मध्य प्रदेश: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया ‘अटल’ जी का सपना पूरा, केन-बेतवा लिंक परियोजना का उद्घाटन

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती के अवसर पर शुरू होगा उनका ड्रीम प्रोजेक्ट, डाक टिकट और सिक्का भी होगा जारी

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती के अवसर पर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्यप्रदेश में केन-बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना की नींव रखी। यह परियोजना वाजपेयी का ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसके पहले चरण में केन-बेतवा नदी को जोड़ा जाएगा। केन-बेतवा लिंक परियोजना से मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर बदल जाएगी। इस परियोजना से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल मिलेगा और पेयजल तथा उद्योगों के लिए भी आवश्यक जल की आपूर्ति होगी। इसके अलावा, यह परियोजना क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर सृजित करने में सहायक होगी। केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजनाओं से सिंचाई क्षेत्र में वृद्धि होगी। 2003 में जहां मध्यप्रदेश का सिंचाई क्षेत्र तीन लाख हेक्टेयर था, वहीं अब यह बढ़कर 50 लाख हेक्टेयर हो गया है। 2025-26 तक यह 65 लाख हेक्टेयर होने की संभावना है, और 2028-29 तक इसे एक करोड़ हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी देश की पहली ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सौर परियोजना का उद्घाटन करेंगे और 1153 अटल ग्राम सुशासन भवनों का भूमि-पूजन भी करेंगे। पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की याद में डाक टिकट और सिक्का भी जारी किए जाएंगे। इस परियोजना से मध्यप्रदेश के 10 जिलों – छतरपुर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़, निवाड़ी, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, विदिशा और सागर को लाभ मिलेगा। लगभग 7 लाख 18 हजार किसान परिवार और 44 लाख लोग पेयजल की सुविधा से लाभान्वित होंगे। 103 मेगावॉट बिजली का उत्पादन भी होगा। बुंदेलखंड में भूजल स्तर में सुधार, औद्योगिकीकरण, निवेश, और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय लोग आत्मनिर्भर होंगे।
उत्तरप्रदेश में 59 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वार्षिक सिंचाई सुविधा होगी और 1.92 लाख हेक्टेयर में मौजूदा सिंचाई को स्थिर किया जाएगा। इस परियोजना से उत्तरप्रदेश के महोबा, झांसी, ललितपुर और बांदा जिलों में सिंचाई सुविधा प्रदान की जाएगी। केन-बेतवा लिंक परियोजना, देश की सबसे बड़ी भूमिगत दबावयुक्त पाइप सिंचाई प्रणाली है, जो मध्यप्रदेश के छतरपुर और पन्ना में केन नदी पर बनाई जा रही है। पन्ना रिजर्व में केन नदी पर 77 मीटर ऊंचाई और 2.13 किमी लंबी दौधन बांध और दो सुरंगों का निर्माण किया जाएगा, जिससे बांध में 2,853 मिलियन घन मीटर जल संग्रहित होगा। इस बांध से 221 किमी लंबी लिंक नहर के जरिए दोनों राज्यों में सिंचाई और पेयजल की सुविधा प्रदान की जाएगी, और केन नदी का अधिशेष जल बेतवा नदी में डाला जाएगा। इस परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री तथा केंद्रीय जल शक्ति मंत्री के बीच 22 मार्च 2021 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में चंदेलकालीन 42 तालाबों का जीर्णोद्धार किया जाएगा, जिससे वर्षा काल में जल संचयन होगा और ग्रामीणों को लाभ मिलेगा।

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