ईपीएफओ ने अपने खाता धारकों के लिए एडवांस की लिमिट एक लाख की

ईपीएफओ ने अपने करोड़ों सदस्यों के जीवनयापन को सुगम बनाने के लिए अब शिक्षा, विवाह और आवास के उद्देश्यों के लिए अग्रिम राशि के दावों का ऑटो-मोड से निपटान शुरू किया है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने अपने 27.74 करोड़ खाता धारकों को बड़ी राहत प्रदान की है। ईपीएफओ ने ऑटो क्लेम सुविधा का दायरा बढ़ा दिया है। पहले ऑटो क्लेम सुविधा, बीमारी के लिए अग्रिम राशि के उद्देश्य से शुरू की गई थी। अब शिक्षा, विवाह और आवास के मकसद के लिए भी अग्रिम राशि के दावों का ऑटो-मोड निपटान प्रारंभ किया गया है। ईपीएफओ ने ‘ईज ऑफ लिविंग’ के तहत ऑटो-मोड सेवा को विस्तार दिया है। इसकी मदद से दावों का निपटान अब फटाफट होगा। ईपीएफओ के मुताबिक, इस नए सेवा विस्तार का फायदा लाखों सदस्यों को पहुंचेगा। अभी तक ऑटो-मोड निपटान की सुविधा, बीमारी के लिए अग्रिम राशि के मामलों में ही प्रदान की गई थी। लोगों को इसका फायदा भी मिल रहा था। उदाहरण के लिए, ईपीएफओ सदस्य अनिरुद्ध प्रसाद ने 9 मई को अनुच्छेद 68जे के तहत बीमारी के लिए अग्रिम राशि लेने का आवेदन किया था। उनके अग्रिम राशि के दावे का निपटान महज तीन दिन के भीतर हो गया। 11 मई को 92,143 रुपये की राशि का निपटान कर दिया गया।
ईपीएफओ ने अपने करोड़ों सदस्यों के जीवनयापन को सुगम बनाने के लिए अब शिक्षा, विवाह और आवास के उद्देश्यों के लिए अग्रिम राशि के दावों का ऑटो-मोड से निपटान शुरू किया है। ईपीएफओ ने जो स्वत: दावा समाधान या ऑटो क्लेम सॉल्यूशन शुरू किया है, उसके तहत दावे को बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के आईटी सिस्टम द्वारा स्वचालित रूप से संसाधित या प्रोसेस किया जाता है। बता दें कि दावा निपटान का ऑटो मोड अप्रैल, 2020 में बीमारी के लिए अग्रिम राशि के उद्देश्य से शुरू किया गया था। अब इसकी सीमा बढ़ाकर 1,00,000 रुपये तक कर दी गई है। चालू वर्ष के दौरान, लगभग 2.25 करोड़ सदस्यों को इस सुविधा का लाभ मिलने की आशा है। वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान, ईपीएफओ ने लगभग 4.45 करोड़ दावों का निपटारा किया, जिनमें से 60 प्रतिशत से अधिक (2.84 करोड़) दावे अग्रिम दावे थे। वर्ष के दौरान निपटाए गए कुल अग्रिम दावों में से, लगभग 89.52 लाख दावों का निपटान ऑटो-मोड का उपयोग करके किया गया।
‘ईज ऑफ लिविंग’ यानी जीवनयापन में आसानी” को सुगम बनाने के लिए ऑटो क्लेम समाधान अब ईपीएफ योजना, 1952 के अनुच्छेद 68के (शिक्षा और विवाह के उद्देश्य) और 68बी (आवास के उद्देश्य) के तहत सभी दावों के लिए बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा, इसकी सीमा को 50,000 रुपये से बढ़ा कर दोगुना 1,00,000 रुपये कर दिया गया है। इस कदम से ईपीएफओ के करोड़ों सदस्यों को लाभ पहुंचने की उम्मीद है।
स्वत:-निपटान या ऑटो-सेटलमेंट के तहत पूरी प्रक्रिया मानवीय हस्तक्षेप के बिना आईटी प्रणाली द्वारा संचालित है। केवाईसी, पात्रता और बैंक सत्यापन के साथ कोई भी दावा आईटी टूल द्वारा स्वचालित रूप से भुगतान के लिए संसाधित या प्रोसेस किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप, ऐसे अग्रिमों के लिए दावा निपटान की अवधि 10 दिन से घटकर 3-4 दिन के भीतर रह जाती है। सिस्टम द्वारा विधिमान्य नहीं होने वाले दावों को लौटाया या अस्वीकार नहीं किया जाता। इसके बाद उन्हें दूसरे स्तर की जांच और अनुमोदन के लिए भेजा जाता है। ऑटो दावों के दायरे का विस्तार आवास, विवाह और शिक्षा उद्देश्यों के साथ-साथ उसमें वृद्धि से सीधे तौर पर अनेक सदस्यों को कम से कम संभावित अवधि के भीतर अपने धन का लाभ उठाने में मदद मिलेगी, जिससे उन्हें अपनी शिक्षा, विवाह, या आवास संबंधी आवश्यकताएं तत्काल पूरी करने में पर्याप्त सहायता मिलेगी। इसे 6 मई 2024 को पूरे भारत में शुरू किया गया और तब से ईपीएफओ ने त्वरित सेवा प्रदान करने वाली इस पहल के माध्यम से 45.95 करोड़ रुपये के लिए 13,011 मामलों को मंजूरी दी है। इस मामले के मुख्य आरोपी अनूप माझी ने आसनसोल एक सीबीआई अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। बता दें कि यह आरोपी माझी उर्फ लाला कुछ समय से फरार था। सीबीआई ने वर्ष 2020 में कोयला तस्करी घोटाले की जांच शुरू की थी। 21 मई को सीबीआई आरोप पत्र दाखिल करने वाली है। इस घोटाले के सिलिसले में लाला के साथी माने जाने वाले गुरुपद माझी सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसमें से तीन को जमानत मिल गई है, जबकि गुरुपद तिहाड़ जेल में बंद है।

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