और साहसी सैन्य शक्ति को और कारगिल युद्ध में मारे गए हमारे भारतीय जवानों को हम शत शत नमन करतें हैं।

‘कारगिल युद्ध’ 1999 में होने वाला भारत और पाकिस्तान के बीच एक ऐसा युद्ध था, जो भारत के सुनहरे इतिहास में हमेशा अंकित रहेगा। कश्मीर के कारगिल और उसके पास के इलाकों में एल ओ सी के निकट हुए कारगिल युद्ध को भारत में ‘ऑपरेशन विजय’ के नाम से भी जाना जाता है।

कारगिल युद्ध पाकिस्तानी सेना और कश्मीरी उग्रवादियों द्वारा भारत की नियंत्रण रेखा पार कर भारतीय ज़मीन पर कब्जा जमाने का अंजाम था। वहीं पाकिस्तान का कहना था कि युद्ध में लड़ने वाले कश्मीरी उग्रवादी थे। जबकि दस्तावेजों और अन्य सुत्रों का कहना था, कि युद्ध मे लड़ने वालों मे पाकिस्तानी सेना भी पुरी तरह शामिल थी। सुत्रों के अनुसार इस युद्ध में करीब 30000 पाकिस्तानी सेना के जवान व 5000 घुसपैठिये शामिल थे। यह अंतराष्ट्रीय सहयोग, भारतीय सेना और वायुसेना की कड़ी मेहनत का ही नतीजा था कि पाकिस्तानी  सेना अंत मे सीमा पार कर वापस जाने को मजबूर हो गयी। यह युद्ध दोनों देशों के लिए कठिन था क्योंकि यह युद्ध ऊँचाई वाले इलाके मे हुआ था, जहां हवा का दबाव भी बेहद कम रहता है। इस युद्ध मे भारत के करीब 527 सैनिक मारे गए थे। और 1363 घायल हुए थे। इस युद्ध मे भारत का 1 लड़ाकू विमान और 1 हैलिकॉप्टर मार गिराया गया था। वहीं 1 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त भी हो गया था।

इस युद्ध का पाकिस्तान को अंजाम झेलना पड़ा, पाकिस्तान की राजनैतिक और आर्थिक व्यवस्था डगमगा गयी। नवाज शरीफ़ की सरकार को बदलकर परवेज़ मुशर्रफ़ को राष्ट्रपति बना दिया गया और मुशर्ऱफ की सरकार आ गयी। वहीं इस युद्ध का सकारात्मक असर देखने को मिला भारत में। भारत में देशभक्ति बढ़ गयी और अर्थव्यवस्था में भी सुधार आ गया। देश रक्षा के क्षेत्र में सरकार ने कई अहम सुधार किए।

26 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध में भारत ने विजय हासिल की थी। इस उपलक्ष्य मे भारत मे इस दिन को विजय दिवस के रुप में मनाया जाता है। यह युद्ध करीब 2 माह तक चला। भारतीय सेना के साहस की वजह से इस युद्ध ने देशवासियों के दिल में जगह भी बना ली। यह युद्ध 18 हजार फीट की ऊँचाई पर लड़ा गया था। पाकिस्तान ने मई 1999 में 5000 घुसपैठियों के कब्जा जमाने के साथ ही यह युद्ध शुरु कर दिया था। भारत ने इस युद्ध में मिग-27 और मिग-29 का प्रयोग किया था। भारत ने इस युद्ध में बमो और मिसाइल आर-77 का भी इस्तमाल किया था। युद्ध में करीब 2.5 लाख गोले दागे गए, और 5000 बम फेंकें गए थे।

सुत्रों के अनुसार इस युद्ध की शुरुआत 3 मई 1999 को तब शुरु हुई जब एक चरवाहे ने पाकिस्तानी सेना द्वारा घुसपैठ की जानकारी भारतीय सेना को दी थी। फिर 5 मई को भारतीय सेना की पैट्रोलिंग के वक्त पाकिस्तानी सेना ने उन्हें पकड़ कर 5 सैनिकों की हत्या कर दी। 9 मई को पाकिस्तानी सेना द्वारा भारतीय सेना के गोला बारुद स्टोर को नष्ट कर दिया गया था। 10 मई को घुसपैठियों को द्रास, काकसर, और मुश्कोह मे पहली बार देखा गया था। 26 मई को भारतीय सेना को कार्यवाही के आदेश दिये गए। 27 मई को भारतीय सेना ने फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता को बंदी बना लिया था, और 28 मई को मिग-27 को पाकिस्तानी सेना ने मार गिराया, तथा 4 भारतीय जवान मारे दिए थे।1 जून को पाकिस्तान ने एन.एच. ए-1 पर बमबारी की थी। 5 जून को भारतीय सेना ने दस्तावेज पेश किये जिसमें पाकिस्तान की युद्ध में भुमिका के बारें मे जानकारी दी गयी थी। 9 जून को भारतीय सेना ने बटालिक सेक्टर में अहम जगहों पर कब्जा जमा लिया। 29 जून को भारतीय सेना ने दो जगहों पर कब्जा जमाया। 4 जुलाई को टाइगर हिल में 11 घंटे की लड़ाई के बाद कब्जा कर लिया गया था। 5 जुलाई को भारतीय सेना ने द्रास को अपने काबू में कर लिया था, और पाकिस्तानी सेना ने अपनी सैन्य कार्यवाही रोक ली थी। 7 जुलाई  को भारतीय सेना ने बटालिक जुबर हाईट्स पर कब्जा कर लिया था। 14 जुलाई को अटल बिहारी वाजपायी ने ऑपरेशन विजय को सफल घोषित कर दिया था। 26 जुलाई को कारगिल युद्ध को औपचारिक तौर पर खत्म कर दिया गया था।

इस युद्ध के वीरों के सम्मान में गैलैंट्री पुरस्कार दिए गए थे। ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव को परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। गोरखा राइफल्स के लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय को परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। जम्मू-कश्मीर राइफल्स के कैप्टेन विक्रम बत्रा और राइफल मैन संजय कुमार,को भी परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। कैप्टेन अनुज नायर, मेजर राजेश सिंह अधिकारी को महावीरचक्र से सम्मानित किया गया था। राजपुताना राइफल्स के कैप्टन हनीफुद्दीन, मेजर मरियप्पन सरावन, एयरफोर्स के स्क्वाड्रन लीडर अजय अहुजा, हवलदार चुन्नीलाल, और राजपुताना राइफल्स के कर्नल मगोद बसप्पा को वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। तथा ऐसे कितने ही सम्मान कारगिल युद्ध में शामिल जवानों को दिये गए थे।

कारगिल युद्ध  में भारत ने अपने कितने ही शूर वीर खोए हैं। कारगिल युद्ध भारत के इतिहास का एक ऐसा पन्ना है, जिसमें भारत ने अपने वीरों का बलिदान देकर के विजय हासिल की थी, और अपने विरोधियों को मुँह तोड़ जवाब दिया था। कारगिल युद्ध भारतीय सेना की सबसे बड़ी उपलब्धियों को दिखाता हैं। कारगिल युद्ध केवल एक युद्ध ही नहीं बल्कि एक कहानी है। एक ऐसी कहानी जिसके हीरो हैं, हमारे भारतीय जवान जिन्होनें अपनी जान की बाज़ी लगाकर हमारे देश की रक्षा की और इस देश का मान बढ़ाया। हमारी भारतीय सेना की ताकत को दर्शाने के लिए एक कारगिल युद्ध ही काफी रहा। कारगिल युद्ध ने भारत की ताकत को बढ़ाने में एक बेहद अहम योगदान दिया। कारगिल युद्ध के बाद ही रक्षा के क्षेत्र में बदलाव किए गए और भारतीय सेना की क्षमता को बढ़ाया गया। कारगिल युद्ध के बाद भारत की आर्थिक स्थिति मे सुधार देखा गया। कारगिल युद्ध हमारी सेना की क्षमता का एक सूचक है जो अन्य देशों के लिए एक चेतावनी भी है, कि भारत पर किसी भी तरह की घुसपैठ बर्दाश्त नहीं की जा सकती। कारगिल युद्ध भारतीय जाबाज़ जवानों का जज्बा है, जो खुद को मिटाकर देश को बचाते हैं। कारगिल युद्ध भारतीय सेना की कड़ी मेहनत का नतीजा है, जिसमें सेना ने इतनी कठिन परिस्थितियों में भी पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार भगाया। कारगिल युद्ध उन शूरवीरों की कथा है, जो देश के लिए कुर्बान हो गए और अपने पीछे भारत को सीख दे गए, कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हो, जीत उन्हीं की होती है जिनके अंदर विजयी होने की चाह होती हैं। कारगिल युद्ध हमारे देश को मजबूत बनाने वाली एक ऐसी घटना थी जिसने देश को जगा दिया। कारगिल युद्ध भारतीय सेना की बहादुरी को बयां करता है। यह दिखाता है कि हमारे देश के जवान विश्व की किसी भी सैन्य शक्ति के सामने सीना तान कर खड़े होने की ताकत रखतें हैं। ऐसी बलशाली और साहसी सैन्य शक्ति को और कारगिल युद्ध में मारे गए हमारे भारतीय जवानों को हम शत शत नमन करतें हैं।

विशिखा मीडिया

विशिखा ने जनवरी 2019 से राजस्थान की राजधानी जयपुर से हिंदी मासिक पत्रिका के रूप में अपनी नींव रखी। राजस्थान में सफलता का परचम फहराने के बाद विशिखा प्रबंधन ने अप्रैल 2021 से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मासिक पत्रिका के रूप में अपना प्रकाशन आरम्भ करने का निर्णय लिया। इसी बीच लोगों की प्रतिक्रियाएं आईं कि विशिखा का प्रकाशन दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी होना चाहिये। पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए विशिखा प्रबंधन ने 1 जनवरी 2022 से जयपुर से दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी अपना प्रकाशन आरम्भ किया। विशिखा में प्रमुख रूप से राजनैतिक गतिविधियों सहित, कला, समाज, पर्यटन, एवं अन्य विषयों से संबंधित विस्तृत आलेख प्रकाशित होते हैं। विशिखा पत्रिका ने अपने विस्तृत आलेखों और दैनिक न्यूज़ विश्लेषण के माध्यम से अपने पाठकों को जानकारी और ज्ञान की दुनिया में ले जाने का महत्वपूर्ण काम किया है। अपनी सटीक खबरों, विस्तृत रिपोर्टों और विशेष विषयों पर आधारित लेखों के साथ, विशिखा ने लगातार अपनी विश्वसनीयता बनायी हुई है। विशिखा मासिक पत्रिका की खबरों की गुणवत्ता, नवीनता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए इस पत्रिका ने अपने पाठकों का दिल जीता है। यह पत्रिका न केवल जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि लोगों के बीच अपने विचारों के आदान प्रदान के लिए एक मंच भी उपलब्ध करती है। इसके लेखक, संपादक और टीम का प्रयास निरंतर यह होता है कि पाठकों को एक अच्छा अनुभव देने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ-साथ समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करें। विशिखा का लक्ष्य आपको विभिन्न विषयों पर अद्भुत लेखों से परिचित कराना है। पत्रिका के माध्यम से हम लेखकों, संगठनों, एवं समाज के प्रतिष्ठित और सामान्य लोगों को उनकी रचनात्मक योग्यताओं के आधार पर साझा करने का प्रयास करना है। पत्रिका टीम का मूल मंत्र है- रचनात्मकता, नैतिकता और उच्चतम गुणवत्ता। विशिखा हिंदी मासिक पत्रिका है जो 2019 में शुरू हुई थी। वर्तमान में यह राजस्थान और उत्तराखंड से प्रकाशित की जाती है। इसमें विभिन्न विषयों पर लेख शामिल होते हैं जैसे कि करंट अफेयर्स, साहित्य, महिलाएं, यात्रा और अधिक। हमारी पत्रिका उन लोगों के लिए है जो ज्ञान और सूचना की तलाश में होते हैं और उन्हें उन विषयों से रुबरु कराने का एक मंच प्रदान करती हैं।

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