• 10 जनवरी 1949 को हिन्दी को भारत की राजभाषा के रूप में अपनाया गया था
• पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी 2006 को पहली बार विश्व हिन्दी दिवस मनाया
• इस वर्ष 2025 में मनाए जाने वाले विश्व हिंदी दिवस का विषय ‘एकता और सांस्कृतिक गौरव की वैश्विक आवाज’
हिन्दी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की एक अनूठी पहचान है। यह न केवल भारत में, बल्कि हमारे कई पड़ोसी देशों में भी बोली जाती है। भले ही आज इंग्लिश का प्रभाव बढ़ रहा हो, लेकिन हिन्दी का महत्व वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रहा है। दुनिया के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जाती है। पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने कहा था, “हिन्दी का प्रचार और विकास कोई नहीं रोक सकता,” और यह आज के डिजिटल युग में सही साबित हो रहा है। सोशल मीडिया पर भी हिन्दी सामग्री को सबसे अधिक पसंद किया जाता है। एक छोटे से गाँव से लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा तक हिन्दी का प्रभाव देखने को मिलता है। हर साल 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य हिन्दी के प्रसार और महत्व को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना है।

2006 से विश्व हिन्दी दिवस का सफर
10 जनवरी का दिन हिन्दी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। 10 जनवरी 1949 को हिन्दी को भारत की राजभाषा का दर्जा मिला। इसके बाद, 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पहला विश्व हिन्दी सम्मेलन आयोजित कराया, जिसमें 30 देशों के 122 प्रतिनिधि शामिल हुए। 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी को पहली बार विश्व हिन्दी दिवस मनाने की परंपरा शुरू की। इसका उद्देश्य विदेशों में हिन्दी के प्रति लोगों का जुड़ाव बढ़ाना और इसे एक वैश्विक भाषा के रूप में स्थापित करना है।
दुनिया की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक, हिन्दी के साहित्य और फिल्मों को विश्वभर में सराहा जाता है। 2025 में विश्व हिन्दी दिवस का विषय “एकता और सांस्कृतिक गौरव की वैश्विक आवाज” रखा गया है। इसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भाषाई आदान-प्रदान और हिन्दी के उपयोग को प्रोत्साहित करना है।
महात्मा गांधी का हिन्दी के प्रति दृष्टिकोण
हिन्दी के विकास में कई महान कवियों, लेखकों और साहित्यकारों का योगदान है। महात्मा गांधी ने हिन्दी को “भारतीय संस्कृति की आत्मा” कहा था। हिन्दी न केवल एक भाषा है, बल्कि यह एक महान देश की सांस्कृतिक धरोहर है। इसे संरक्षित और प्रचारित करना नई पीढ़ी की जिम्मेदारी है।




