आइए जानते हैं कि यूनेस्को का मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर क्या है? भारत की किन-किन कलाकृतियों को इसमें धरोहर के तौर पर शामिल किया गया? इसके अलावा भारत से जुड़ी कौन-कौन सी धरोहरों को इस लिस्ट में शामिल किया जा चुका है?
भरतमुनि द्वारा रचित प्राचीन ग्रंथ ‘नाट्यशास्त्र’ और भारतीय संस्कृति का मूल स्तंभ ‘भगवद गीता’ अब विश्व धरोहर के तौर पर और अधिक मान्यता प्राप्त कर चुके हैं। इन्हें यूनेस्को की ‘मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर’ में शामिल कर लिया गया है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि से पूरे देश में खुशी की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने इस फैसले का स्वागत किया है।
यूनेस्को की ‘मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड’ लिस्ट क्या है?
यूनेस्को (यूनाइटेड नेशंस एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गनाइजेशन) एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देती है।
‘मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर’ यूनेस्को की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य दुनिया भर के महत्वपूर्ण दस्तावेजों, पांडुलिपियों और अभिलेखों को संरक्षित करना और उनकी वैश्विक मान्यता सुनिश्चित करना है। यह रजिस्टर यह भी सुनिश्चित करता है कि इन धरोहरों तक सबकी पहुंच हो और उन्हें भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखा जाए।
इस पहल के माध्यम से दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्ता रखने वाले अभिलेखों को संरक्षित किया जाता है, साथ ही इन पर शोध और अध्ययन को बढ़ावा दिया जाता है। यह लिस्ट सरकारों, शिक्षाविदों और आम जनता को दस्तावेजी धरोहरों के महत्व और संरक्षण की आवश्यकता के प्रति जागरूक करने का कार्य भी करती है।

जानिए भारत की कौन सी दो नई धरोहरें जोड़ी गईं हैं
- भरतमुनि का नाट्यशास्त्र
भारत के प्राचीनतम ग्रंथों में से एक, नाट्यशास्त्र, रंगमंच, नाटक, नृत्य, संगीत और साहित्य की गहराई से जानकारी देने वाला ग्रंथ है। यह सिर्फ नाट्यकला तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय काव्यशास्त्र, रस सिद्धांत, अलंकार आदि का भी विशद वर्णन इसमें मिलता है।
भरतमुनि द्वारा रचित यह ग्रंथ भारतीय नाट्यकला की आधारशिला माना जाता है और इसकी शिक्षाएं आज भी रंगमंच और नृत्य कला में मार्गदर्शक की भूमिका निभा रही हैं। - भगवद गीता
श्रीमद्भगवद्गीता भारतीय दर्शन, आत्मा और कर्तव्य के गूढ़ सिद्धांतों को समझाने वाला कालजयी ग्रंथ है। महाभारत के भीषण युद्ध में अर्जुन और श्रीकृष्ण के संवाद के रूप में प्रस्तुत यह ग्रंथ केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि दार्शनिक और नैतिक मार्गदर्शन देने वाला भी है। यह मानव जीवन की गहराई, कर्मयोग, भक्ति और ज्ञान के उच्चतम विचारों को समेटे हुए है।
जानिए अब तक भारत से कौन-कौन सी धरोहरें इस लिस्ट में शामिल हो चुकी हैं?
2023 तक यूनेस्को की मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड लिस्ट में दुनिया भर से कुल 494 दस्तावेजी धरोहरें शामिल की जा चुकी थीं। 2024 में अलग-अलग देशों से क्षेत्रीय स्तर पर कई नई एंट्रीज जुड़ीं।
भारत से तीन नई धरोहरें एशिया-प्रशांत क्षेत्र से चुनी गईं। 2025 में जब 74 और नाम जोड़े गए, तो कुल संख्या 568 तक पहुँच गई।




