शेयर बाजार में गुरुवार को हाहाकार मच गया। निवेशकों के एक दिन में लगभग 10 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो गया। सेंसेक्स में 1769 अंक (2.10 प्रतिशत) और निफ्टी में 546 अंक (2.12 प्रतिशत) की गिरावट आई। गिरावट का मुख्य कारण ईरान और इजराइल के बीच बढ़ता तनाव, चीन का प्रोत्साहन पैकेज, और एफएंडओ में बदलाव माने जा रहे हैं। इजराइल-ईरान तनाव, चीन, और एफएंडओ का प्रभाव शेयर बाजार पर भी स्पष्ट देखा गया। एक ही दिन में बाजार 1769 अंक गिर गया, जिसके साथ 10 लाख करोड़ रुपये का घाटा हुआ। भारत समेत दुनियाभर के शेयर बाजारों में गिरावट आई है।
गुरुवार को शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। सेंसेक्स लगभग 800 अंकों की गिरावट के साथ खुला और बाजार बंद होने तक 1769 अंक गिरकर 82,497 पर बंद हुआ। निफ्टी 546 अंक गिरकर 25,250.10 पर बंद हुआ। यह इस हफ्ते का तीसरा दिन है जब बाजार में गिरावट आई। सोमवार को सेंसेक्स में 1200 से ज्यादा अंकों की गिरावट आई थी, जबकि मंगलवार को भी इसमें थोड़ी कमी आई। बुधवार को गांधी जयंती के कारण बाजार बंद रहा।
गिरावट के प्रमुख कारण:
- ईरान-इजराइल के बीच तनाव: ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव ने बाजार पर नकारात्मक प्रभाव डाला। ईरान, इजराइल पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले कर रहा है, और इजराइल ने लेबनान में भी हमलों को तेज कर दिया है, जिससे बाजार में भय का माहौल है।
- कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं। इजराइल के जवाबी हमले में ईरान के ऑयल फील्ड्स को निशाना बनाया जा सकता है, जिससे कई देशों में तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है और महंगाई बढ़ने का डर है।
- चीन का प्रोत्साहन पैकेज: भारत में निवेशक चीनी शेयरों के पुनरुत्थान को लेकर चिंतित हैं। पिछले हफ्ते चीनी सरकार के आर्थिक प्रोत्साहन की घोषणा के बाद विश्लेषकों ने चीनी शेयरों में तेजी की भविष्यवाणी की है, जिससे विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसे निकालकर चीनी बाजार में निवेश कर रहे हैं।
- एफएंडओ पर सेबी के उठाए कदम: सेबी ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) से संबंधित नियमों में बदलाव किया है। सेबी के अनुसार, 20 नवंबर से कॉन्ट्रैक्ट साइज के नए नियम लागू होंगे, और हर एक्सचेंज में एक हफ्ते में सिर्फ एक वीकली एक्सपायरी होगी। एक फरवरी से ऑप्शंस बायर्स के लिए अपफ्रंट प्रीमियम और कैलेंडर स्प्रेड जैसे लाभ समाप्त कर दिए जाएंगे। नए नियमों का असर भी बाजार पर दिखाई दिया।
- विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय शेयर मार्केट का वैल्यूएशन काफी ऊंचा है। बाजार में पिछले कुछ समय से तेजी आ रही है, जो कि उचित नहीं है। भारतीय शेयर बाजार की उच्च वैल्यूएशन के कारण इसमें बड़ी गिरावट की आशंका बनी हुई है, हालांकि ऐसी गिरावट जल्द ही कवर हो जाती है।



