सीडब्ल्यूसी के अनुसार, 150 जलाशयों में से 20 पनबिजली परियोजनाओं के काम आते हैं, जिनकी कुल भंडारण क्षमता 35.30 अरब क्यूबिक मीटर है।
भीषण गर्मी झेलने के बाद पूरा देश भारी बारिश का सामना कर रहा है। इस बीच, केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) ने एक अच्छी खबर दी। दरअसल, देश के मुख्य जलाशयों का जल स्तर पिछले साल सितंबर के बाद पहली बार बढ़ा है। हालांकि, फिर भी जल आयोग चिंता में है क्योंकि मामूली वृद्धि हुई है। आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, पिछले सप्ताह की तुलना में दो प्रतिशत की मामूली वृद्धि के बावजूद, यह पिछले साल 29 सितंबर को जारी बुलेटिन के बाद से दर्ज की गई लगातार सप्ताह-दर-सप्ताह गिरावट को दर्शाता है। उस समय भंडारण क्षमता 73 प्रतिशत थी। हालांकि, भारी बारिश के कारण सुधार होता दिख रहा है। भारत के 150 जलाशयों की निगरानी करने वाले सीडब्ल्यूसी ने चार जुलाई को नई जानकारी साझा की है। उसके अनुसार, 150 जलाशयों में से 20 पनबिजली परियोजनाओं के काम आते हैं, जिनकी कुल भंडारण क्षमता 35.30 अरब क्यूबिक मीटर (बीसीएम) है। साथ ही यह भी कहा गया कि इन जलाशयों में उपलब्ध भंडारण क्षमता 39.729 बीसीएम है, जो उनकी कुल भंडारण क्षमता का 22 प्रतिशत है। इसकी तुलना में, पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान उपलब्ध भंडारण 44.06 बीसीएम था, जबकि सामान्य भंडारण स्तर के साथ 50.422 बीसीएम था। सीडब्ल्यूसी ने कहा कि इससे संकेत मिलता है कि मौजूदा भंडारण पिछले साल की इसी अवधि का 79 प्रतिशत और सामान्य भंडारण स्तर का 90 प्रतिशत है।
सीडब्ल्यूसी ने नए बुलेटिन में कुछ प्रमुख जानकारी भी साझा की है। उसने सामान्य भंडारण को पिछले 10 वर्षों के औसत भंडारण के रूप में परिभाषित किया है। कुल भंडारण पिछले वर्ष की इसी अवधि और इसी अवधि के दौरान सामान्य भंडारण दोनों की तुलना में कम है। ब्रह्मपुत्र, साबरमती और ताद्री से कन्याकुमारी तक पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों जैसे क्षेत्रों में सामान्य से बेहतर जल भंडारण देखा गया है। सिंधु, सुवर्णरेखा, माही और अन्य नदियों में जल भंडारण सामान्य के करीब पाया गया है। महानदी, कावेरी, ब्राह्मणी और बैतरणी नदियों में कम भंडारण की सूचना मिली है। पेन्नार और कन्याकुमारी और इसी प्रकार के अन्य क्षेत्रों के बीच पूर्व की ओर बहने वाली नदियों में भंडारण की अत्यधिक कमी देखी गई है।



