राजस्थान में पेंशन योजना में गड़बड़ी, सैकड़ों लोगों ने कागजातों में उम्र बढाकर पेंशन उठाई

राजस्थान में सरकारी अधिकारियों द्वारा राजनीतिक व्यक्तियों के साथ मिलीभगत कर लोगों को गलत तरीके से लाभ पहुँचाने का मामला सामने आया है। एक शिकायतकर्ता ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत इस बात का खुलासा किया, जिसके बाद कई अधिकारियों में खलबली मच गई। यह मामला पेंशन योजना में गड़बड़ी का है, जिसमें सैकड़ों लोगों ने बिना योग्यता के ही पेंशन लेना शुरू कर दिया है। कई मामलों में यह देखा गया है कि पुरुष और महिलाओं की उम्र 25 से 30 साल के बीच है, लेकिन उन्होंने अपने राशन कार्ड में उम्र बढ़ाकर 50 साल से अधिक दिखा दी है और पेंशन योजना के लिए आवेदन कर पेंशन उठाना शुरू कर दिया है। इस प्रकार की धांधली से सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
इस मामले का खुलासा शिकायतकर्ता गणपत राम द्वारा RTI के तहत सूचना मांगने पर हुआ। जांच में यह सामने आया कि 30 साल के युवकों ने अपनी उम्र 50 वर्ष बताई है, जबकि 28 साल की महिला ने अपनी उम्र 48 वर्ष बताई है। जानकारी के मुताबिक, बलाया ग्राम पंचायत में ऐसे सैकड़ों परिवार हैं जो गलत तरीके से पेंशन लेकर सरकार को लाखों रुपये का चूना लगा रहे हैं, जबकि वे पेंशन लेने की सरकारी योग्यता पूरी नहीं करते। उदाहरण के तौर पर, बलाया गांव के हरिराम की वास्तविक उम्र 30 साल है, लेकिन पेंशन आवेदन में दिए गए राशन कार्ड में उम्र 49 साल बताई गई है। इस शिकायत के बाद मामले की जांच हुई और दोषी व्यक्तियों को वसूली के नोटिस भी जारी किए गए हैं। इसी प्रकार, 28 वर्षीय महिला शिवरी के राशन कार्ड में उम्र 48 वर्ष बताई गई, जिसके चलते 1 लाख रुपये से अधिक की गड़बड़ी की जांच की जा चुकी है।
कुछ परिवारों ने वृद्धावस्था पेंशन पाने के लिए अपनी और अपने बच्चों की उम्र बढ़ाई है, जैसे 6 साल के बच्चों को 16 और 4 साल की बच्ची को 14 साल का दिखाया गया। एक रोचक मामला यह है कि जिस बच्ची को 14 साल की बताया गया, उसकी बड़ी बहन को 10 साल का दिखाया गया। इन मामलों में पुराने राशन कार्डों का उपयोग किया गया है, जो 2014 में ऑफलाइन थे, और इस दौरान बिना प्रमाणित किए पेंशन शुरू करवाई गई। कई राशन कार्ड बिना ग्राम पंचायत या अन्य किसी जिम्मेदार अधिकारी से प्रमाणित थे। कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति के लिए दो अलग-अलग पीपीओ नंबर जारी किए गए।
इन सभी गड़बड़ियों में सरकारी अधिकारियों के हस्ताक्षर और मोहर लगती है, जिनमें गांव के सरपंच, ग्राम सेवक, और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी शामिल हैं। ये सारे काम ई-मित्र के माध्यम से किए गए हैं। यह स्पष्ट है कि इन गड़बड़ियों में सरकारी तंत्र की भी भूमिका है। नागौर जिले की 15 पंचायतों के लगभग सभी गांवों में 150 से अधिक युवा हैं, जिनकी वास्तविक उम्र 30 से 40 साल के बीच है, लेकिन आधार कार्ड में 55 साल से अधिक बताकर पेंशन का लाभ उठा रहे हैं। इन युवाओं के खाते में हर महीने प्रति व्यक्ति 1150 रुपये पेंशन जमा की जा रही है। अतिरिक्त जिला कलेक्टर नागौर, चंपालाल जीनगर ने बताया कि पंचायत समिति के विकास अधिकारी और उपखंड अधिकारी को इस विषय में जांच अधिकारी नियुक्त कर जांच करवाई गई है। शिकायत मिलने पर जांच की गई, जिसमें शिकायत सही पाई गई, और वसूली के आदेश दिए गए हैं। सरकारी धन का गबन करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। अगर और भी मामले सामने आते हैं, तो उनके खिलाफ भी नियमों के अनुसार कानूनी कार्रवाई करके सरकारी रुपये वसूले जाएंगे।

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