रामलाल की मूर्ति बाल स्वरूप में नहीं-दिग्विजय सिंह

राम मंदिर में विराजमान होने वाली श्री रामलल्ला की मूर्ति पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की टिप्पणी के बाद, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने कहा कि वह ‘अंधेरे में तीर चला रहे हैं’। दिग्विजय सिंह ने अयोध्या राम मंदिर में “प्राण प्रतिष्ठा” समारोह से पहले यह कहकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है कि मंदिर में विराजमान होने वाली रामलला की मूर्ति किसी बच्चे की तरह नहीं दिखती है। राम मंदिर आंदोलन में 9 नवंबर 1989 को पहली आधारशिला रखने वाले बिहार मूल के कामेश्वर चौपाल ने कहा, “दिग्विजय सिंह को महत्व न दें। वह ऐसे बोलते हैं, जिसका कोई मतलब नहीं निकलता। उन्होंने कहा, “दिग्विजय ऐसे ही हवा में तीर मरते रहते हैं। बता दें कि 22 जनवरी को अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले, भगवान राम की मूर्ति को मंदिर के गर्भगृह के अंदर रखवा दिया गया था। कपड़े से ढकी हुई 51 इंच लंबी मूर्ति की पहली तस्वीर गर्भगृह में स्थापना समारोह के दौरान सामने आई थी। ‘राम लला’ की मूर्ति की नक्काशी कर्नाटक के प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज ने की थी। 51 इंच लंबी मूर्ति का वजन 1.5 टन है। मूर्ति में भगवान राम को पांच साल के बच्चे के रूप में चित्रित किया गया है, जो उसी पत्थर से बने कमल पर खड़ा है।

22 जनवरी को होने वाले राम मंदिर के ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह की तैयारी के लिए अयोध्या शहर को फूलों से सजाया गया है। प्राण प्रतिष्ठा समारोह 22 जनवरी को आयोजित किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘प्राण प्रतिष्ठा’ के उपलक्ष्य में अनुष्ठान करेंगे। लक्ष्मीकांत दीक्षित के नेतृत्व में पुजारियों की एक टीम मुख्य अनुष्ठान का नेतृत्व करेगी। समारोह में कई मशहूर हस्तियों को भी आमंत्रित किया गया है। दिग्विजय ने आगे कहा कि मेरी संवेदनाएं मंदिर निर्माण आंदोलन में शहीद हुए स्वयंसेवकों के परिवार के साथ हैं। क्या उन्हें आमंत्रित किया गया है?

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