वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में नया आयकर विधेयक 2025 पेश किया। उन्होंने अपने बजट भाषण में आयकर कानूनों को सरल बनाने के लिए नए कानून की घोषणा की थी। लोकसभा में विधेयक पेश करने के बाद, उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से इसे सदन की प्रवर समिति को भेजने का अनुरोध किया।
गुरुवार को लोकसभा में वित्त मंत्री ने आयकर विधेयक, 2025 प्रस्तुत किया और अध्यक्ष से इसे प्रवर समिति को भेजने की अपील की। विपक्षी सदस्यों ने इसका विरोध किया, लेकिन सदन ने ध्वनिमत से इसे पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। विधेयक प्रस्तुत करते हुए, सीतारमण ने अध्यक्ष से आग्रह किया कि मसौदा कानून को प्रवर समिति को भेजा जाए, जो अगले सत्र के पहले दिन तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। उन्होंने प्रस्तावित समिति की संरचना और नियमों पर निर्णय लेने का भी अनुरोध किया। इस बहुप्रतीक्षित विधेयक में “कर निर्धारण वर्ष” और “पूर्व वर्ष” जैसे शब्दों को सरल बनाकर “कर वर्ष” किया गया है, जिससे आयकर कानून की भाषा अधिक स्पष्ट होगी। नए कानून में अनावश्यक प्रावधानों और स्पष्टीकरणों को भी हटाया जाएगा।
नए आयकर कानून की घोषणा बजट में की गई थी
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में नए आयकर कानून की घोषणा की थी, जिसे अब केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। लोकसभा में प्रस्तुत इस नए विधेयक में कुल 536 धाराएं और 23 अध्याय शामिल हैं, तथा यह 622 पृष्ठों का है। इसके पारित होने के बाद आयकर कानून अधिक व्यवस्थित और सरल हो जाएगा।
मूल्यांकन वर्ष की अवधारणा होगी समाप्त
एक बार लागू होने के बाद, यह नया आयकर विधेयक 2025, छह दशक पुराने आयकर अधिनियम 1961 का स्थान लेगा। पुराने कानून में समय के साथ कई संशोधन किए गए, जिससे यह जटिल हो गया था। नए विधेयक में ‘पिछले वर्ष’ (FY) को ‘कर वर्ष’ में बदला गया है और ‘मूल्यांकन वर्ष’ (AY) की अवधारणा को समाप्त कर दिया गया है।
कर निर्धारण प्रक्रिया में बड़ा बदलाव
वर्तमान में, जो आय किसी पिछले वर्ष (2023-24) में अर्जित होती है, उसका कर निर्धारण अगले वर्ष (2024-25) में किया जाता है। नए विधेयक में इस प्रक्रिया को सरल बनाते हुए केवल “कर वर्ष” की अवधारणा अपनाई गई है। आयकर विधेयक, 2025 में कुल 536 धाराएं हैं, जबकि मौजूदा 1961 के कानून में 298 धाराएं थीं। मौजूदा कानून में 14 अनुसूचियां थीं, जो नए कानून में बढ़कर 16 हो गई हैं। हालांकि, नए विधेयक में 23 अध्याय ही रहेंगे, लेकिन इसके पृष्ठों की संख्या घटकर 622 हो गई है, जो मौजूदा भारी-भरकम अधिनियम की तुलना में काफी कम है। 1961 में जब आयकर अधिनियम लाया गया था, तब उसमें 880 पृष्ठ थे। पिछले छह दशकों में इसमें कई संशोधन हुए हैं, जिससे इसे सरल बनाने की आवश्यकता महसूस की गई।






