तमिलनाडु सरकार को सुप्रीम कोर्ट की नसीहत

कहा, ED की मदद करने में कोई खराबी नहीं

तमिलनाडु में कथित अवैध रेत खनन घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस पंकज मिथल की बेंच ने ईडी (ED) बनाम तमिलनाडु सरकार मामले की सुनवाई की। इस दौरान दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। ईडी ने हाई कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य मशीनरी को मदद करने के लिए कहा जाता है, तो इससे क्या नुकसान हुआ है? तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछली बार पूछा था कि राज्य सरकार हाई कोर्ट के समक्ष याचिका कैसे दायर कर सकती है? पीठ ने कहा, अगर जिलाधिकारी से कुछ पूछा जाता है तो राज्य सरकार को क्या परेशानी है? यदि व्यक्तिगत हैसियत से जिलाधिकारी को परेशानी थी तो वह याचिका दायर कर सकते थे।

जस्टिस बेला त्रिवेदी ने कहा राज्य कैसे अपील दायर कर सकता है? यदि कलेक्टर व्यथित है तो कलेक्टर को अपील दायर करनी चाहिए थी। तमिलनाडु सरकार के लिए सिब्बल ने कहा कि क्या कलेक्टर राज्य का हिस्सा नहीं हैं? राज्य कलेक्टरों की ओर से फाइल कर सकता है। जस्टिस त्रिवेदी ने कहा, अनुच्छेद 256 के तहत राज्य को संसद द्वारा बनाए गए कानून का पालन करना होगा। इस पर सिब्बल ने कहा पीएमएलए कई मामलों में लागू नहीं होता, क्योंकि ये अपराध अनुसूचित अपराध नहीं हैं। खनन अनुसूचित अपराध नहीं है। सिब्बल ने कहा कि पीएमएलए कई मामलों में लागू नहीं होता, क्योंकि ये अपराध अनुसूचित अपराध नहीं हैं। खनन अनुसूचित अपराध नहीं है, ईडी के पास हमारे कलेक्टरों से रिकॉर्ड पेश करने के लिए कहने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है। पीएमएलए के तहत उनका कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है। उस लीज के लिए न तो कोई जांच हुई है और न ही कोई एफआईआर हुई। पीएमएलए के किस प्रावधान के तहत उन्होंने ऐसी जानकारी मांगी है? कलेक्टर भी राज्य सरकार का हिस्सा हैं।

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