तिहाड़ जेल में रहते हुए पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को लोकसभा चुनाव में हराने वाले इंजीनियर रशीद शेख को जमानत मिल गई है। अब वे 2 अक्टूबर तक चुनावी प्रक्रिया में न केवल भाग ले सकेंगे, बल्कि पूरी ताकत से चुनावी रणनीति को अंजाम भी दे सकेंगे। हालांकि, NIA कोर्ट ने रशीद इंजीनियर पर कुछ पाबंदियां भी लगाई हैं। बारामूला से सांसद अब्दुल रशीद शेख को जमानत के लिए 2 लाख रुपए का बांड भरना होगा।
गौरतलब है कि रशीद इंजीनियर ने जेल में रहते हुए जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला को दो लाख से भी ज्यादा वोटों से शिकस्त दी थी। बारामूला लोकसभा सीट पर रशीद को 4 लाख 72 हजार वोट मिले थे, जबकि उमर अब्दुल्ला को 2 लाख 68 हजार वोट प्राप्त हुए। सज्जाद लोन, जम्मू-कश्मीर पीपल्स कॉन्फ्रेंस से, तीसरे स्थान पर रहे, जिन्हें 1 लाख 73 हजार वोट मिले। अब उमर अब्दुल्ला को लोगों से वोट मांगते हुए देखा जा रहा है, जिसे कुछ लोग प्रतीकात्मक रूप से ‘टोपी को कटोरा बनाना’ कह रहे हैं।
रशीद इंजीनियर को 2019 में ‘आतंकवाद की फंडिंग’ के आरोप में UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था और तब से वे तिहाड़ जेल में बंद हैं। यह कानून 1967 में गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए लाया गया था, और 2019 में केंद्र सरकार ने इसमें संशोधन किया, जिससे अदालत की कार्यवाही के बिना किसी को भी चरमपंथी या देशविरोधी घोषित किया जा सकता है।
रशीद इंजीनियर की जमानत से घाटी के कई नेताओं की चिंताएं बढ़ सकती हैं, खासकर नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के। अगर उन्हें जमात का समर्थन मिलता है, तो इन दोनों पार्टियों को चुनाव जीतने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती पहले ही सवाल उठा चुकी थीं कि रशीद के पास चुनाव लड़ने के लिए पैसा कहां से आया। उमर अब्दुल्ला का ‘टोपी वोट’ और महबूबा का यह सवाल दिखा रहे हैं कि इस बार सियासत की तस्वीर कुछ अलग है।
रशीद इंजीनियर के वोट जितना पीडीपी और एनसी से कटेंगे, उतना ही निर्दलीय उम्मीदवारों को फायदा होगा। और जब सरकार बनाने की बात आएगी, तो निर्दलीय उम्मीदवारों का झुकाव हमेशा सरकार की ओर होता है, यह सब जानते हैं। इसका सीधा फायदा बीजेपी को होता नजर आ रहा है।






